राजपथ - जनपथ
देवांगन की पिटीशन
राज्य खनिज निगम के पूर्व अध्यक्ष, और कांग्रेस नेता गिरीश देवांगन की उस याचिका पर सीजेएम कोर्ट में सुनवाई चल रही है, जिसमें उन्होंने ईओडब्ल्यू-एसीबी के अफसरों पर कोयला घोटाला केस में कथित तौर पर फर्जी बयान तैयार कर हाईकोर्ट, और सुप्रीम कोर्ट में पेश करने का आरोप लगाया है।
देवांगन ने इससे जुड़े कुछ दस्तावेज भी पेश किए हैं। उन्होंने अपनी याचिका में फर्जी दस्तावेजी करण, न्यायालय में धोखाधड़ी, और कानूनी प्रक्रियाओं के उल्लंघन का आरोप लगाया है। सीजेएम कोर्ट ने याचिका पर ईओडब्ल्यू-एसीबी चीफ अमरेश मिश्रा, और दो अन्य अफसर चंद्रेश ठाकुर, और राहुल शर्मा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था।
तीनों अफसरों की तरफ से पिछले दिनों दिल्ली हाईकोर्ट के वकील रवि शर्मा ने जवाब दाखिल किए हैं। इसमें याचिकाकर्ता की शिकायतों का कड़ा प्रतिवाद किया गया, और याचिका के औचित्य पर ही सवाल खड़े किए हैं। दोनों पक्षों से अपने-अपने समर्थन में दलील दी जा चुकी है, और 8 तारीख को प्रकरण पर अंतिम सुनवाई होगी। इस हाईप्रोफाइल मामले पर निगाहें कोर्ट पर टिकी हैं। देखना है आगे क्या होता है।
उड़ानों में एकाधिकार का नतीजा?

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के कारण लाखों यात्री हवाईअड्डों पर फंसे हुए हैं। दिसंबर 2025 के पहले सप्ताह में इंडिगो ने एक हजार से अधिक उड़ानें रद्द कीं। दिल्ली से सभी घरेलू उड़ानें 5 दिसंबर को पूरी तरह बंद कर दी गईं। बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद जैसे प्रमुख हवाईअड्डों पर 100-100 से अधिक उड़ानें। रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट का भी यही हाल है। यात्री घंटों इंतजार करते रहे- बिना भोजन, पानी या स्पष्ट जानकारी के। सैकड़ों यात्री फंस गए हैं। शादी ब्याह का मौसम चल रहा है। कुछ लोगों को अपने बीमार परिजन को देखने के लिए जाना था, कुछ को अंतिम संस्कार में शामिल होना था। टिकट रद्द कर पैसे लौटाए तो जा रहे हैं लेकिन वैकल्पिक उड़ानों का किराया 4-5 गुना महंगा कर दिया गया है। एयरलाइंस कंपनियां जैसे ही भीड़ बढ़ती है, किराये में मनमाना वृद्धि कर देती हैं। इसी इंडिगो ने कुंभ मेले के समय 7-8 हजार की टिकट को 30 से 40 हजार रुपये में बेचा था। दिल्ली रायपुर के बीच टिकट सामान्य से पांच गुना महंगी हो गई है।
यह संकट नई ड्यूटी टाइम लिमिटेशन लागू करने की वजह से बताया जा रहा है। पायलटों के आराम के घंटे तय किए गए। संकट देखते हुए सरकार ने अब इसमें रियायत भी दे दी है, फिर भी उड़ानें नियमित नहीं हो पाई हैं।
मगर समस्या विकराल इसलिये दिखाई दे रही है क्योंकि यात्री के पास विकल्प नहीं है। इंडिगो के पास घरेलू बाजार का 65 फीसदी शेयर है। इंडिगो व एयर इंडिया मिलाकर 90 प्रतिशत उड़ानें संचालित करते हैं। किंगफिशर और जेट एयरवेज जैसी कंपनियां दिवालिया हो चुकीं, लेकिन इंडिगो को कोई बाधा नहीं आई। अमेरिका या यूरोपमें ऐसा एकाधिकार नहीं है। वहां एंटी-ट्रस्ट कानून सख्त है, जो बाजार 40 प्रतिशत से अधिक शेयर पर नियंत्रण लगाते हैं। भारत में इस एकाधिकार ने यात्रियों को बंधक दिया है।
