राजपथ - जनपथ
आत्मानंद स्कूलों में भर्ती का नया तरीका
स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालयों की शुरुआत पिछली सरकार में बड़े सपने के साथ हुई थी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी वही शिक्षा, सुविधाएं और अवसर देने का उद्देश्य था, जो महंगे निजी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों को मिलते हैं। बीते कुछ सालों में इन स्कूलों ने बोर्ड परीक्षाओँ में अच्छे परिणाम भी दिए-टॉपर निकले, जिससे यह बात साफ होती है कि सरकारी स्कूल संसाधनों के मामले में उत्कृष्ट हों तो ऊंची फीस वाले निजी स्कूल कहीं नहीं ठहरेंगे।
लेकिन धीरे-धीरे तस्वीर बदल रही है, जो उतनी उत्साहजनक नहीं दिखती। शिक्षकों की कमी, अधूरा स्टाफ, बुनियादी समस्याएं और समय पर किताबें, कॉपियां तथा गणवेश नहीं मिलने जैसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। जिन स्कूलों को सरकारी शिक्षा व्यवस्था का मॉडल बनना था, वे धीरे-धीरे उन्हीं समस्याओं से घिरते जा रहे हैं जिनसे आम सरकारी स्कूल बरसों से जूझ रहे हैं।
ऐसी ही परिस्थितियों में नया शैक्षणिक सत्र 16 जून से शुरू होने वाला है। इसी बीच सरकार ने आत्मानंद स्कूलों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को जिला स्तर से हटा दिया है। अब राज्य स्तर पर केंद्रीकृत लिखित परीक्षा ली जाएगी। कुछ जिलों में भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे थे, इसलिये पारदर्शिता का तर्क देते हुए यह फैसला लिया गया है। पूरे प्रदेश में करीब 2900 पद खाली हैं। जाहिर है, परीक्षा, परिणाम, आपत्तियां, काउंसलिंग और नियुक्ति, फिर ज्वाइनिंग की पूरी प्रक्रिया में समय लगेगा। शिक्षा विभाग में ऐसी कोई रफ्तार नहीं दिख रही है, जिससे लगे कि सत्र के साथ-साथ स्कूलों को शिक्षक भी मिल जाएंगे। पिछले सत्र में जिला स्तर पर ही भर्ती प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी। कई स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हुई। इस बार भी भर्ती प्रक्रिया में बदलाव का फैसला इतनी देर से लिया गया कि छात्रों को शिक्षकों की कमी का सामना करना पड़ेगा। इस तौर-तरीके से आत्मानंद स्कूलों की विशेष पहचान को कमजोर हो रही है। वैसे भी जब बड़े पदों की स्थायी भर्तियों में निष्पक्षता अक्सर दांव पर लग रही हो तो कौन दावा कर सकता है कि आत्मानंद स्कूलों की भर्ती राज्य स्तर पर साफ-सुथरी ही होगी?
