राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : सचिन एक नई चुनौती छोडक़र गए...
23-Apr-2026 6:05 PM
राजपथ-जनपथ : सचिन एक नई चुनौती छोडक़र गए...

सचिन एक नई चुनौती छोडक़र गए...

क्रिकेट के शिखर पुरुष, भारत रत्न सचिन तेंदुलकर का बस्तर आना सेलिब्रिटी विजिट जैसा नहीं था। यह संयोग ही है कि जब नक्सलवाद का लगभग खात्मा हो चुका है, बंदूकों की गूंज थम रही है, यहां के मैदानों में बल्ले की धमक सुनाई देगी। जो 50 मैदान तैयार किए गए हैं उनमें केवल क्रिकेट ही नहीं, बल्कि वालीबॉल, फुटबॉल और तीरंदाजी, दौड़ जैसे एथलेटिक्स के लिए भी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। तेंदुलकर ने अपनी खेल अकादमी और सामाजिक पहल के लिए बस्तर का चयन सही मौके पर किया है। यहां की नैसर्गिक प्रतिभाओं ने माओवादी हिंसा के बीच भी काफी नाम कमाया है और अब उनके शारीरिक कौशल और ऊर्जा को सामने लाने का और बेहतर मौका मिलेगा।

इससे जुड़ी कुछ बातें दिलचस्प हैं। उन्होंने तीन साल पहले कहा था कि जो गांव अपने यहां के मैदान को सबसे अच्छे तरीके से संवारेगा, उससे मिलने वे स्वयं पहुंचेंगे। छिंदनार के युवाओं ने उनकी चुनौती को स्वीकार किया। उन्होंने श्रमदान करके एक समतल मैदान तैयार किया, बल्कि बड़ी मेहनत से रखरखाव करते हुए घास का मैदान तैयार किया। सचिन उनसे प्रभावित हुए। वे खुद छिंदनार तो नहीं जा सके लेकिन छिंदनार के युवाओं से उन्होंने आत्मीयता के साथ मुलाकात की।

अब सचिन ने अपना वह वादा पूरा कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि बस्तर के खिलाड़ी युवाओं के लिए वे विश्व स्तर की बुनियादी ढांचा तैयार करेंगे लेकिन असल सवाल यहीं से शुरू होता है। स्ट्रक्चर अपने यहां सरकारी तौर पर खूब तैयार होते रहे हैं। बड़े-बड़े इनडोर, आउटडोर स्टेडियम बनते हैं, कैंपस, उद्यान तैयार किए जाते हैं पर रखरखाव और मेंटनेंस के अभाव में एक समय के बाद वे खंडहर में बदल जाते हैं। सचिन ने अपने वक्तव्य में कहा है कि खेल समितियों, जिला प्रशासन और उनके अपने फाउंडेशन की साझा निगरानी के जरिये उद्देश्यों को पूरा किया जाएगा। रखरखाव सही रहा तो बस्तर से हमें क्रिकेट ही नहीं दूसरे खेलों के भी बड़े-बड़े सितारे मिलेंगे, बस्तर स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित होगा, जो आखिरकार पर्यटन, अर्थव्यवस्था और रोजगार में भी मदद करेगा।

अब गेंद छत्तीसगढ़ सरकार, स्थानीय संगठनों और नागरिकों के पाले में है। इन सुविधाओं का लाभ निरंतर मिले इसके लिए रखरखाव, बिजली-पानी, सुरक्षा की निरंतरता जरूरी है। दूर-दराज से प्रतिभाओं को ढूंढकर लाना और उन्हें पर्याप्त साधन उपलब्ध कराते हुए इन केंद्रों में प्रशिक्षण देना होगा। खासकर, खेल व शिक्षा विभाग के अफसरों को समझना होगा कि यह सरकारी ढांचा नहीं है। इसके पीछे एक महान खिलाड़ी की खून पसीने से कमाई हुई राशि और भावनाएं जुड़ी हैं।

प्रताडऩा की एक और शिकायत

पुलिस महकमे में प्रताडऩा की शिकायतें आम होती जा रही हैं। हाल ही में आईजी रतनलाल डांगी को भी निलंबित किया गया है, जिन पर यौन उत्पीडऩ के आरोप लगे हैं। अब एक और पुलिस अफसर के खिलाफ शिकायत सामने आई है। हालांकि इस मामले में अब तक कोई औपचारिक कागजी कार्रवाई नहीं हुई है, और इसे आंतरिक स्तर पर सुलझाने की कोशिश जारी है।

