राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : मोदी-शाह का हाल
30-Nov-2025 7:54 PM
राजपथ-जनपथ : मोदी-शाह का हाल

मोदी-शाह का हाल

नवा रायपुर स्थित आईआईएम संस्थान में डीजीपी-आईजी कॉन्फ्रेंस चल रही है। कॉन्फ्रेंस में पीएम नरेंद्र मोदी, और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ एनएसए अजीत डोभाल, और केन्द्रीय एजेंसियों के शीर्ष अफसर हैं। मोदी, और शाह यहां हैं, तो स्वाभाविक है कि सरकार-पार्टी के सारे नेता राजधानी में ही डटे हैं। शाह से तो पार्टी के कुछ प्रमुख नेताओं ने आगमन के दौरान मुलाकात कर ली थी, लेकिन मोदी से सीएम को छोड़ किसी भी नेता की मुलाकात नहीं हो पाई।

शाह ने कॉन्फ्रेंस में जाने से पहले 28 तारीख को सीएम विष्णुदेव साय, और डिप्टी सीएम विजय शर्मा के साथ बैठक की थी। इसमें नक्सल समर्पण-पुनर्वास पर चर्चा हुई थी। मोदी 28 तारीख की रात रायपुर पहुंचे थे, और सीधे नवा रायपुर के लिए रवाना हो गए। वो नवा रायपुर के स्पीकर हाऊस में ठहरे हुए हैं। कॉन्फ्रेंस सुबह 9 बजे शुरू हो जाती है। केंद्रीय गृहमंत्री शाह पौने 9 बजे कॉन्फ्रेंस स्थल में चेयर संभालते, और इसके बाद ठीक 9 बजे पीएम भी। पीएम ने दोनों ही दिन पूरे समय कॉन्फ्रेंस में रहकर गृहमंत्री के साथ प्रेजेंटेशन देखे।

खास बात ये है कि नक्सलवाद पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अफसरों ने प्रेजेंटेशन दिया है। इस दौरान छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना, और आंध्र के डीजीपी अपने राज्य की जानकारी बीच-बीच में देते रहे। इस दौरान छत्तीसगढ़ के एसीएस(गृह) मनोज पिंगुआ को भी आमंत्रित किया गया था। बताते हैं कि कॉन्फ्रेंस के एक दिन पहले आईटीबीपी के डीजी प्रवीण कुमार मानपुर-मोहला जिले के मदनवाड़ा में थे, और उन्होंने वहां मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के सीमावर्ती इलाकों में नक्सल अभियान की समीक्षा की थी। 

कॉन्फ्रेंस के चलते नक्सलियों पर काफी दबाव बना है। पिछले दो दिनों में बस्तर से लेकर महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश के 50 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। यह सिलसिला जारी है। नक्सलियों के महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ स्पेशल जोनल कमेटी ने संघर्ष विराम का ऐलान करते हुए एक जनवरी को पूरी तरह हथियार डालने का वादा भी किया है।  कुल मिलाकर कॉन्फ्रेंस के बाद बस्तर में पूरी तरह शांति की उम्मीद जताई जा रही है। देखना है आगे क्या होता है।

हाजिरी पंच करते ही चाय पीने?

अब सरकारी दफ्तरों में लेटलतीफी पुरानी बात होने जा रही है। कारण सरकारी  मुलाजिमों का ठीक 10 बजे ऑनलाइन बायोमेट्रिक अटेंडेंस की अनिवार्यता। राज्य मंत्रालय में यह जनवरी से ही लागू हो चुका है और कल से इसमें और एक्यूरेसी आने वाली है। जब 65 स्टाफ बसें 9.50 तक महानदी भवन के गेट में खड़ी होंगी। अगले दस मिनट में भवन के पांच गेट में लगी दर्जनों मशीनों में स्टाफ अटेंडेंस पंच करेगा। यह आधार कार्ड आधारित होगा। अगले दस मिनट में पता चल जाएगा कि कितने अफसर कर्मचारी ऑन ड्यूटी हैं। इसके बाद 1 जनवरी से यही व्यवस्था संचालनालय इंद्रावती भवन में भी लागू कर दी जाएगी।

राज्य के दोनों प्रशासनिक मुख्यालय इन टाइम काम करेंगे तो निचले क्रम के दफ्तरों से सरकारी कामकाज गांव तक पहुंचेगा। राजधानी समेत कुछ जिलों में भी 10 बजे अटेंडेंस की व्यवस्था लागू है। अब यह अलग बात है कि अटेंडेंस की पंचिंग के बाद घंटे आधे घंटे के लिए  चाय पान ठेले में चले जाते हैं। अब यह भी नहीं चलेगा क्योंकि जितनी बार बाहर निकलेंगे इन आउट की पंचिंग करनी होगी।

