राजपथ - जनपथ
आईपीएस की रवानगी
केन्द्र सरकार ने वर्ष-2011 बैच से आईपीएस अफसरों की आईजी, या समकक्ष पदों पर पदोन्नति के लिए दो साल की केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति अनिवार्य कर दी है। केन्द्र सरकार ने सभी राज्यों को पत्र भी जारी किए हैं। खास बात ये है कि स्टेट सर्विस से आईपीएस अवार्डी ज्यादातर अफसर केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने से परहेज़ करते रहे हैं। राज्य बनने के बाद अब तक एक भी अवार्डी अफसर केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर नहीं गए। मगर नए निर्देश के बाद उन्हें अब प्रतिनियुक्ति पर जाना होगा।
इससे परे छत्तीसगढ़ कैडर के अभी 8 अफसर केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। कुछ और अफसर जाने की तैयारी कर रहे हैं। खबर है कि पीएचक्यू में पदस्थ डीआईजी स्तर के दो अफसर यूनाइटेड नेशंस में प्रतिनियुक्ति पर जाने के इच्छुक हैं। इसके लिए केंद्र ने आवेदन बुलाए हैं। कुल 7 अफसर वहां पदस्थ किए जाने हैं। अफसरों की पोस्टिंग न्यूयॉर्क में ही रहेगी। यही वजह है कि अन्य राज्यों के कई आईपीएस अफसर भी वहां प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए प्रयासरत हैं।
छत्तीसगढ़ के जिन दो डीआईजी स्तर के अफसरों ने युनाइटेड नेशन में प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए आवेदन दिया है, उनमें एक का आवेदन केन्द्रीय गृहमंत्रालय को फारवर्ड भी कर दिया है। देखना है कि उन्हें काम करने का अवसर मिलता है या नहीं।
तब छत्तीसगढ़ भी टाइगर स्टेट कहलाएगा

बस्तर वन मंडल के बकावंड वन परिक्षेत्र और कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में बाघों की हालिया गतिविधियां दर्ज की गई हैं। जनवरी में दो बार जगदलपुर के निकट टोकापाल ब्लॉक के खंडियापाल और वजाबंड गांवों में ग्रामीणों ने बाघ के पगचिन्ह देखे थे। यह बाघ अब बारनवापारा की ओर बढ़ गया है। वन विभाग का अनुमान है कि यह बाघ बचेली की ढलानों से होते हुए भानपुरी रेंज और कांगेर वैली की ओर बढ़ रहा है, जो संभवत: महाराष्ट्र की सीमाओं से आया हुआ है। इसी तरह, अचानकमार अभयारण्य में मध्यप्रदेश के कान्हा और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से बाघों का प्रवेश हो रहा है। सन् 2024 के दिसंबर में कान्हा से एक बाघ ने लगभग 450 किलोमीटर की दूरी तय करके अचानकमार पहुंचा था। हाल ही में यहां एक पर्यटक परिवार को बाघ का दर्शन हुआ। ऐसा दुर्लभ मौका पर्यटकों को कई साल बाद मिला।
इधर, भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य में भी बाघों की हलचल बढ़ी है। कैमरा ट्रैप से चार से अधिक बाघों और बाघिनों की उपस्थिति की पुष्टि हुई है, जिनमें प्रभु झोल, चिल्फी और झलमाला जैसे क्षेत्र शामिल हैं। ग्रामीणों को अक्सर पगचिन्ह दिखाई देते हैं, जो दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ के जंगलों में बाघों के लिए अनुकूल वातावरण मौजूद है। चीतल, सांभर और जंगली सूअर और जल स्रोतों की उपलब्धता बाघों को छत्तीसगढ़ के जंगलों की ओर आकर्षित कर रही है। पड़ोसी राज्यों में बाघों की बढ़ती आबादी के कारण भी ये बाघ छत्तीसगढ़ की ओर रुख कर रहे हैं।
अब सवाल उठता है कि क्या वन विभाग इन बाघों के संरक्षण के लिए तैयार है? बीते माह, जनवरी में अचानकमार अभयारण्य के कुतेरपानी क्षेत्र में एक दो साल के नर बाघ की मौत हो गई, जिसे इलाके के लिए जंग का नतीजा बताया गया। वन विभाग को इसकी जानकारी कई दिनों बाद मिली, जब पेट्रोलिंग टीम ने शव देखा। पोस्टमॉर्टम से पता चला कि गर्दन की हड्डी टूटी हुई थी और काटने के निशान थे। यह घटना वन विभाग की निगरानी और सक्रियता में कमी को सामने लाता है। यदि समय पर पता चलता, तो शायद संघर्ष को रोका जा सकता था या घायल बाघ को बचाया जा सकता था। पिछले चार सालों का आंकड़ा देखें तो लगभग 10 बाघों की खालें जब्त की गई हैं, जो शिकार और अवैध व्यापार की समस्या को समस्या को सामने लाता है।