मामला मैदानी इलाके के एक जिले का बताया जा रहा है, जहां एसएसपी स्तर के एक अफसर पर प्रताडऩा के आरोप लगे हैं। खास बात यह है कि ये आरोप किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि उसी जिले में पदस्थ एक महिला डीएसपी ने लगाए हैं।

बताते हैं कि एसएसपी पर पहले भी खराब बर्ताव को लेकर शिकायतें रहीं हैं। मगर इस बार महिला डीएसपी के सामने आने से मामला गंभीर हो गया है। महिला डीएसपी ने आईजी से मुलाकात कर अपनी शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि एसएसपी बैठकों के दौरान उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं और उनके लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं।

महिला डीएसपी ने यह भी बताया कि वह एसएसपी के व्यवहार से आहत हैं और इस कारण काम करने में असमर्थ महसूस कर रही हैं। चर्चा है कि आईजी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी को सख्त हिदायत दी है। फिलहाल आईजी के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत होता नजर आ रहा है, और महिला डीएसपी एक महीने के अवकाश पर चली गई हैं। देखना है आगे क्या होता है।

इस आदेश की जरूरत क्यों पड़ी?

नौकरी के साथ साथ नेतागिरी नहीं चलेगी, यानी दलीय राजनीति में सक्रिय कर्मचारियों पर कार्यवाही की जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग का यह आदेश मंत्रालय से जिलों तक अग्रेषित किया गया था।  कल जारी इस आदेश से कर्मचारियों में  हलचल बढ़ गई थी। सब इस पर नाराजगी जता रहे थे। वो यह भी टटोल रहे हैं कि ऐसी क्या स्थिति निर्मित हो गई कि सामान्य प्रशासन विभाग को ऐसा पत्र जारी करना पड़ा.? मगर देर रात विरोध के बाद आदेश को निरस्त भी कर दिया गया। 

चर्चा है कि सरकार को ऐसा कोई संकेत और खुफिया रिपोर्ट मिली है कि नया रायपुर के मंत्रालय/ संचालनालय पुलिस मुख्यालय/ अरण्य भवन/ की सूचनाएं बाहर निकल रही हैं जो विपक्ष के हाथ लग रही हैं। जीएडी और इंटेलिजेंस विंग ने ऐसे लोगों को चिन्हित करते हुए  ताकीद स्वरूप यह प्रारंभिक आदेश जारी किए थे। भविष्य में यह बदस्तूर जारी रहा तो उन पर कार्यवाही भी तय है।

बताया जा रहा है कि एक अकादमी में अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर ऐसे ही एक गोपनीय प्रस्ताव मंत्रालय से निकल कर पार्टी और समाज में वायरल होने पर जमकर बवाल हुआ था। प्रदेश और शीर्ष नेतृत्व तक शिकायत-सफाई के दौर चले। और अरसे बाद नियुक्ति हो सकी। वैसे किसी न किसी कर्मचारी अधिकारी की कोई ना कोई पार्टी,  नेताओं के साथ आस्था, विचारधारा जुड़ी होती है तभी तो शासन के आदेशों की गोपनीय पत्र की जेरोक्स कॉपी बाहर निकल रही है। जबकि यह आदेश जीएडी के ऑफिशियल वेबसाइट में आज तक अपलोड नहीं है। यह पत्र भी बाहर ओपन सीक्रेट हो गया। और देर रात 11 बजे जीएडी ने आदेश को स्थगित कर दिया। चर्चा है कि रात सरकार की ओर से जीएडी अफसरों पर नाराजगी जताई गई। इस पर पहले तो अफसरों ने कहा कि यह सालाना जारी किया जाने वाला नियमित स्मरण पत्र है। जब बात बिना पूछे जारी करने की आई तो उसे भी वापस लेने पर सहमति दी गई। आज जब आदेश वापस लिया गया।

अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा का कहना था कि  इस आदेश का विरोध सचिव सामान्य प्रशासन एवं उप सचिव से व्हाट्सएप के माध्यम से किया था। भविष्य में इस आदेश का विरोध हर स्तर पर करने का लेख किया था। इसके बाद आदेश को वापस लेना पड़ा।


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