राजपथ - जनपथ
शिक्षक के चेहरे वाले शैतान
पता है, हाल ही में ये दो घटनाएं क्या हो गईं? किसी के सीने में सुई चुभी, धडक़नों का तारतम्य बिगड़ा? किसी मंत्री-विधायक ने स्कूलों में बच्चियों की दशा पर चिंता जताई? उनके राज्य में ऐसा हो रहा है तो आंखें नम नहीं, लाल होनी चाहिए। रतनपुर, नेवसा के सीता देवी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 9वीं कक्षा की छात्रा थी पूनम। यह एक प्राइवेट स्कूल है, जिसे एक सरकारी स्कूल का टीचर रमेश साहू चला रहा था, अपनी पत्नी अंजना के नाम पर। पूनम से एक छात्र छेड़छाड़ करता था, बहुत परेशान थी।
रमेश साहू से उसने शिकायत की। प्राइवेट स्कूल संचालक इस सरकारी शिक्षक ने हालात से टूट चुकी छात्रा को भरे स्कूल में बच्चों के मजमे में पहले डांटा फिर थप्पड़ मार दिया। थप्पड़ की जोर चाहे जितनी भी रही हो, पर पूनम की आंखों के सामने अंधेरा छा गया, आसमान काला नजर आने लगा। इसलिये कि गुरुतुल्य शिक्षक ने उसे हिम्मत देने, ढांढस बंधाने की जगह कुसूरवार मान लिया। अपमान का बोझ सह नहीं पाई। ग्लानि से भर गई होगी, कलेजा मुंह को आ गया होगा। पूनम रजक ने 23 सितंबर उसी थप्पड़ वाली घटना के दिन, घर पहुंचकर फांसी के फंदे पर झूल गई।
इधर, जशपुर के बगीचा थाना क्षेत्र के सरस्वती हायर सेकेंडरी स्कूल का मामला है। 23 नवंबर को 9वीं कक्षा की 15 साल की छात्रा हॉस्टल के स्टडी रूम में साड़ी को फंदा बना लिया और अपनी जान ले ली। सुसाइड नोट में उसने क्या लिखा है- एक-एक शब्द पढिय़े- प्रिंसिपल सर मुझे बैड टच करते थे, प्राइवेट पार्ट छूते थे। वे स्कूल की दूसरी बच्चियों को भी परेशान कर रहे हैं। उसने लिखा कि जिस दुनिया में लड़कियों की कोई इज्जत नहीं है, उस दुनिया में जी कर मैं क्या करूंगी?
इसी जशपुर में इसी महीने, नवंबर 2025 में एक चौकीदार को छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें करने की वजह से गिरफ्तार किया गया। रतनपुर, नेवसा के शिक्षक को अभी दो तीन पहले शिक्षा विभाग ने केवल निलंबित किया गया है। उसके खिलाफ खुदकुशी के लिए उकसाने का कोई अपराध दर्ज नहीं कराया गया है। सरकारी शिक्षक है, विभाग के अफसरों की कुछ सहानुभूति होगी, लेन-देन चलता होगा। इस वजह से क्योंकि सरकारी शिक्षक उनकी नाक के नीचे प्राइवेट स्कूल भी चला रहा है। जशपुर के मामले में प्राचार्य को अरेस्ट कर लिया गया है। उसकी कोई पहुंच नहीं रही होगी।
नेशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो- एनसीआरबी की रिपोर्ट कहती है कि बुलिंग और शिक्षकों के बुरे बर्ताव के कारण के कारण छात्र आत्महत्याओं की दर कोविड के बाद 20 प्रतिशत बढ़ी है। हालांकि इस रिपोर्ट में गर्ल्स और ब्वायज़ की अलग-अलग सारणी नहीं है। क्रूरता जेंडर नहीं देखती। महामारी बनने से पहले ऐसी घटनाओं को कैसे रोकें? आप भी सोचें।
सेवा विस्तार के आसार

