राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : बनवास का दर्द और अफसरों की कहानी
25-Mar-2026 7:30 PM
राजपथ-जनपथ : बनवास का दर्द और अफसरों की कहानी

बनवास का दर्द और अफसरों की कहानी

प्रदेश भाजपा में इस बार कार्यकारिणी गठन के बाद एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, नरेशचंद्र गुप्ता। संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहने वाले गुप्ता को नई कार्यकारिणी में जगह नहीं मिल पाई। जबकि वो प्रदेश भाजपा के कार्यालय मंत्री रह चुके हैं। उनकी पहचान उन नेताओं में रही है, जो चुनावी मौसम में विरोधियों के खिलाफ पुख्ता शिकायतें तैयार कर चुनाव आयोग तक पहुंचाते थे।

गुप्ता की सक्रियता सिर्फ नेताओं तक सीमित नहीं रही। उन्होंने तत्कालीन मुख्य सचिव अमिताभ जैन, डीजीपी अशोक जुनेजा और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी डॉ. आनंद छाबड़ा सहित कई बड़े अफसरों के खिलाफ शिकायतों की झड़ी लगा दी थी। मामला पीएमओ तक पहुंचा और लंबे समय तक इन शिकायतों की चर्चा होती रही।

लेकिन, घटनाक्रम ने अलग ही मोड़ लिया। जिन अफसरों पर गुप्ता ने सवाल उठाए, वे बाद में और मजबूत स्थिति में नजर आए। अशोक जुनेजा को रिटायरमेंट के बाद एक्सटेंशन मिला और उन्होंने सम्मानजनक तरीके से कार्यकाल पूरा किया। अमिताभ जैन रिटायरमेंट के बाद सीआईसी बन गए, जबकि डॉ. आनंद छाबड़ा प्रमोशन पाकर एडीजी बन गए।

यही वह बिंदु था, जहां से गुप्ता की अति सक्रियता पार्टी के भीतर असहजता का कारण बनने लगी। संगठन में यह संदेश गया कि लगातार शिकायतों की राजनीति उलटी भी पड़ सकती है। नतीजा, पहले कार्यालय मंत्री पद से हटे और अब कार्यकारिणी से भी बाहर हो गए।

हालांकि, राजनीति में संभावनाएं खत्म नहीं होतीं। निगम-मंडलों में नियुक्तियां बाकी हैं, जहां उनके लिए अभी भी गुंजाइश मानी जा रही है। लेकिन, उनके फेसबुक पोस्ट ने अंदरूनी पीड़ा उजागर कर दी, बनवास केवल जगह से नहीं होताज् अपनों के बीच अजनबी बनकर जीना भी बनवास है।

पेट्रोल-डीजल में अभी जेब ढीली नहीं होगी 

खाड़ी देशों से कच्चे तेल की सप्लाई में दिक्कतें हैं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम ऊपर जा रहे हैं, लेकिन देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें थमी हुई हैं। प्रीमियर वेरियेंट के ईंधन और रसोई गैस के दाम में हुई थोड़ी बढ़ोतरी के साथ-साथ लोगों के भीतर यह सवाल घूम रहा है कि पेट्रोल-डीजल में राहत वैसे कब तक रहेगी। पिछले अनुभव बताते हैं कि यह सहूलियत स्थायी नहीं है। इस समय असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल व केंद्र शासित पुडुचेरी में विधानसभा के चुनाव हैं। ऐसा तो हो नहीं सकता कि बाकी राज्यों में कीमतें बढ़ा दी जाएं और इन राज्यों को छोड़ दिया जाए।

कुछ पुराने दिनों को याद कर लें। 2019 लोकसभा चुनाव के लिए मतदान चल रहा था तो कीमतें नहीं बढ़ीं। अंतिम चरण 19 मई को खत्म होते ही 20 मई से रोजाना बढ़ोतरी शुरू हो गई। अगले 9 दिनों में पेट्रोल 83 पैसे और डीजल 73 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया। 2022 के पांच राज्यों यूपी, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में चुनाव हुए। पूरे 137 दिनों तक कीमतें पूरी तरह फ्रीज रहीं। चुनाव खत्म होते ही 22 मार्च 2022 से 80 पैसे प्रति लीटर बढ़ोतरी हुई और उसके बाद लगातार कई बार बढ़ाई गईं। ऐसा ही 2018 में कर्नाटक चुनाव और 2017 में गुजरात चुनाव के दौरान भी कीमतें अचानक स्थिर हो गई थीं और वोटिंग के बाद तेजी से बढ़ी।

जब क्रूड ऑयल के दाम निचले स्तर पर आ गए थे तब भी पेट्रोलियम पदार्थों के दाम कम नहीं किए गए थे। अब जब इसकी कीमत 60 से 70 प्रतिशत अधिक हो चुकी है तो जाहिर है हम- आप बढ़ी हुई कीमत का सामना करने से बचेंगे नहीं। पांच चुनावी राज्यों के मतदाताओं का हमें शुक्रगुजार होना चाहिए कि उनकी नाराजगी से बचने के लिए सरकार ने हमें भी थोड़े दिन के लिए सही राहत दी है और पुरानी कीमत पर पेट्रोल-डीजल खरीदने का मौका मिल रहा है। सबसे अंत में मतदान 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में होने जा रहा है। तब तक कोई टेंशन नहीं लेना है।

परीक्षा की शुचिता कठघरे में..

