राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : कैसे लगी आग...
31-May-2026 6:32 PM
राजपथ-जनपथ : कैसे लगी आग...

कैसे लगी आग...

बीजापुर के एक गोदाम में आग लगने से 18 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता खाक हो गया। इसकी कीमत करीब 12 करोड़ रुपये आंकी गई है। खास बात यह है कि बीजापुर में तेंदूपत्ता संग्रहण का काम लघु वनोपज संघ के माध्यम से हो रहा था और आगजनी से सीधे-सीधे संघ को नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि वन विभाग ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। सिर्फ डीएफओ रमेश कुमार जांगड़े को हटाकर मुख्यालय में अटैच किया गया है। मगर आगजनी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

बताते हैं कि तेंदूपत्ता संग्रहण के बाद आगजनी की घटनाएं पहले भी होती रही हैं, मगर पूरा नुकसान नहीं होता था। आग लगने की सूचना मिलते ही तेंदूपत्ता ठेकेदार सक्रिय हो जाते थे और मजदूरों को काम में लगाकर आग बुझाने की कोशिश करते थे। इससे काफी नुकसान बच जाता था। इस बार आगजनी में गोदाम में रखा पूरा तेंदूपत्ता खाक हो गया। चूंकि वन अमला खुद संग्रहण करा रहा था, तो पूरा 18 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता कैसे खाक हो गया? यह भी बताया जा रहा है कि बड़ी मात्रा में हरा तेंदूपत्ता भी था, जो आसानी से जलता नहीं है। संग्रहण कार्य से जुड़े वन अधिकारी-कर्मचारी यह कह रहे हैं कि मजदूर उपलब्ध नहीं थे, इसलिए गोदाम से तेंदूपत्ता नहीं निकाल पाए। आग कैसे लगी, इसका भी कोई स्पष्ट कारण पता नहीं चल पाया है।

हल्ला है कि तेंदूपत्ता की फर्जी खरीद भी हुई थी। ऐसे में मामले को दबाने के लिए आग लगाई गई है। फिलहाल तो आगजनी को लेकर जितने मुंह, उतनी बातें हो रही हैं। वन मंत्री केदार कश्यप और लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूप सिंह सलाम जिम्मेदारों को नहीं बख्शने की बात कह रहे हैं। एमडी अनिल साहू भी चार दिन तक बीजापुर में डेरा डाले हुए थे। मगर एक बात साफ है कि यह मामला आसानी से किसी के गले नहीं उतर रहा है। पुलिस भी मामले की जांच कर रही है। देखना है कि आगे क्या कुछ निकलकर बाहर आता है।

अब बाउंसर रिकवरी एजेंट नहीं

कोई भी बैंक अब निजी सुरक्षा एजेंसी और सिक्स पैक, डोले-शोले वाले बाउंसर्स को लोन रिकवरी एजेंट नहीं बना सकेंगे। इतना ही नहीं टाइम बे-टाइम कॉल भी नहीं कर सकेंगे। इसके लिए रिकवरी एजेंट का पढ़ा लिखा बैंकों से ट्रेनिंग वह भी इंस्टीट्यूट आफ बैंकिंग एंड फाइनेंस से पास आउट होना जरूरी है। यह प्रोटोकॉल आरबीआई ने तय कर दिया है।

आरबीआई ने ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लोन रिकवरी के नियमों में बदलाव किया है। बैंक अब उन्हीं लोगों को लोन रिकवरी एजेंट बना सकेंगे जिन्होंने इंस्टीट्यूट आफ बैंकिंग एंड फाइनेंस (आईआईबीएफ) से प्रशिक्षण प्राप्त किया हो। लोन रिकवरी एजेंट के लिए आईआईबीएफ प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाता है। इसके अलावा बैंकों को लोन लेने वाले ग्राहकों को अपनी रिकवरी एजेंसी और एजेंट की पूरी जानकारी भी देगा।

रिकवरी एजेंसी में बैंक अगर कोई बदलाव करता है तो बदलाव के बारे में भी उधार लेने वालों को सूचित करना होगा। नए नियम अक्टूबर से लागू होंगे। बैंक की तरफ से नियुक्त रिकवरी एजेंसी को इस बात की गारंटी देनी होगी कि उनके एजेंट लोन रिकवरी के लिए निर्धारित सभी नियमों का पालन करेंगे। बैंक के कर्मचारी या रिकवरी एजेंट किसी भी ग्राहक को रिकवरी संबंधित फोन कॉल सुबह आठ बजे से शाम सात बजे के बीच ही कर सकेंगे।

