राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : कांग्रेस में कार्यकारी अध्यक्षों की चर्चा
01-Jun-2026 6:02 PM
राजपथ-जनपथ : कांग्रेस में कार्यकारी अध्यक्षों की चर्चा

कांग्रेस में कार्यकारी अध्यक्षों की चर्चा

चर्चा है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के साथ तीन कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति हो सकती है। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल 10 जून को पूरा हो रहा है। कहा जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस में नियुक्तियां गोवा मॉडल की तर्ज पर की जा सकती हैं और इस पर पार्टी स्तर पर मंथन चल रहा है।

हाल ही में गोवा प्रदेश कांग्रेस में अध्यक्ष के साथ तीन कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। इनमें एम.के. शेख, अल्टोन डीकोस्टा और एडवोकेट कार्लोस अल्वारेस फेरिएरा शामिल हैं। इसके अलावा प्रचार समिति, घोषणा पत्र समिति और कोषाध्यक्ष पद पर भी नियुक्तियां की गई हैं। चर्चा है कि छत्तीसगढ़ में भी कुछ इसी तरह का संगठनात्मक ढांचा बनाया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में पहले भी कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जा चुके हैं। वर्ष 2018 में भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन मरकाम को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन उनके कार्यकाल में कार्यकारी अध्यक्ष नहीं बनाए गए। दीपक बैज के कार्यकाल में भी कोई कार्यकारी अध्यक्ष नहीं है। अब फिर से कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति की चर्चा है और इसमें सामाजिक तथा क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान रखा जा सकता है। माना जा रहा है कि यदि अध्यक्ष सामान्य वर्ग से होता है तो कार्यकारी अध्यक्षों में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है।

खबर यह भी है कि प्रदेश कांग्रेस में कोषाध्यक्ष पद के लिए उपयुक्त नाम की तलाश चल रही है। मौजूदा कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल फरार चल रहे हैं। ऐसे में कुछ कारोबारी पृष्ठभूमि वाले कांग्रेस नेताओं से भी चर्चा किए जाने की खबर है, लेकिन कुछ ने तो अनिच्छा जाहिर कर दी है।

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि नए कोषाध्यक्ष की नियुक्ति के बाद ईडी उनसे पुराने संगठनात्मक और वित्तीय दस्तावेजों के संबंध में जानकारी मांगी जा सकती है। यही वजह है कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी नेता इस जिम्मेदारी को लेने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं। अब देखना यह है कि प्रदेश कांग्रेस का नया संगठनात्मक ढांचा किस रूप में सामने आता है।

...24 छत्तीसगढ़ कैडर के लिए ज़ीरो ईयर

केन्द्र सरकार ने सिविल सर्विसेज़ एग्जामिनेशन (सीएसई) 2024 के ज़रिए  सीधी भर्ती आईपीएस में भरी जाने वाली वैकेंसी का कैटेगरी-वाइज़, कैडर-वाइज़ और इनसाइडर/आउटसाइडर डिस्ट्रीब्यूशन नोटिफ़ाई कर दिया है। इसके बाद अब पास आउट आफिसर्स को राज्य कैडर अलाट होंगे। देश में हमसे भी छोटे राज्यों ने अपनी वैकेंसी दी है लेकिन छत्तीसगढ़ ने अपनी रिक्तियां नहीं भेजा है। इसके चलते कहीं ऐसा न हो कि छत्तीसगढ़ को 24 बैच के आईपीएस न मिले। इस पर यहां पीएचक्यू और गृह विभाग के अधिकारी कहते हैं कि अगले एक साल कोई रिटायरमेंट न होने से रिक्तियां भी नहीं बन रही हैं। हो सकता है अगले वर्ष भी छत्तीसगढ़ से नो वेकेंसी हो। क्योंकि 27 में एक ही रिटायरमेंट है। वैसे इससे आरआर (सीधी भर्ती) का पूरा कैडर मैनेजमेंट ही गड़बड़ाएगा। अफसर चुटकी भी ले रहे हैं कि 26 साल में कैडर फुल हो गया है।

वैसे जनवरी  26 के अनुसार छत्तीसगढ़ का आईपीएस कैडर 142 पदों का है। इनमें से 31 पद केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के हैं और इनमें से 11-12 डेपुटेशन पर हैं शेष सभी राज्य में। अब नए बैच को कैडर अलाटमेंट से पहले राज्य ने विशेष प्रयास कर वैकेंसी न शामिल नहीं कराया तो 24 बैच के नए अफसर नहीं मिलेंगे। और यह ज़ीरो ईयर हो जाएगा।

 बहरहाल यूपीएससी ने अलग-अलग स्टेट कैडर में कुल 147 आईपीएस वैकेंसी नोटिफ़ाई की गई हैं। इसमें 49 इनसाइडर, 98 आउटसाइडर वैकेंसी हैं। इनमें से 74 वैकेंसी अनरिज़र्व्ड के लिए, 41 ओबीसी के लिए, 22 एससी के लिए और 10 एसटी के लिए रिज़र्व हैं।

एजीएमटी कैडर में 4 वैकेंसी नोटिफाई की गई हैं, जिनमें 3 अनारक्षित और 1 ओबीसी शामिल हैं। आंध्र प्रदेश में, 14 नोटिफाई की गई वैकेंसी में 6 अनारक्षित, 5 ओबीसी, 2 एससी और 1 एसटी शामिल हैं। असम-मेघालय की 11 नोटिफाई की गई वैकेंसी इनमें 7 यूआर, 2 ओबीसी और एससी व एसटी के लिए 1-1 पद शामिल हैं। बिहार की 8 अधिसूचित रिक्तियों में 5 यूआर और ओबीसी, एससी और एसटी के लिए 1-1 पद शामिल हैं। गुजरात की 2 रिक्तियों में ओबीसी और एससी के लिए 1-1 पद शामिल हैं।

