राजपथ - जनपथ
समस्या उन अधिकारियों की गलियों में नहीं है...
छत्तीसगढ़ में सबसे लंबे समय तक न्यूज-फोटोग्राफर रहे हुए गोकुल सोनी सामयिक मुद्दों पर लगातार लिखते हैं, और छत्तीसगढ़ का समकालीन इतिहास भी। आज उन्होंने फेसबुक पर लिखा है-रायपुर शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब एक गंभीर चेतावनी बन चुकी है।
हर गुजरते दिन के साथ इनकी तादाद इतनी तेजी से बढ़ रही है कि आम नागरिक खासकर बच्चे, महिलाएँ और बुज़ुर्ग खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। शहर के कई वार्डों से कुत्तों के झुंड के हमलों, रात के समय सडक़ों पर पैदा होने वाले डर के माहौल और आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। यह तस्वीर बाबूलाल टाकीज (अब शॉपिंग कॉम्प्लेक्स) के सामने गणेशराम नगर की है, पर समस्या सिर्फ एक मोहल्ले की नहीं, पूरे रायपुर की है। मच्छर उन्मूलन हो या कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण, नगर निगम की गंभीरता केवल कागजों तक सीमित दिखाई देती है। कुत्तों को पकडऩे वाली गाड़ी आती जरूर है, लेकिन कुत्ते तो दूर से ही देखकर ऐसे गायब हो जाते हैं मानो यह सब उनके लिए रोज़मर्रा का खेल बन गया हो। सच्चाई यह है कि यह समस्या उन अधिकारियों की गलियों में नहीं है, जहां वे रहते हैं। वहां तो परिंदा भी पर नहीं मार सकता फिर कुत्तों का झुण्ड कैसे पहुँच जाए। यही कारण है कि न प्रशासन सक्रिय है और न ही जनप्रतिनिधियों को इससे कोई खास सरोकार। नतीजा यह कि समस्या धीरे-धीरे नहीं, बल्कि तेज़ी से विकराल रूप लेती जा रही है।
शहर को सुरक्षित बनाने के लिए अब केवल शिकायतें काफी नहीं। ठोस और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है, क्योंकि आज यह समस्या किसी और के मोहल्ले की है, कल आपके दरवाजे पर भी खड़ी हो सकती है।
फोकट वाला पनौती कौन?

नवा रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह क्रिकेट स्टेडियम में बुधवार को भारत-दक्षिण अफ्रीका के मैच को लेकर रोमांच चरम पर रहा। करीब 60 हजार दर्शक मुकाबला देखने स्टेडियम पहुंचे थे। भारत की हार पर स्वाभाविक रूप से लोग मायूस हैं, और सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। मगर ज्यादा गुस्सा वो लोग उतार रहे हैं, जो कि टिकट के लिए प्रयासरत थे, और उन्हें टिकट नहीं मिल पाई। इनमें कई बड़े भाजपा नेता भी शामिल हैं।
राज्य श्रम कल्याण मंडल के पूर्व उपाध्यक्ष, और सीनियर भाजपा नेता सुभाष तिवारी ने फेसबुक पर अपने पोस्ट में लिखा कि कल भारत-दक्षिण अफ्रीका का वनडे क्रिकेट मैच था। मैं घर में टेलीविजन पर मैच देख रहा था। तभी दर्शक दीर्घा में एक पनौती बैठा हुआ दिखाई दिया, जो फोकट की टिकट में गया था। तभी मुझे शंका हो गई थी कि भारत यह मैच हार जाएगा। तिवारी का इशारा किसकी तरफ था, यह तो स्पष्ट नहीं है। मगर मैच देखने सरकार के मंत्री ओपी चौधरी, वन मंत्री केदार कश्यप, श्याम बिहारी जायसवाल, और कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त सौरभ सिंह, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह सहित पार्टी के कई कद्दावर नेता पहुंचे थे।
रायपुर नगर निगम के पूर्व पार्षद प्रमोद साहू ने एक अखबार में छपी उस खबर को फेसबुक पर साझा किया गया जिसमें प्रभावशाली अफसरों को 20-20 टिकट मिलने की बात कही गई है। साहू ने लिखा अफसरशाही हावी है। मैच देखने से वंचित हुए, तो नाराज भाजपा के नेताओं का गुबार निकाल रहे हैं। कुछ आईएएस अफसर किस्मत के इतने धनी थे कि उनके गार्ड, अर्दली, ड्राइवर सभी स्टेडियम में थे।
एमओयू के बाद पहला क्रिकेट..

