राजपथ - जनपथ
बीस साल तक अंधेरे कमरे में
जगदलपुर में बीस साल तक एक लडक़ी को उसके ही रिश्तेदारों ने एक अंधेरे कमरे में बंद रखा। वजह यह बताई गई कि कोई छेड़छाड़ करने वाला व्यक्ति था, जिससे उसे बचाना जरूरी समझा गया। लंबे वक्त तक अंधेरी कोठरी में कैद रहने के कारण उसकी आंखों की रोशनी शायद कभी वापस न आए। मानसिक रूप से वह पूरी तरह टूट चुकी है। अपना नाम भी उसे याद करके बताना पड़ा।
भारत के दूसरे इलाकों की तरह छत्तीसगढ़ में भी लड़कियों की इज्जत और सुरक्षा को लेकर जुनून इतना गहरा है कि कई बार वह बड़ा खतरा बन जाता है। इस मामले में बाहर छेड़छाड़ करने वाला कोई एक आदमी था, लेकिन घर वालों ने उसे पूरी दुनिया से ही काट दिया, पूरे बीस साल के लिए। उस उम्र में जब कोई लडक़ी स्कूल जाती है, दोस्त बनाती है, सपने देखती है, प्यार करती है, वह दिन-रात अंधेरे में सांस लेती रही। वहां न धूप थी, न हवा, न किसी अपने का चेहरा, न किसी से कोई संवाद।
हैरानी की बात है कि ऐसा करने वाले उसके अपने रिश्तेदार थे। वे शायद भूल गए कि लक्ष्मण रेखा जैसी कोई लकीर खींचते-खींचते उन्होंने इस युवती से इंसान बने रहने तक का हक छीन लिया। बाहर के खतरे से बचाने के चक्कर में घर को ही जेल बना दिया।
समाज कल्याण विभाग के अफसर अभी यह तय नहीं कर पाए हैं कि यह अवैध कैद और मानवाधिकार उल्लंघन का मामला है या नहीं। लेकिन कानून के बाद भी सवाल बाकी रह जाता है कि क्या सामाजिक सोच भी इसके लिए दोषी नहीं है?
पुतिन के सम्मान में...

एक सदाबहार फिल्मी गीत है, सर पे लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी। मगर, जूते भी रूसी नामों से भारत में बिकते हैं। रूस के राष्ट्रपति ब्लामिदिर पुतिन भारत आए तो सोशल मीडिया में यह बिलासपुर शहर के एक दुकान की यह तस्वीर डाल दी और कहा कि हमारे यहां तो बरसों से मॉस्को (रूस की राजधानी) को पसंद किया जाता है। इस नाम से यहां एक बहुत पुरानी दुकान है।