दरअसल केंद्र सरकार की आन टाइम गवर्नेंस की योजना के तहत यह कदम उठाए जा रहे हैं। कम से कम भाजपा शासित प्रदेशों के लिए तो इसी लक्ष्य के साथ काम किया जा रहा है। दिल्ली के साउथ और नॉर्थ ब्लॉक के दफ्तरों में दस बजते ही ई ऑफिस सॉफ्टवेयर में फाइल मूवमेंट शुरू हो जाता है।

विपक्ष को अधिकार परिवारवाद कहने का

इसे परिवारवाद नहीं पिता के पदचिन्हों पर चलना कहेंगे। टिकिट मिलने पर केवल विपक्ष को अधिकार होगा कि परिवारवाद कहे। खबर यह है कि असम से पूर्व सांसद और छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका की पुत्री आयुष्मिता डेका ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। अमेरिका में उच्च शिक्षा के बाद कुछ समय तक नौकरी करने के बाद वह असम लौट आईं। यह संयोग रहा कि कुछ माह पहले रमेन डेका भी अमेरिका गए थे। इस दौरे का बेटी के फैसले से कोई संबंध नहीं है। आयुष्मिता ने प्रदेश अध्यक्ष के हाथों सदस्यता पत्र लेने के बाद कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से लौटीं हूं देश सेवा के लिए। इसके लिए  स्वयं प्रधानमंत्री ने ही हाल की एक मुलाकात में कहा था।

आयुष्मिता का यह भी कहना था कि उनका परिवार लंबे समय से संघ और विचारधारा से जुड़ा है। उनके  बचपन से ही प्रमोद महाजन, राजनाथ सिंह वरिष्ठ नेताओं का घर पर आना जाना था। जिसने उन्हें राजनीतिक और सामाजिक जीवन के संस्कार दिए। वैसे बता दें कि राजधानी में एक और पूर्व सांसद, पूर्व राज्यपाल भी हैं रमेश बैस। तन मन धन से उनका पूरा परिवार संघ भाजपा समर्थित है लेकिन बेटे की सदस्यता कभी सार्वजनिक नहीं हुई वे रीयल एस्टेट कारोबारी के रूप में जाने जाने जाते हैं।

आंदोलन के अति उत्साह में

किसी भी विपक्ष की जिम्मेदारी होती है कि वह जनता से जुड़े मुद्दों पर सडक़ पर उतरे। कांग्रेस भी चुनाव हारने के बाद अब फिर उसी भूमिका में दिखाई दे रही है। बिलासपुर जिला मुख्यालय में जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई। यह प्रेस वार्ता उसी स्थान पर रखी गई, जहां सरकारी धन की बर्बादी का आरोप लगाया गया था।

यह वह सडक़ है जो कुछ दूर जाकर खाली जमीन पर समाप्त हो जाती है। दावा किया गया कि इस सडक़ पर 50 से 60 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, जबकि आगे न कोई बस्ती है, न मोहल्ला, न गांव। इशारा यह किया गया कि संभवत: आगे किसी बिल्डर का प्रोजेक्ट प्रस्तावित है, जिसके लिए स्मार्ट सिटी या पीडब्ल्यूडी के फंड का लाभ पहुंचाया जा रहा है।

प्रेस वार्ता के अगले दिन कांग्रेस ने शहर की उन सडक़ों पर प्रदर्शन किया, जिनकी हालत बेहद खराब है और जहां मरम्मत की सख्त जरूरत है। आरोप लगाया गया कि एक तरफ करोड़ों रुपये ऐसी सडक़ पर उड़ाए जा रहे हैं जिसकी जरूरत ही नहीं, जबकि दूसरी तरफ आवश्यक मरम्मत कार्यों के लिए कोई फंड उपलब्ध नहीं कराया जा रहा।

प्रेस वार्ता और प्रदर्शन के बाद भाजपा नेताओं ने उस कथित वीरान सडक़ के बारे में जानकारी इक_ा करना शुरू किया। जब तथ्य सामने आए, तो कांग्रेस बैकफुट पर आ गई।

दरअसल, कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अरपा नदी के सामने पौधारोपण अभियान चलाया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इसका उद्घाटन भी किया था। संदेश दिया गया था कि किसान धान की खेती पर निर्भर रहने के बजाय उद्यानिकी की ओर बढ़ें, जहां कम लागत में अधिक लाभ संभव है।

मगर यह योजना अन्य कई योजनाओं की तरह असफल हो गई। उद्यान अब अस्तित्व में नहीं है, पौधे सूख चुके हैं। लेकिन सडक़ अब भी बनी हुई है। और वही सडक़ कांग्रेस द्वारा अनावश्यक खर्च के रूप में बताई जा रही थी। यह सडक़ कांग्रेस सरकार के समय ही मंजूर की गई थी, हालांकि अब काम रोक दिया गया है।

डगमगाते सवार...

बिलासपुर के लालखदान ओवरब्रिज का यह दृश्य है। अपने राज्य की हकीकत का एक आइना। एक युवक नशे में धुत है, इतना कि वह खुद को संभाल नहीं पा रहा है। उसका साथी उसे गमछे से मोटरसाइकिल से बांधकर ले जा रहा है। 


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