शहीद वीर नारायण अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में कल हुए भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए मैच में गायकवाड़ और कोहली के शतक के बावजूद भारत को हार का सामना करना पड़ा। उनके प्रशंसक निराश हुए पर क्रिकेटप्रेमियों ने मैच का खूब आनंद लिया। छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ और राज्य सरकार के बीच हुए अनुबंध के बाद यह पहला बड़ा आयोजन था। तब ध्यान जाता है कि क्या भविष्य में छत्तीसगढ़ के क्रिकेट खिलाडिय़ों को अधिक अवसर मिलने की संभावना बनती है? सरकार और राज्य के क्रिकेट संघ के बीच हुए एमओयू से कुछ बातें साफ होती हैं, कुछ नहीं।
सेंध झील के पास 50 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फैले 65 हजार दर्शकों की क्षमता के साथ यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा स्टेडियम है। राज्य सरकार ने 1.5 करोड़ रुपये सालाना की लीज पर सीएससीएस को सौंप दिया है। हर तीन साल में लीज की राशि बढ़ेगी। इसके अलावा कुछ मामूली रकम भी अलग-अलग मौकों पर सरकार को मिलेगी- जैसे हर अंतर्राष्ट्रीय मैच पर 20 लाख, आईपीएल पर 30 लाख रुपये। इस हिसाब से देखा जाए तो हजारों करोड़ की कीमत वाली जमीन तो दूर लागत के 145 करोड़ रुपये भी इन 30 सालों में नहीं मिलने वाले। मगर, सरकार का वह खर्च बच जाएगा, जो सालाना 3 से 4 करोड़ रुपये रखरखाव पर होते हैं। आने वाले वर्षों में यह खर्च और बढ़ता जाता। आम तौर पर भवनों, उद्यानों के रखरखाव के के लिए मंजूर सरकारी विभागों के बजट तो खत्म हो जाते हैं, पर जमीन पर वह खर्च दिखता नहीं। यहां, इसकी जिम्मेदारी सीएससीएस को उठाना है। सीएससीएस को बीसीसीआई में अपनी मान्यता बनाए रखने और स्टेडियम की लीज की राशि चुकाने के लिए जरूरी होगा कि वह रायपुर कलेक्टर की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी की निगरानी के ही स्टेडियम को अच्छी हालत में रखे और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपग्रेड करता रहे।
मगर, अनुबंध की दूसरी बातें भी महत्वपूर्ण हैं, जिनमें राज्य के उभरते क्रिकेटरों की ट्रेनिंग और सुविधाएं प्रदान करना, ताकि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत प्रदर्शन कर सकें। देखना यह होगा कि राज्य में क्रिकेट की गतिविधियों और खेल पर्यटन को इस अनुबंध से कितना प्रोत्साहन मिल पायेगा। क्या भविष्य में नया रायपुर क्रिकेट हब बन पाएगा?
संचार साथी की पहुंच कितनी ?

विपक्ष, डिजिटल राइट्स ग्रुप, टेलीकॉम कंपनियों और डिवाइस निर्माताओं के विरोध के बाद संचार साथी ऐप को अनिवार्य करने से केंद्र सरकार पीछे हट गई है। पर यह जानना दिलचस्प हो सकता है कि वह क्या-क्या जानकारी हासिल करने की अनुमति मांगता है। एक एंड्राइड फोन से यह विवरण लिया गया है। ऐप सभी कॉल इतिहास को पढ़ सकता है। उपयोगकर्ता के संपर्कों, कॉल की अवधि, और पैटर्न का विश्लेषण संभव है। फोन नंबर, डिवाइस आईडी (आईएमईआई), और वर्तमान स्टेटस (जैसे कॉल पर होना) तक पहुंच, उपयोगकर्ता की वास्तविक समय की लोकेशन और गतिविधियों को ट्रैक करना। फोन के इस्तेमाल नहीं करने पर भी ऐप बैकग्राउंड में चलता रहेगा। एसएमएस और एमएमएस पढऩे, भेजने की जानकारी लेने की क्षमता से निजी चैट तक पहुंच। यानि कोई ओटीपी या संवेदनशील जानकारी-जैसे बैंकिंग कोड भी। इसीलिए इसकी तुलना संसद में पेगासस जैसे स्पाईवेयर से की। प्री इंस्टाल संचार साथी मीडिया और स्टोरेज में संचार साथी घुसपैठ कर सकता है। यहां तक कि बिना सूचना के फोटो-वीडियो कैप्चर कर लेगा। स्टोरेज में फाइलों को पढऩा, संशोधित करना या हटाना भी संभव है। डिवाइस पर नियंत्रण का मामला ऐसा है कि ऐप बैकग्राउंड में लगातार चलता रहेगा और आपके ही फोन की बैटरी, इंटरनेट और वाई-फाई का इस्तेमाल करते हुए। फिलहाल सरकार ने अनिवार्य प्रि इंस्टाल का आदेश वापस ले लिया है और यह भी कहा है कि जिन्हें इसका इस्तेमाल नहीं करना है वे संचार साथी में लॉग इन नहीं करें और चाहें तो अपने फोन से हटा लें।


