राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : नारी शक्ति का अपमान बन गई साडिय़ां
17-Apr-2026 6:19 PM
राजपथ-जनपथ : नारी शक्ति का अपमान बन गई साडिय़ां

नारी शक्ति का अपमान बन गई साडिय़ां

छत्तीसगढ़ में महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े पहली बार विधायक बनीं और तुरंत मंत्री बन गईं, अपने विभाग में लगातार विवादों में घिरी रहती हैं। लगता है कि  उनका भोलापन अब आधिकारिक नीति का हिस्सा बन चुका है।

पहले आंगनबाड़ी केंद्रों में घटिया उपकरण और खेल सामग्री की सप्लाई का मामला आया। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नारी शक्ति के लिए बड़े-बड़े फैसले ले रहे हैं। इधर आंगनबाड़ी की नारियों, कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए करीब 10 करोड़ रुपये खर्च कर खरीदी गई साडिय़ां विवादों में है। बाजार में जो साड़ी 200 रुपये में मिल सकती है उसे 500 रुपये में खरीदी गईं। लंबाई साढ़े 5 मीटर होनी चाहिए पर छोटी निकली। इतना पतला कि पहनते ही फट जाने का डर, और धोने से रंग उड़ जाने का।  महिलाएं पहनने से इनकार कर रही हैं। इसके खिलाफ आंदोलन कर रही महिलाओं का कहना है कि ये तो पोंछा लगाने के लायक भी नहीं है।

मंत्री जी का बचाव देखकर तो तालियां बजानी चाहिए। उन्होंने खुद साड़ी धोई, सुखाई और घोषणा की है, सब ठीक है, बस कुछ मामलों में खामी है। फिर जांच समिति बना दी गई। ठीक वैसे ही जैसे पिछले उपकरण घोटाले में बनाई गई थी। खराब सामान बदल दिया जाएगा, बस।

खुद धोया वाला वैज्ञानिक तरीका याद दिलाता है महाराष्ट्र के पुराने आंगनबाड़ी घोटाले की, वहां आम आदमी पार्टी ने पंकजा मुंडे के खिलाफ 54 सौ करोड़ के टेंडर में फर्जी महिला मंडलों के जरिए कमीशनखोरी का आरोप लगाया था।  नक्सल प्रभावित बीजापुर इलाके में आंगनबाड़ी भवनों की मरम्मत के नाम पर पंचायत सचिवों ने एक ही फर्म के साथ सांठगांठ कर वित्त आयोग की राशि लूट ली। भवन हैं ही नहीं, फोटो फर्जी, बिल फर्जी। घटिया माल आ जाता है, तो या तो अधिकारी सो रहे हैं या उनकी सांठगांठ होती है। पता नहीं मंत्री की सहमति सप्लाई के बाद मिलती है, या उसके पहले ही।

ये सडक़ कहां तक जाएगी?

पड़ोसी जिले में खराब सडक़ों को लेकर कांग्रेस का धरना-प्रदर्शन इन दिनों चर्चा में है। ऊपर से मामला सडक़ निर्माण में गड़बड़ी का दिख रहा है, लेकिन अंदरखाने कहानी कुछ और ही इशारा कर रही है।

दरअसल, कुछ समय पहले कांग्रेस के एक राष्ट्रीय नेता का जिले में कार्यक्रम हुआ था। जिला संगठन ने स्वागत-सत्कार में कोई कसर नहीं छोड़ी। सर्किट हाउस में ठहरने की व्यवस्था की गई और भोजन के लिए पीडब्ल्यूडी के ईई से सहयोग मांगा गया। लेकिन ईई ने साफ मना कर दिया।

इसके बाद जिला पदाधिकारियों ने आपस में चंदा कर नेताजी के खानपान का इंतजाम किया। कार्यक्रम तो बढिय़ा निपट गया, लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई।

ईई के इलाके में सडक़ निर्माण में गड़बड़ी सामने आई, तो कांग्रेसजन सक्रिय हो गए। करीब साढ़े 6 करोड़ की लागत से बनी सडक़ में गुणवत्ता पर सवाल उठे, और जहां पुलिया का निर्माण होना था, वहां कोई निर्माण नहीं हुआ ।

धरना-प्रदर्शन के दबाव में ईई को लिखित में सडक़ सुधार और पुलिया निर्माण का आश्वासन देना पड़ा। इतना ही नहीं, वे कांग्रेस नेताओं से पुरानी नाराजगी के लिए हाथ जोडक़र माफी मांगते भी नजर आए।

हालांकि  कांग्रेसजन अभी नरम पडऩे के मूड में नहीं दिख रहे हैं। अब देखना है कि मामला सिर्फ सडक़ तक सीमित रहता है या आगे और परतें खुलती हैं।

सादगी की सक्रियता भारी पड़ी

भाजपा के दो नेता ऐसे हैं, जिनकी सोशल मीडिया सक्रियता कई बार उलटी पड़ जाती है। सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज इसका ताजा उदाहरण हैं।

हाल ही में उन्होंने दिल्ली स्थित एक रेस्टोरेंट में भोजन करते हुए अपनी तस्वीर फेसबुक पर साझा की। पोस्ट में उन्होंने लिखा 'सादगी ही असली पहचान है'। साथ ही यह भी कहा कि उन्होंने आम नागरिकों के बीच बैठकर, बिना किसी दिखावे के भोजन किया और जनप्रतिनिधि का दायित्व जनता के बीच रहकर उनके जीवन को समझना है।

लेकिन यह पोस्ट लोगों को रास नहीं आई। कई यूजर्स ने उन्हें सीधे-सीधे घेर लिया। एक यूजर ने लिखा कि वो दिल्ली है महाराज, वहां आपके जैसे सैकड़ों घूमते हैं, कोई पहचानता नहीं। दूसरे ने तंज कसते हुए कहा कि अंबिकापुर से बलरामपुर के रोड में बाइक से जाओ और रास्ते के किसी घर में खाना खाओ, तब जनता से जुड़ाव होगा।

एक अन्य टिप्पणी में कहा गया कि कमाल है, सादगीपूर्वक किए कार्य को भी फोटो खींचकर बताना पड़ रहा है।

कुछ इसी तरह की स्थिति रायपुर जिले के एक भाजपा विधायक की भी बताई जा रही है, जिनके पोस्ट पर भी यूजर्स अक्सर आक्रामक प्रतिक्रिया देते हैं।


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