लगे हाथ उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना की भी अपने छत्तीसगढ़ के संदर्भ में चर्चा कर लें। बिलासपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर आदि शहरों से नियमित उड़ानों की योजना बनाई गई थी। मगर, कुछ उड़ानों के बाद अंबिकापुर हवाई अड्डा पूरी तरह बंद पड़ा है। बिलासपुर में भी फ्लाइट और फेरों की संख्या घटा दी गई है। हवाई सेवा विस्तार के लिए संघर्ष कर रहे संगठनों की मांग है कि खुली निविदा से कंपनियों को उड़ानें शुरू करने के लिए बुलाया जाए, लेकिन सरकार अपनी मोनोपॉली तोडऩे के लिए तैयार नहीं है। छोटे शहरों के हवाई अड्डे इस जिद के चलते वीरान होते जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ जैसा कई राज्यों का हाल

मानव-हाथी के बीच संघर्ष छत्तीसगढ़ के अलावा कई दूसरे राज्यों में है। यह दृश्य आसाम का है, जो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल है। एक वीडियो क्लिप में दिखाया गया है कि दिन-दहाड़े हाथी एक मकान को तोडऩे पर आमादा है। ग्रामीण शोर मचाकर हाथी को रोकने की कोशिश करते हैं। हाथी जब नहीं रुकता तो एक ग्रामीण, जो संभवत: उस घर का मालिक है, जान हथेली पर लेता है और हाथी के पीछे जाकर उसकी पूंछ को मरोड़ देता है। तब हाथी घूमकर आगे की ओर बढ़ जाता है। उसका मकान बच जाता है। छत्तीसगढ़ में जगह-जगह हाथियों के हमले से लोगों की जान माल का नुकसान हो रहा है। दो दिन पहले ही बैकुंठपुर में हाथी ने एक युवक को सूंड से उठाकर फेंक दिया और छह मवेशियों को कुचल दिया। अचानकमार टाइगर रिजर्व में भी केंवची-अमरकंटक के रास्ते पर 3 दिसंबर की रात हाथी ने धावा बोला, अपनी जान बचाकर महिला बच्चों को लेकर घर से बाहर भागी।
गाइडलाइन रेट का आखिर क्या होगा?
जमीन की नई गाइडलाइन दरों को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। भाजपा में भी गाइडलाइन दरों को स्थगित करने के लिए काफी दबाव है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल तो इस सिलसिले में सीएम विष्णुदेव साय को पत्र भी लिख चुके हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया है कि गाइडलाइन दरों की बढ़ोत्तरी को वापस नहीं दिया गया, तो छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है। मगर वित्त मंत्री ओपी चौधरी गाइडलाइन दरों की बढ़ोतरी वापस नहीं लेने की बात कह चुके हैं।
इन सबके बीच प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता, और वकील नरेश चंद गुप्ता ने अपने ताजा फेसबुक पोस्ट में एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने लिखा कि जमीन की नई गाइड लाइन दर को लेकर जो चर्चा चल रही है उससे कुछ हटकर पूर्व के कांग्रेस सरकार के समय जो जमीन के गाइड लाइन दर पर कुछ समय के लिए 40 प्रतिशत तक छूट किया गया। उसकी, एनआईसी के पोर्टल में बिना अपलोड के 30 लाख से अधिक की रजिस्ट्री, बिना भुगतान के रजिस्ट्री, चेक नंबर रजिस्ट्री में परन्तु चेक दिया ही नहीं अर्थात बिना भुगतान के रजिस्ट्री, रजिस्ट्री में गाइड लाइन दर कम कर रजिस्ट्री इत्यादि की जांच शासन को शीघ्र करवानी चाहिए। उपरोक्त विषय अत्यंत गंभीर हैं। उपरोक्त विषय कोयला घोटाला, डीएमएफ घोटाला, शराब घोटाला के बराबर का घोटाला है।
उन्होंने आगे लिखा कि इस घोटाले में पूर्व सरकार में जिन लोगों ने घोटाला किया था ( प्रदेश की जनता को लूटा था) उन्होंने लूट के पैसे उपरोक्त में लगा रखे हैं, इसमें तत्कालीन सत्ता के राजनेता और उनके खास भ्रष्ट नौकरशाह और व्यापारी शामिल हैं। कुल मिलाकर भाजपा के भीतर गाइडलाइन दरों के समर्थन, और विरोध में चर्चा चल रही है। कुल मिलाकर विधानसभा के शीतकालीन सत्र में यह विषय प्रमुखता से उठाने की तैयारी भी हो रही है।