बाघों के संघर्ष का सात-आठ दिनों बाद पता चलना, शिकार और तस्करी की घटनाओं का बढऩा यह बताता है कि वन विभाग को अपनी निगरानी प्रणाली को काफी दुरुस्त करने की जरूरत है। देश मध्यप्रदेश, जो सर्वाधिक बाघों वाला राज्य है वहां कैमरा ट्रैप, रेडियो कॉलर और ड्रोन का भरपूर उपयोग किया जाता है। छत्तीसगढ़ ने 121 वन्यजीव कॉरिडोर चिन्हित किए हैं, जहां से बाघों और दूसरे वन्यजीवों का राज्य में प्रवेश व भ्रमण हो सकता है, पर इन्हें संरक्षित और विकसित करने के लिए कोई ठोस योजना अब तक घोषित नहीं है। उदंती सीतानदी अभयारण्य में सौर ऊर्जा आधारित जल स्रोतों की स्थापना की गई है, इसे राज्य भर के अभयाण्यों में अपनाया जा सकता है । छत्तीसगढ़ के वनों में बाघों की वापसी एक शुभ संकेत है, जो अपने राज्य को भी टाइगर स्टेट बनाने की क्षमता रखती है। लेकिन यदि वन विभाग ने तत्परता नहीं दिखाई, तो ये मेहमान बाघ स्थायी निवासी बनने के बजाय खो सकते हैं।
प्रतिनियुक्ति से नफा-नुकसान

2010 बैच के देश भर के 24 आईएएस अफसरों को डीओपीटी ने केंद्रीय विभागों में संयुक्त सचिव के लिए नामजद (इंपैनल) किया है। इस बैच के छत्तीसगढ़ के चार अफसरों में से तीन जेपी मौर्य, रानू साहू, सारांश मित्तर को शामिल ही नहीं किया है। पहले दो को क्यों शामिल नहीं किया गया होगा यह सब जानते हैं। जेपी का तो राज्य में ही प्रमोशन रोक दिया गया है। तो रानू निलंबित है। जब तक कोयला,डीएमएफ घोटाले में दूध और पानी अलग नहीं हो जाते मौर्य दंपति को ऐसे लाभ नहीं मिल पाएंगे। इस बैच के चौथे अफसर कार्तिकेय गोयल , राज्य के जनगणना आयुक्त के पद पर पहले से ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं।
बहरहाल अगले एक दो महीने में केंद्रीय विभागों में छत्तीसगढ़ के कुछ अफसरों को सचिव बनने का अवसर मिलता दिख रहा है। बताया गया है जो इस वर्ष 11 सचिव स्तर के अफसर रिटायर होने जा रहे हैं। डीओपीटी ने उनके उत्तराधिकारियों के चयन की कवायद शुरू कर दी है। पहली वेकेंसी संसद के बजट सत्र के बाद भरी जाएगी। इसके लिए 1994,95 बैच के आईएएस अधिकारियों को इंपैनल किया जाना है। इनमें 94 बैच से छत्तीसगढ़ से ऋचा शर्मा, निधि छिब्बर, विकास शील, मनोज पिंगुवा, 95 से मनिंदर कौर द्विवेदी और गौरव द्विवेदी प्रमुख हैं। इनमें से निधि केंद्र में नीति आयोग में ही है तो विकास शील राज्य में मुख्य सचिव हैं। उनके केंद्र में जाने की संभावना नहीं है। उनसे वरिष्ठ ऋचा शर्मा, कनिष्ठ पिंगुवा जाने तैयार हैं। द्विवेदी दंपति दिल्ली में ही हैं। सलेक्ट हुए तो उनका बस पदनाम ही बदलेगा। वैसे अभी भी दोनों सचिव के समकक्ष ही कार्य कर रहे हैं।
रेल टेल से ट्रेनें चलें या मंत्रालय...
पिछले वर्ष अप्रैल से मंत्रालय में और बीते दो माह से कलेक्टोरेट तक ई आफिस में सरकारी कामकाज होने लगा है। इस पर कर्सर क्लिक कर तेजी से काम करने वाले अधिकारी कर्मचारी प्रमाण पत्र भी लेने लगे हैं। बड़े बड़े साहब और सरकार को लग रहा है कि यह सब कुछ सरकारी इंटरनेट कनेक्शन से स्मूदली हो रहा है। पर सच्चाई एकदम अलग है। पिछले दो तीन महीने में ऐसी कई खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं कि नेटवर्क बंद होने से मंत्रालय में काम ठप रहा। इस समस्या से निपटने अधिकारी कर्मचारियों ने एक रास्ता निकाला कि सरकारी नेट डिस्कनेक्ट होने पर अपने मोबाइल नेटवर्क को कनेक्ट कर काम कर लिया जाए। दरअसल यह समस्या मंत्रालय में इस्तेमाल नेटवर्क के बेतहाशा ओवरलोड होने की वजह से आ रही है। पूरे मंत्रालय में वाई फाई नेटवर्क भारतीय रेलवे के नेटवर्क रेल टेल का इस्तेमाल किया जा रहा है। पूरे रेलवे का अपना देशव्यापी नेटवर्क पूरा इसी पर चल रहा है। टिकिट रिजर्वेशन से लेकर ट्रेन संचालन सब कुछ।इतने बड़े नेटवर्क के आनलाइन लोड के बाद भला मंत्रालय को बाधारहित कनेक्टिविटी रेलटेल से कैसे मिल पाएगी, समझ से परे है। बताया जा रहा है कि रेल टेल का वाइ फाई महानदी भवन के मंत्री ब्लाक में ही चलता है शेष सेक्रेटरी और एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लाक में अधिकारी कर्मचारी स्वयं के जियो, एयरटेल, आईडिया, बीएसएनएल के पर्सनल डेटा से काम करने मजबूर हैं। इस समस्या को लेकर कर्मचारी संघ के नेता इस दौरान कई बार मुख्य सचिव, सचिव जीएडी से गुहार लगा चुके हैं। संघ के सदस्य अपने अध्यक्ष सचिव को उलाहना देने लगे हैं कि वाई फाई के संबंध मुख्य सचिव से हुई चर्चा का कोई सकारात्मक परिणाम मिलेगा या आगे इसी प्रकार चलना है? इससे समझा जा सकता है कि निकट भविष्य में यदि इंद्रावती भवन और जिलों को भी रेल टेल से कनेक्ट कर दिया गया तो सरकारी कामकाज कर्सर की तरह गोल गोल घूमता रहेगा। बिल्कुल लेट लतीफ ट्रेनों की तरह..!