इसी तरह, झारखंड की 6 अधिसूचित रिक्तियों में 5 यूआर और 1 एससी शामिल हैं। कर्नाटक की 7 रिक्तियों में 3 यूआर, 2 ओबीसी और एससी व एसटी के लिए 1-1 पद शामिल हैं। केरल की 6 अधिसूचित रिक्तियों में 2 यूआर, 3 ओबीसी और एससी के लिए 1 पद शामिल हैं। मध्य प्रदेश की 11 अधिसूचित रिक्तियों में 4 यूआर, 3 ओबीसी, एससी के लिए 3 और एसटी के लिए 1 पद शामिल हैं। महाराष्ट्र की 10 रिक्तियों में 4 यूआर, 3 ओबीसी, 2 एससी और 1 एसटी शामिल हैं। मणिपुर की 4 अधिसूचित रिक्तियों में 2 यूआरपंजाब की 4 वैकेंसी में 2 यूआर, 1-1 ओबीसी और 1 एससी शामिल हैं। सिक्किम की 2 नोटिफाइड वैकेंसी में 1 यूआर और 1 ओबीसी शामिल हैं। तमिलनाडु की 9 वैकेंसी में 5 यूआर, 2 ओबीसी और 1 एससी और एसटी शामिल हैं। त्रिपुरा की 2 वैकेंसी यूआर के लिए हैं। तेलंगाना की 2 वैकेंसी में 1 यूआर और 1 ओबीसी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश की 12 नोटिफाइड वैकेंसी में 7 यूआर, 3 ओबीसी और 2 एससी शामिल हैं। उत्तराखंड की 2 नोटिफाइड वैकेंसी यूआर और महिला के लिए हैं। बंगाल की 15 नोटिफाइड वैकेंसी में 8 यूआ र, 5 ओबीसी और 1-1 एससी एसटी  शामिल हैं। छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश के लिए कोई वैकेंसी नोटिफाई नहीं की गई है।

नसबंदी रिवर्सल के जरिये मुख्यधारा की तलाश 

बीते 31 मार्च को बस्तर को नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया। इसके साथ उन हजारों लोगों के लिए नए जीवन की शुरुआत हुई है, जो वर्षों तक बीहड़ जंगलों में बंदूक लेकर भटकते रहे, अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं, सपनों और पारिवारिक जीवन से दूर रहते हुए। अब उनका एक नया संघर्ष शुरू हुआ है। सरकार का पैकेज जो भी हो परिवार बसाने और समाज से जुडक़र जीवन की नई पारी शुरू करने का संघर्ष। महारानी अस्पताल जगदलपुर में पूर्व नक्सलियों की उमड़ती भीड़ इसी बदलाव की एक मार्मिक तस्वीर है। ये नक्सली वहां रिवर्सल नसंबदी के लिए पहुंच रहे हैं। जब वे नक्सली संगठन का हिस्सा बने तो एक शर्त यह भी जुड़ जाती थी कि वे बच्चे पैदा नहीं करेंगे। भले ही महिला-पुरुष सदस्य आपस में विवाह कर लें। उन्हें नसबंदी कराना पड़ता था। परिवार और बच्चों के अधिकारों से वे वंचित रहते थे क्योंकि उन्हें समाज के बीच रहना भी नहीं है। पर अब जब वे मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं तो उन्हें परिवार और बच्चों की जरूरत महसूस हो रही है। हो सकता है यह मानना हो कि इससे उनका अकेलापन दूर होगा, गांव में उसकी स्वीकार्यता अधिक बढ़ जाएगी। वे पिता बनना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें नसबंदी का रिवर्सल प्रोसेस कराना जरूरी है। यह उतना आसान काम नहीं है, जितना आसान नसबंदी कराना है। रिवर्सल की प्रक्रिया जटिल होती है। काफी सावधानी से इसे पूरा करना होता है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में ही माइक्रोसर्जरी की जाती है। इसकी सफलता की दर भी 30 से 70 प्रतिशत तक ही है। यानि जिसकी सर्जरी होगी, जरूरी नहीं कि अपेक्षित परिणाम मिले और सबमें संतान पैदा करने की क्षमता लौट जाए।

फिर भी इतनी संख्या में नक्सली महारानी अस्पताल पहुंच रहे हैं कि छत्तीसगढ़ के विशेषज्ञ डॉक्टरों से काम नहीं चल पा रहा है। इस काम में मदद के लिए गुजरात, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के चिकित्सकों को भी बुलाया गया है। सब यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के सदस्य हैं। स्थानीय पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के लोग भी लक्ष्य पूरा करने में लगे हैं। कोशिश की जा रही है कि जो भी पूर्व नक्सली नसबंदी रिवर्सल कराना चाहता है, यदि स्वस्थ है तो ऐसा कर दिया जाए। नक्सल पुनर्वास का यह अत्यंत मानवीय पक्ष दिखता है। यदि कोई पूर्व नक्सली परिवार नहीं बसा पाया और संतान पैदा नहीं कर सका तो भी उसे कमी महसूस नहीं हो। इसके लिए समुदाय को आगे आने की जरूरत है।


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