देवेन्द्र, और भूपेश समर्थक आमने-सामने
प्रदेश युवक कांग्रेस चुनाव की गहमागहमी तेज हो गई है। इसके बीच बड़े नेताओं के समर्थकों में खींचतान भी शुरू हो गई है। इस बीच कांग्रेस विधायक देवेन्द्र यादव की सक्रियता की काफी चर्चा हो रही है। देवेन्द्र रविवार को संगठन को सूचित किए बिना पूर्व मंत्री गुरु रुद्र कुमार के साथ पूर्व सीएम भूपेश बघेल के विधानसभा क्षेत्र पाटन पहुंचे, तो इससे भूपेश समर्थकों में नाराजगी देखी गई है।
देवेन्द्र, एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। उनकी युकां में भी काफी दखल है, और मौजूदा अध्यक्ष आकाश शर्मा भी देवेन्द्र यादव के करीबी माने जाते हैं।
अगले महीने युकां प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव हैं। लिहाजा, वह प्रदेश भर का दौरा कर रहे हैं। उन्होंने पार्टी के कई सीनियर नेताओं का समर्थन जुटा लिया है। वह पूर्व मंत्री गुरु रुद्र कुमार के साथ पहले अहिवारा गए। अहिवारा, रुद्र कुमार गुरु का विधानसभा क्षेत्र रहा है। इसके बाद वह पाटन जाकर युवक कांग्रेसियों के साथ बैठक की।
बताते हैं कि पाटन में युवक कांग्रेस की बैठक की सूचना न तो स्थानीय ब्लॉक अध्यक्ष को दी गई थी और न ही संगठन के अन्य पदाधिकारियों को। चर्चा है कि देवेन्द्र ने पूर्व सीएम भूपेश बघेल को भी पाटन में अपनी बैठक की सूचना नहीं दी। इससे भूपेश बघेल समर्थक काफी नाराज बताए जा रहे हैं, और उन्होंने पूर्व सीएम भूपेश बघेल से इसकी शिकायत की है। सोशल मीडिया पर देवेन्द्र यादव के खिलाफ काफी कुछ लिखा जा रहा है।
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल झारखंड में हैं। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। मगर शिकायत उन तक पहुंच रही है। देखना है, आगे क्या कुछ होता है।
फेडरेशन का मिला साथ
सुशासन तिहार के दौरान कई जगहों पर अधिकारी-कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच वाद-विवाद तथा मारपीट तक की घटनाएं सामने आई हैं। अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन पूरी तरह से सरकारी सेवकों के पक्ष में सामने आ गया है। इन सबके बीच दुर्ग में जनसमस्या निवारण शिविर के दौरान भाजपा नेता से कहासुनी के बाद निलंबित जनपद सीईओ ने दुर्ग कमिश्नर के बाद मुख्य सचिव को अभ्यावेदन देकर अपना पक्ष रखा है और बहाली का आग्रह किया है।
निलंबित जनपद सीईओ रूपेश पाण्डेय ने वाद-विवाद के पीछे की असली वजह बताई है। उन्होंने दावा किया कि दुर्ग के हाड़ा ग्राम पंचायत की महिला सरपंच और उनके पति के खिलाफ अलग-अलग मदों की राशि की वसूली का प्रकरण लंबित है। यह प्रकरण पांच साल पुराना है। एसडीएम कोर्ट ने भाजपा के पदाधिकारी पति-पत्नी के खिलाफ राशि की वसूली के लिए आदेश पारित किया था। वे चाहते थे कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए, इसके लिए दबाव बना रहे थे।
पाण्डेय ने लिखित में बताया कि भाजपा नेता समाधान शिविर में मीडिया को लेकर पहुंचे थे। पहले उन्होंने बदसलूकी की और जब इसका जवाब दिया गया तो मीडिया में आधा-अधूरा प्रसारित कराया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता ने उनके खिलाफ पहले भी शिकायत की थी। मैंने स्वयं दुर्ग ग्रामीण विधायक से तमाम शिकायतों की जांच करवाने के लिए कहा था, मगर उनका पक्ष नहीं सुना गया। आधी-अधूरी रिपोर्टिंग के आधार पर कार्रवाई कर दी गई।
जनपद सीईओ भले ही सही कह रहे हों, लेकिन बाद में पूर्व सीएम भूपेश बघेल और अन्य नेताओं से मिलने पहुंचे, जिससे उन पर नेतागिरी करने का आरोप लगाया गया है। भाजपा के स्थानीय नेता जनपद सीईओ के खिलाफ हैं। यह अलग बात है कि फेडरेशन का समर्थन सीईओ के पक्ष में है।
इसके अलावा सीतापुर में नायब तहसीलदार के साथ मारपीट और बेमेतरा में आबकारी अधिकारियों पर सार्वजनिक तौर पर लगाए गए आरोपों से अधिकारी-कर्मचारी लामबंद हो गए हैं। उन्होंने इसको लेकर सरकार को चेताया भी है।


