राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : अखिल भारतीय सेवाओं के कैडर
31-Jan-2026 5:59 PM
राजपथ-जनपथ : अखिल भारतीय सेवाओं के कैडर

अखिल भारतीय सेवाओं के कैडर

केंद्र सरकार ने आईएएस, आईपीएस आईएफएस और अन्य ऑल इंडिया सर्विसेज के लिए कैडर आवंटन नीति में बड़े बदलाव की घोषणा की है, जो यूपीएससी 2026 बैच से लागू होगी। डीओपीटी का दावा है कि यह नीति अधिक पारदर्शिता, के साथ वर्तमान ज़ोनल डिवीजनों को चार अल्फाबेटिकल ग्रुप से बदल देगी। आवंटन योग्यता, खाली पदों, स्पष्ट इच्छा और एक रोटेशनल साइकिल के आधार पर होगा। दोनों पॉलिसी के जानकार अध्ययनशील अफसर यहां बताते हैं कि इससे आईसीएमआर, आईसीएआर , इसरो और इन सेवाओं द्वारा देखे जाने वाले अन्य रिसर्च संस्थानों जैसे सरकारी संगठनों में  पोस्टिंग पर असर पड़ सकता है।

 छत्तीसगढ़ आईएएस एसोसिएशन के जानकार सदस्यों के मुताबिक 23 जनवरी को  जारी इस  नीति में कहा गया है कि संबंधित मंत्रालय किसी वर्ष की एक जनवरी को कैडर अंतराल के आधार पर रिक्तियों का निर्धारण करेंगे। इसने कैडर आवंटन की पूर्व की  जोन प्रणाली की जगह बनाए गए नए समूह  में सभी राज्य कैडर/संयुक्त कैडरों को वर्णानुक्रम में व्यवस्थित किया गया है और चार समूहों में विभाजित किया गया है।

ग्रुप-एक में एजीएमयूटी (अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश), आंध्र प्रदेश, असम-मेघालय, बिहार और छत्तीसगढ़ हैं। और ग्रुप-दो में गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल और मध्य प्रदेश शामिल हैं।  समूह-तीन में महाराष्ट्र, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम और तमिलनाडु शामिल हैं, जबकि समूह-चार में तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

कैडर नियंत्रण प्राधिकार अर्थात् कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) / गृह मंत्रालय (एमएचए) / पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफ एंड सीसी), प्रत्येक कैडर के लिए अनारक्षित (यूआर) / अनुसूचित जाति (एससी) / अनुसूचित जनजाति (एसटी) / अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) / आंतरिक / बाहरी रिक्तियों सहित रिक्तियों का निर्धारण करेंगे।

कैडर-वार/श्रेणी-वार रिक्तियों का निर्धारण परीक्षा वर्ष के बाद वाले वर्ष की एक जनवरी को मौजूद कैडर अंतर के आधार पर किया जाएगा।  राज्य सरकारें किसी विशेष सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई)/भारतीय वन सेवा परीक्षा के माध्यम से भरी जाने वाली रिक्तियों की कुल संख्या परीक्षा वर्ष के बाद वाले वर्ष की 31 जनवरी तक सूचित करेंगी।

बाड़े में कैद होने से बच गई कोटरी

कुदरत की ममता और इंसानी संवेदनशीलता का एक भावुक दृश्य कटघोरा वन मंडल के केंदई रेंज में देखने को मिला। जंगल में चरते हुए कोटरी (हिरण प्रजाति) का एक नन्हा बच्चा बकरियों के झुंड में इस तरह घुल-मिल गया कि किसी को उसकी मौजूदगी का अंदाज़ा तक नहीं हुआ।

ग्राम भूलसीभवना के ग्रामीण जब शाम के समय जंगल से बकरियों को चराकर गांव लौट रहे थे, तब अनजाने में यह मासूम हिरण का बच्चा भी झुंड के साथ गांव पहुंच गया। क्षेत्र में हिरण और कोटरी की आवाजाही आम है, लेकिन इस घटना ने सभी को चौंका दिया।

जब बकरियों को बाड़े में रखा जा रहा था, तभी बकरियों की सामान्य मिमियाहट से अलग एक कोमल और अनजानी आवाज सुनाई दी। आवाज पर ध्यान गया तो ग्रामीण हैरान रह गए। बकरियों के बीच हिरण का नन्हा बच्चा खड़ा था। बिना देर किए ग्रामीणों ने सजगता दिखाते हुए तुरंत वन विभाग को सूचना दी।

सूचना मिलते ही रेंजर अभिषेक दुबे के नेतृत्व में वन अमला मौके पर पहुंचा और हिरण के बच्चे को सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ दिया। कुछ ही देर में मां कोटरी अपने बच्चे को पहचानते हुए उसे साथ लेकर जंगल के भीतर चली गई। यह दृश्य देखकर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।

जिसके सौजन्य से..., वही बाहर!