2019 से 2024 तक 19 राज्यों में कम से कम 65 बड़े पेपर लीक हुए, जिनसे 1.7 करोड़ से अधिक युवा प्रभावित हुए। राजस्थान अकेला पेपर लीक की राजधानी बन चुका है, जहां 2015-2023 के बीच 14 से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं। छत्तीसगढ़ भी अब ऐसे राज्यों की सूची में शामिल हो गया है। 14 मार्च को छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 12वीं हिंदी परीक्षा हुई। लेकिन परीक्षा से महज कुछ घंटे पहले ही प्रश्न-पत्र के कुछ प्रश्न व्हाट्सएप ग्रुप्स और सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। 23 तारीख को हुई परीक्षा समिति की बैठक में सबूतों की समीक्षा के बाद परीक्षा को निरस्त घोषित कर दिया गया है। अब पुनर्परीक्षा 10 अप्रैल को होगी। हजारों छात्र-छात्राएं, जिन्होंने महीनों की मेहनत से तैयारी की थी, साजिश का शिकार हो गए।

सीजीपीएससी परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के अनेक मामलों के बाद ताजा घटना छत्तीसगढ़ में परीक्षा प्रणाली में गिरावट की ताजा कड़ी है। इसमें शामिल है प्रशासनिक लापरवाही, रिश्वतखोरी का जाल और नकल माफिया का संगठित नेटवर्क। अक्सर यह देखा गया है कि परीक्षा केंद्रों, प्रिंटिंग प्रेस या शिक्षा विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों के साथ मिलकर कोचिंग संस्थानों और माफियाओं का एक गठजोड़ काम करता है। सोशल मीडिया के जरिए पेपर का वायरल होना और सख्त निगरानी की कमी, परीक्षा प्रणाली को खोखला कर रहे हैं। एआई और सूचना प्रौद्योगिकी के युग में जहां हर चीज डिजिटल है, इसका फायदा नकल और पेपर लीक करने वाले गिरोह तो उठा रहे हैं पर इन परीक्षाओं को आयोजित करने वाली संस्थाएं नहीं उठा पा रहीं। 

पेपर लीक पर एक समान कानून पूरे देश के लिए अब तक नहीं बना है। कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर कानून बनाए हैं। छत्तीसगढ़ ने तो हाल ही में परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम विधेयक 2026 पारित किया है, जिसमें 10 वर्ष तक की सजा और एक करोड़ तक जुर्माने का कठोर प्रावधान है। लेकिन कानून को कागज से निकलकर जमीन तक पहुंचने में अभी समय है। दोषियों को सजा दिलाने में ये नए प्रावधान कितने कारगर साबित होंगे यह भी बाद में पता चलेगा। क्या इस लीक की जांच निष्पक्ष, तेज और पारदर्शी होगी? क्या बिना दबाव दोषियों को सजा मिल सकेगी?

जब आस्था शिखर छू लेती है

नवरात्रि को लेकर इन दिनों छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में मां के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना हो रही है, लेकिन कुछ स्थान ऐसे भी हैं, जहां पहुंचना ही अपने आप में एक तपस्या बन जाता है।

ऐसा ही है, कोरबा जिले के गढक़टरा गांव से करीब 2 किलोमीटर उत्तर दिशा में स्थित कंचन पहाड़। गांव के लोगों की श्रद्धा इतनी गहरी है कि हर शुभ कार्य से पहले वे यहां आकर माथा टेकते हैं, मन्नत मांगते हैं।

इस मंदिर की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां तक पहुंचने का कोई सीधा रास्ता नहीं है। एक खड़ी, लगभग सीधी चट्टान और उस पर जीवनरेखा बनी बरगद की लटकती जड़ें। इन्हीं जड़ों को थामकर, पत्थरों की छोटी-छोटी दरारों में पैर टिकाते हुए ऊपर चढऩा पड़ता है। हर कदम पर जोखिम, हर पकड़ में सावधानी। जरा सी चूक और नीचे सीधे गहरी खाई। ऊपर पहुंचकर जो दृश्य दिखता है, वह अभिभूत कर देता है। दूर-दूर तक फैली पहाडिय़ों की श्रृंखला, शांत वातावरण और एक अलौकिक ऊर्जा का एहसास।

 तबादलों की आहट

प्रदेश में जल्द ही बड़े प्रशासनिक फेरबदल की सुगबुगाहट है। आईएएस और आईपीएस अफसरों की तबादला सूची कभी भी जारी हो सकती है। माना जा रहा है कि जिन अफसरों को एक ही विभाग में दो साल से ज्यादा हो चुके हैं, उन्हें बदला जाएगा।

जनसंपर्क विभाग में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। मौजूदा आयुक्त रवि मित्तल की पीएमओ में उपसचिव के पद पर नियुक्ति हुई है।  जिसके बाद इस पद पर नई नियुक्ति होगी।

वहीं, आईपीएस महकमे में भी हलचल है। 2020 बैच के एक युवा अधिकारी अध्ययन अवकाश पर जा रहे हैं, जबकि एक जिले की महिला एसपी लंबी छुट्टी पर रहेंगी। ऐसे में उनके स्थान पर नई पोस्टिंग तय है। चर्चा है कि आधा दर्जन से ज्यादा आईपीएस अफसरों के प्रभार में बदलाव हो सकता है।


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