छत्तीसगढ़ विधानसभा के सचिव दिनेश शर्मा 30 तारीख को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में उन्हें एक साल का सेवा विस्तार मिलने की अटकलें लगाई जा रही है। स्पीकर डॉ. रमन सिंह प्रदेश से बाहर हैं, और उनके आज-कल में रायपुर वापसी के बाद दिनेश शर्मा के सेवा विस्तार पर फैसला होने की संभावना है।
राज्य बनने के बाद कुछ समय के लिए विधि सचिव टीपी शर्मा, जस्टिस मिन्हाजुद्दीन विधानसभा सचिव रहे। इसके बाद भगवान देव इसरानी विधानसभा के सचिव नियुक्त हुए। बाद में इसरानी मध्यप्रदेश के विधानसभा सचिव हो गए। यहां उनकी जगह रिक्त पद पर देवेन्द्र वर्मा की पोस्टिंग हुई। देवेन्द्र वर्मा को रिटायरमेंट के बाद दो बार एक-एक साल का सेवा विस्तार मिला। इसके बाद उनकी जगह चंद्रशेखर गंगराडे विधानसभा के प्रमुख सचिव हुए। गंगराडे को भी एक बार सेवा विस्तार मिला।
हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा के नए भवन का उद्घाटन हुआ है। शिफ्टिंग की प्रक्रिया चल रही है। विधानसभा का शीतकालीन सत्र 14 से 17 दिसंबर तक चलेगा। वैसे भी विधानसभा में सीनियर अफसरों की कमी है। दिनेश शर्मा के ठीक नीचे अतिरिक्त सचिव आरके अग्रवाल रिटायर हो चुके हैं। उन्हें छह माह का सेवा विस्तार मिला हुआ है। इन सब परिस्थितियों को देखते हुए दिनेश शर्मा को भी पूर्ववर्तियों की तरह एक साल का सेवा विस्तार मिल सकता है।
संजू, तुमको बहुत-बहुत बधाई...

ढाका में हुए महिला कबड्डी वल्र्डकप के रोमांचक फाइनल में कोरबा की संजू देवी ने जिस जोश, हिम्मत और बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया, वह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है। सिर्फ 13 रेड में 16 महत्वपूर्ण अंक जुटाकर टीम को शानदार जीत दिलाना संजू की मेहनत, अनुशासन और उनकी खास प्रतिभा है।
मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर का खिताब जीतकर संजू ने न सिर्फ देश का, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का सिर ऊंचा कर दिया। उन्होंने अपने मजबूत हौसले और खेल के प्रति समर्पण बताता है कि छत्तीसगढ़ की बेटियां हर मुश्किल का सामना कर सकती हैं और अपनी वेश्विक पहचान बना सकती हैं।
तारीख पे तारीखछत्तीसगढ़ लोक आयोग में अलग- अलग विभागों के भ्रष्टाचार प्रकरणों की जांच चल रही है। कई प्रकरणों सुनवाई इसलिए टल रही है कि संबंधित विभाग के अफसरों को नोटिस तामील होने के बाद भी आयोग के समक्ष हाजिर नहीं हो पा रहे हैं।
सबसे ज्यादा शिकायत स्कूल शिक्षा और पंचायत विभाग के अफसरों की है। स्कूलों की मान्यता से जुड़े प्रकरणों की शिकायतों पर आयोग ने स्कूल शिक्षा सचिव और अन्य अफसरों को नोटिस जारी किया गया था। आयोग ने स्कूल शिक्षा सचिव को उपस्थित होकर शिकायतों पर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने कहा था। विभाग से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई है। इसके बाद फिर स्मरण पत्र भेजकर 22 दिसंबर को उपस्थित होने के आदेश दिए हैं। यही हाल, बाकी विभागों का भी है। इसका प्रतिफल यह है कि सुनवाई की तारीख पे तारीख मिलती जा रही है।