बिलासपुर के पुलिस ग्राउंड में एक  कवि सम्मेलन हो रहा है, जो कि जाहिर तौर पर हिन्दू कवि सम्मेलन है। मजे की बात है कि अखिल भारतीय हिन्दू शौर्य कवि सम्मेलन का नारा है- जात-पात की करो बिदाई, हिन्दू-हिन्दू भाई-भाई।

अब देश में बाकी धर्म वालों के साथ भी अगर ऐसा ही भाई-भाई भाईचारा हो जाता तो?

खैर, इसके पोस्टरों पर लिखा हुआ है- यह आयोजन सिर्फ हिन्दुओं के लिए है। इसी सूचना के ठीक बगल में यह भी लिखा हुआ है कि प्रचार सौजन्य बिलासपुर के भाटिया परिवार का है।

मतलब यह कि जिसके सौजन्य से प्रचार हो रहा है वह भी कवि सम्मेलन में नहीं आ सकता!

कांग्रेस की बड़ी बैठक, जैसे थे

दो दिन पहले दिल्ली के एआईसीसी दफ्तर में राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख  नेताओं के साथ बैठक की। बैठक को लेकर काफी उत्सुकता थी, और इसमें कोई अहम बातें निकलकर आने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। यानी ‘ढाक के तीन पात’ होकर रह गई।

प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट, और अन्य छह नेताओं को बैठक में बुलाया गया था। इनमें प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व सीएम भूपेश बघेल, पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू, और राज्यसभा सदस्य फूलोदेवी नेताम थे। दिलचस्प बात ये है कि बैठक जल्दबाजी में तय हुई थी। फिर भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बैज सारी तैयारी कर पहुंचे थे। बैठक में खरगे और राहुल गांधी ने प्रदेश के नेताओं को समन्वय बनाकर काम करने और एक साथ दौरा करने की साधारण-सी नसीहत दी। कोई ऐसी बात नहीं हुई, जिसको लेकर पार्टी में कोई संदेश पहुंचता। यह बैठक महज औपचारिकता बनकर रह गई है।

बैठक में शामिल कुछ बड़े नेताओं से करीबियों का मानना है कि ये बैठक हाईकमान ने अपनी सक्रियता दिखाने के लिए ली थी। दरअसल, राहुल गांधी पर आरोप लगते हैं कि वो पार्टी नेताओं से मिलने में परहेज करते हैं। इसको देखते हुए अलग-अलग राज्यों की बैठक बुलाई गई थी। मध्यप्रदेश की बैठक में जरूर राहुल गांधी ने थोड़े तेवर दिखाए थे, और पार्टी की नीति-रीति के खिलाफ बयानबाजी पर तुरंत कार्रवाई के लिए कहा है। मगर छत्तीसगढ़ की बैठक में ज्यादा कुछ निकलकर नहीं आया।

वाट्सएप संदेशों से सतर्क रहें...

फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पेज पर हाई प्रोफाइल हस्तियों, बड़े प्रशासनिक अफसरों का फर्जी एकाउंट बनाकर रुपये मांगने का चलन पुराना पड़ गया है। अब वाट्सअप पर ऐसी डिमांड ठग करने लगे हैं। ऐसे ही एक वाकया नारायणपुर पुलिस के सामने आया है। इसमें नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन के नाम का इस्तेमाल कर ठगी करने की कोशिश की गई। समय रहते सामने वाले ने इसकी जानकारी पुलिस को दे दी। वाट्सएप कन्वर्शन के दौरान आरोपी ने बकायदा अपना नाम, स्थान और बैंक एकाउंट का डिटेल दिया है।पुलिस को आशंका है कि इसमें बैंक एकाउंट के अलावा सारी जानकारी फर्जी हो सकती है।

पुलिस ने अपराध दर्ज किया है, मामले की जांच की जा रही है। मगर, यह मामला बताता है कि साइबर ठगों के पास लोगों की व्यक्तिगत सूचनाएं आसानी से पहुंच सकती है। बातचीत से पता चलता है कि जिस व्यक्ति को ठग ने रुपये वसूलने के लिए मेसैज किया है, वह कलेक्टर से परिचित है और ठग को यह बात मालूम है।


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