राजपथ - जनपथ
कड़वाहट के बाद कदमबोशी
कांग्रेस पार्टी में अक्सर घर का झगड़ा चौक-चौराहों में फैल जाता है। सत्ता से दूर होने के बाद भी यह संघर्ष खत्म नहीं होता। इन दिनों प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की संभावित नई नियुक्ति को लेकर यही हो रहा है।
पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के बयानों से साफ है कि वे हाईकमान का आदेश मिलते ही इस पद को संभालने के लिये राजी हैं, वहीं वर्तमान अध्यक्ष दीपक बैज को लगता है कि लगातार पार्टी की हार के बावजूद उनके लिए कोई शक्ति हाईकमान में मौजूद है, जिससे एक कार्यकाल उनको फिर मिल जाएगा। कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष प्राय: मुख्यमंत्री पद के दावेदार हो ही जाते हैं, ऐसा मध्यप्रदेश के जमाने से चला आ रहा है और दूसरे कई राज्यों में भी ऐसा देखा जा रहा है।
बैज और सिंहदेव के बीच बयानों में कड़वाहट के बीच रविवार 24 मई को आदिवासी मछुआरों के सम्मेलन में इन दोनों नेताओं की आपस में पहली मुलाकात हुई। बैज, सिंहदेव का पैर छूते देखे गए लेकिन उससे ज्यादा राजनीतिक शिष्टाचार का संदेश डॉ. चरण दास महंत ने दिया। बुका में सम्मेलन के दौरान जब लंच का मौका आया तो महंत ने अपनी जगह छोड़ी और बैज तथा सिंहदेव को एक साथ अगल-बगल बिठा दिया। वे इसके पहले अलग-अलग बैठने के लिए जगह ढूंढ चुके थे। डॉ. महंत ने कहा आप दोनों एक साथ बैठकर लंच करें, मैं आप दोनों के बीच में नहीं आऊँगा। डॉ. महंत की यह तरकीब काम आई और फिर दोनों नेता हंस-हंसकर बात करते हुए भी दिखे। कांग्रेस के भीतर मौजूद अंदरूनी कलह को थोड़ा शांत करने में इससे मदद मिली। देखना होगा, कि अध्यक्ष पद की रेस में इससे क्या फर्क पड़ेगा।
पंजे की असली पसंद?
पांच राज्यों के चुनाव निपटने के बाद कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर पर फेरबदल की चर्चा चल रही है। कुछ राज्यों में अध्यक्ष का कार्यकाल खत्म हो रहा है, वहां भी नियुक्तियां होनी हैं। इनमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल 10 जून को खत्म हो रहा है। उनकी जगह पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव का नाम प्रमुखता से उछला है। इन सबके बीच किसी आदिवासी को ही प्रदेश की कमान सौंपने की वकालत भी की गई है।
हालांकि प्रदेश अध्यक्ष बदलने की चर्चाओं पर प्रदेश कांग्रेस के दो बड़े नेता पूर्व सीएम भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत खुले तौर पर कुछ भी कहने से परहेज कर रहे हैं। मगर दोनों की पसंद अलग-अलग बताई जा रही है। चर्चा है कि डॉ. महंत, सिंहदेव के पक्ष में बताए जाते हैं। जबकि पूर्व सीएम भूपेश बघेल खेमे से किसी आदिवासी को ही प्रदेश की कमान सौंपने के पक्षधर बताए जाते हैं।
यह तर्क दिया जा रहा है कि महिला कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष का पद ओबीसी से लिया गया है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष का पद आदिवासी वर्ग से होना चाहिए। इसके लिए पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के अलावा मोहला-मानपुर के विधायक इंदरशाह मंडावी का नाम भी उछला है।
प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू की दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की भी खबर है। साहू के खरगे से मधुर संबंध हैं। उन्होंने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। एक खबर यह भी है कि प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर विवाद जारी रहता है, तो नियुक्ति कुछ समय के लिए टल भी सकती है। वैसे भी जून के आखिरी हफ्ते में जिला अध्यक्षों का प्रशिक्षण शिविर बस्तर में होने जा रहा है। इसमें खरगे के अलावा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शिरकत करेंगे। देखना है आगे क्या कुछ होता है।
पार्टी के भीतर नोटिसबाजी
सरगुजा संभाग के एक जिले में भाजपा के जिलाध्यक्ष ने युवा मोर्चा के पदाधिकारी को नोटिस जारी किया है। युवा मोर्चा पदाधिकारी ने सार्वजनिक तौर पर मंच से पार्टी के विधायक की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे।
बताते हैं कि भाजयुमो नेता, महिला विधायक के करीबी रहे हैं, लेकिन ठेका-सप्लाई को लेकर दबाव बनाने पर विधायक ने भाजयुमो नेता को किनारे कर दिया। इसके बाद से भाजयुमो नेता विधायक के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। एक-दो ऑडियो भी वायरल हुए हैं, जिनमें कथित तौर पर विधायक निजी चर्चा में अपनी ही पार्टी के नेताओं पर नाराजगी जाहिर कर रही हैं।
वायरल ऑडियो के पीछे भी भाजयुमो नेता का हाथ माना जा रहा है। बताते हैं कि विधायक ने पारिवारिक सदस्य की बीमारी की वजह से चुप्पी साध रखी है, लेकिन वे कानूनी कार्रवाई भी कर सकती हैं। पार्टी के लोगों के बीच झगड़ा चल रहा है, तो कांग्रेस के लोग मजे ले रहे हैं। देखना है आगे क्या होता है।
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