लोन रिकवरी एजेंट को ग्राहक के घर भेजने से पहले बैंक कम से कम एक दिन पहले ई-मेल या फोन मैसेज के जरिये एजेंट की पूरी जानकारी देगा। अगर ग्राहक का ई-मेल या फोन नंबर नहीं है तो तीन दिन पहले ग्राहक के पते पर नोटिस भेजा जाना चाहिए। नए नियमों के मुताबिक, अगर लोन लेने वाले ने उधार से संबंधित कोई शिकायत बैंक में दर्ज करा रखी है तो उस शिकायत के निपटान तक लोन लेने वाले के पास बैंक किसी कर्मचारी या रिकवरी एजेंट को नहीं भेज सकता है।

कर्ज लेने वाले के पास बैंक कर्मचारी या रिकवरी एजेंट की तरफ से किए जाने वाले सभी कॉल की तारीख और समय दर्ज किए जाएंगे। अगर कॉल के दौरान बातचीत रिकॉर्ड की जा रही है तो इसकी जानकारी भी ग्राहकों को दी जाएगी। इस रिकॉर्डिंग को छह माह तक रखा जा सकेगा। बैंक को कॉल रिकॉर्ड करने का कारण भी बताना होगा। लोन की रिकवरी के लिए बैंक ग्राहक के मोबाइल या टैबलेट में किसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं करेगा। अगर मोबाइल फोन बैंक से उधार लेकर नहीं खरीदा गया है तो बैंक फोन को लोन रिकवरी के नाम पर सीज नहीं कर सकेंगे।

छत्तीसगढ़ में सेहत का हाल

हाल ही में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की ताजा रिपोर्ट-एनएफएचएस-6 जारी की गई है। इसमें छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य, पोषण, परिवार कल्याण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़े कई बिंदु शामिल हैं। राज्य स्तर के विस्तृत आंकड़े फैक्टशीट में उपलब्ध हैं, लेकिन कुल मिलाकर राज्य में कई सकारात्मक बदलाव दिखे हैं।

पहले कुछ अच्छी बातों की जानकारी दें। राज्य में संस्थागत प्रसव की दर काफी अच्छी है एनएफएचएस-5 में पहले से ही 85 प्रतिशत से अधिक थी। अब यह 90.6 प्रतिशत हो चुका है जो राष्ट्रीय औसत 88.6 से ज्यादा है। इसके चलते मातृ एवं शिशु मृत्यु दर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को एंटीनेटल केयर मिलने में सुधार हुआ है।  12 से 23 महीने तक के बच्चों का पूर्ण टीकाकरण कवरेज 87.1 प्रतिशत तक बढ़ा है।  स्टंटिंग यानि ऊंचाई के हिसाब से कम वजन की दर 35.5 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत रह गया है। टोटल फर्टिलिटी रेट अर्थात टीएफआर नियंत्रण में है। गर्भनिरोधकों के उपयोग में भी वृद्धि हुई है। महिलाओं में स्वास्थ्य बीमा कवरेज के लिए भी जागरूकता बढ़ी है।

मगर, कुछ क्षेत्रों में चुनौतियां बनी हुई हैं। जैसे अपने राज्य में 15 से 49 वर्ष के बच्चों और महिलाओं में एनीमिया की दर पहले से ही ऊंची थी। एनएफएचएस-5 में बच्चों में 67 प्रतिशत थी। एनएफएचएस-6 में भी यह एक बड़ी समस्या बनी हुई है, खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में।

इधर, हालांकि बच्चों में स्टंटिंग घटी है, लेकिन वेस्टिंग, अंडरवेट और डाइट की में अभी भी कमी है। एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग में भी गिरावट देखी गई है। इसके अलावा वयस्कों, विशेषकर महिलाओं में ओवरवेट यानि मोटापे की समस्या बढ़ रही है। हाई ब्लड शुगर और हाइपरटेंशन के मामले भी बढ़ रहे हैं।

सर्वे में कहा गया है कि अनावश्यक सिजेरियन डिलीवरी बढ़ रही है। यह पूरे देश का हाल है और छत्तीसगढ़ भी अछूता नहीं है। यह 27.2 प्रतिशत तक है, जो कि प्राइवेट अस्पतालों में अधिक है। छत्तीसगढ़ में इस पर नजर रखने की जरूरत है।

स्टंटिंग, एनीमिया आदि की जो समस्या पाई है वह बस्तर जैसे आदिवासी इलाकों में अधिक है, क्योंकि वहां स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में कमी है। आयुष्मान भारत और नेशनल हेल्थ मिशन योजनाओं का अधिक लाभ दूरस्थ स्थानों में पहुंचाने की जरूरत है।


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