राजपथ - जनपथ
आसंदी की ऊंचाई कुछ कम हुई
बजट सत्र में नए विधानसभा भवन में सदन का परिदृश्य बीते शीत सत्र से बदला नजर आएगा। छत्तीसगढ़ की राजनीति में ऊंचा कद्दावर स्थान रखने वाले स्पीकर रमन सिंह की आसंदी में भी कुछ बदलाव किया गया है।यह बदलाव सचिवालय ने पिछले सत्र के अनुभव को देखते हुए किया है। वे सदस्यों को तब तक नजर नहीं आते जब तक आसंदी तक नहीं पहुंचते या बैठ नहीं जाते।
पुरानी विधानसभा में सदन में प्रवेश करते ही दिख जाते थे।ऐसा नए भवन में अध्यक्ष की आसंदी की ऊंचाई बढऩे से हुआ है। यह ऊंचाई भी शीत सत्र के समय बढ़ाई जब आसंदी से सदन के नेता और नेता प्रतिपक्ष नजर नहीं आ रहे थे। इस वजह से ही सदन में प्रवेश करने पर अध्यक्ष भी नजर नहीं आ रहे थे। इस पर शीत सत्र में पूर्व सीएम कांग्रेस विधायक भूपेश बघेल ध्यानाकृष्ठ कर चुके थे। बघेल ने कहा था कि अध्यक्ष महोदय, आसंदी पर आने के बाद ही नजर आते हैं। दरअसल प्रवेश करते समय अध्यक्ष के दिखने पर दोनों पक्षों के सदस्य अभिवादन करते हैं। और कुछ हंसी ठिठोली भी हो जाया करती थी।आसंदी की ऊंचाई बढऩे से यह अध्यक्ष के आसन पर पहुंचने के बाद हो पा रहा था।
इसे गंभीरता से लेते हुए सचिवालय ने आसन की ऊंचाई कुछ कम की है। जो बजट सत्र में सुविधाजनक होगी।एक और बदलाव कांग्रेस विधायकों की बैठक में भी दिखेगा। शराब घोटाले में एक साल बाद अंतरिम जमानत मिलने के बाद कांग्रेस विधायक कवासी लखमा कार्यवाही में शामिल हो सकते हैं। वरिष्ठ विधायक को उपयुक्त स्थान देने विपक्ष की भी बैठक व्यवस्था बदलेगी।
चिमनानी की पोस्ट से खलबली
सरकार निगम-मंडलों, और आयोगों में एक-एक कर नियुक्तियां कर रही है। खास बात ये है कि नियुक्तियों में आरएसएस की सिफारिशों को भी तव्वजो दी जा रही है। इन सबके बीच सिंधी अकादमी में भी नियुक्तियों को लेकर सिंधी समाज, और भाजपा में काफी बहस हो रही है।
अकादमी में अध्यक्ष और संचालक मंडल के सदस्यों की नियुक्ति जल्द होने की संभावना है। इसी बीच भाजपा के प्रवक्ता अमित चिमनानी ने एक वाट्सएप ग्रुप में संभावना जताई कि सिंधी अकादमी का अध्यक्ष कोई महिला हो सकती है। चूंकि चिमनानी पार्टी के प्रवक्ता भी हैं इसलिए उनके पोस्ट को गंभीरता से लिया जा रहा है, और कई पुरूष दावेदार सक्रिय हो गए हैं। कुछ ने तो महिला को अकादमी का अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना पर एतराज किया है।
बताते हैं कि सिंधी समाज के एक संत ने अकादमी की नियुक्तियों को लेकर अपनी तरफ से कुछ सिफारिशें की है। इनमें भिलाई की एक सामाजिक कार्यकर्ता को अकादमी का अध्यक्ष बनाए जाने का सुझाव दिया है। इस पद पर प्रदेश के प्रमुख भाजपा के सिंधी समाज के नेताओं की नजरें हैं। नाम लीक हो गए तो विवाद भी खड़ा हो गया है। हालांकि आदेश अभी जारी नहीं हुए है, और कुछ लोग नए नाम की संभावना जता रहे हैं। फिलहाल तो नामों को लेकर गरमा-गरमी चल रही है। देखना है आगे क्या होता है।
प्रतिनियुक्ति और हलचल

पीएचक्यू में जल्द ही एक और बदलाव हो सकता है। आईपीएस के वर्ष-2004 बैच के अफसर अभिषेक पाठक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौट रहे हैं। पाठक गुजरात में बीएसएफ में पोस्टेड रहे हैं। उनके इस माह के आखिरी में लौटने की संभावना जताई जा रही है। इससे परे रेंज में पदस्थ एक आईजी ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की इच्छा जताई है। वो पारिवारिक कारणों से रेंज से हटना चाहते हैं।
दूसरी तरफ, कवर्धा एसपी धर्मेन्द्र सिंह छवाई के पत्र को लेकर पीएचक्यू में हलचल है। छवाई ने पदोन्नति न होने पर नाराजगी जताई है, और डीजीपी को कड़ा पत्र लिखा है। छवाई कैट में भी जा सकते हैं। इन सबके बीच उनके पत्र को लेकर शासन स्तर पर प्रतिक्रिया हुई है। जल्द ही इस मामले में कोई एक्शन हो सकता है। देखना है आगे क्या हो सकता है।


