राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : छत्तीसगढ़ देख चुके, अब कर्नाटक देखिए..
25-Nov-2025 5:53 PM
राजपथ-जनपथ : छत्तीसगढ़ देख चुके, अब कर्नाटक देखिए..

छत्तीसगढ़ देख चुके, अब कर्नाटक देखिए..

मानो वही फिल्म फिर से लगी हो, बस किरदार बदल गए हों। पांच-छह साल पहले छत्तीसगढ़ में जो कुछ हुआ था, आज कर्नाटक में ठीक वही चल रहा है। यहां मुख्यमंत्री पद के लिए भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव के बीच ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला बना था। सिंहदेव का यह दावा था, बघेल ने इसे कभी स्वीकार नहीं किया। सिंहदेव ने मीडिया में खूब बयान दिए। तूल पकड़ा तो बघेल एक दिन अचानक 50-55 विधायकों को दिल्ली लेकर पहुंच गए, हाईकमान के सामने परेड करा दी और कुर्सी पक्की कर ली। सिंहदेव के पास या तो विधायक नहीं थे, या फिर उन्होंने परेड कराने में रुचि नहीं ली। मगर, सिंहदेव नाराज चल रहे थे तो आखिरी छह महीने में उप-मुख्यमंत्री बना दिया, संतुष्ट हो गए।

मगर, कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद के दावेदार डीके शिवकुमार पहले से ही उप-मुख्यमंत्री हैं। मुख्यमंत्री पद से नीचे की कोई जगह नहीं बनती। चुनाव जीतने के बाद डीके रेस में तो थे पर सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री के तौर पर चुना गया तो उस वक्त चुपचाप हाईकमान का फैसला मान लिया। छत्तीसगढ़ में ही मचे घमासान को देखकर शायद शुरू से ही उप-मुख्यमंत्री पद दे दिया गया, मगर अब उनके खेमे के विधायक दिल्ली पहुंच गए हैं और खुलेआम कह रहे हैं, नेतृत्व बदला जाए। अब शिवकुमार खेमा वैसा ही दबाव हाईकमान पर डाल रहा है जैसा बघेल ने किया था। इधर सिद्धारमैया बेंगलूरु में अपने समर्थक विधायकों के साथ बैठकें कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के लोग तो जानते ही हैं कि ऐसे आपसी झगड़े का अंत क्या होता है। कांग्रेस हाईकमान को भी पता है। 2018-23 में ढाई-ढाई साल का विवाद चला, गुटबाजी के चलते जीत की संभावना वाले टिकट कटे, जिनके नहीं कटे उन्हें खुद कांग्रेसियों ने हरवा दिया। भाजपा का माहौल बहुत जबरदस्त भी नहीं था, फिर भी कांग्रेस 15 सीटों पर सिमट गई। उसकी ऐतिहासिक हार हुई और भाजपा को अब तक की सर्वाधिक सीटें।

कर्नाटक में भी आज वही माहौल बन रहा है। विधायक दिल्ली में डेरा डाले हैं, सोशल मीडिया पर खुली बगावत है, हाईकमान असमंजस में है। राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े से मीडिया ने जब बेंगलूरु में इस मसले पर सवाल किया तो उन्होंने कहा- हाईकमान तय करेगा। शायद, कांग्रेस में हाईकमान कोई सर्वशक्तिमान अदृश्य शक्ति होती है, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से ऊपर। 

2028 के पहले कांग्रेस कर्नाटक में भी वही गलती दोहराएगी, कुर्सी की लड़ाई को वास्तविक रूप से नहीं रोक पाएगी तो नुकसान तय है। समर्पित कार्यकर्ता चाहें जितनी मेहनत कर लें। छत्तीसगढ़ ही नहीं, मध्यप्रदेश (कमलनाथ-सिंधिया) और राजस्थान (गहलोत-पायलट) में भी उसकी सत्ता ऐसे ही कारणों से हाथ आने के बाद फिसली थी। कांग्रेस की यह समस्या स्थायी मान ली जाएगी कि  जहां-जहां सत्ता में आई, वहां आपसी कलह ने उसे पीछे धकेल दिया।

सरकारी क्वार्टर पर तनातनी

सरकारी क्वार्टर को लेकर मंत्रालय और पुलिस महकमे में नया विवाद शुरू हो गया है। शिकायत मिली है कि गृह विभाग को संपदा संचालनालय,नवा रायपुर स्थित सामान्य प्रशासन विभाग के क्वार्टर को अनाधिकृत रूप से पुलिसकर्मियों को आबंटित कर रहा है। यह शिकायत और आपत्ति और किसी ने नहीं मंत्रालय कर्मचारी संघ ने ही की है। एसीएस गृह मनोज पिंगुआ को चार बिंदुओं का दो पेज का लंबा चौड़ा पत्र सौंपकर इसे अनाधिकृत कहा है। इसमें सबसे उल्लेखनीय बात यह कही गई है कि पुलिस हाउसिंग बोर्ड द्वारा भी सभी कैटेगरी के आवास बनाए गए हैं उसके बाद भी संपदा संचालनालय जीएडी के क्वार्टर पर अपना अधिकार जता रहा है वह भी केवल नाम संपदा संचालनालय होने  से। मानो यह संचालनालय सभी सरकारी आवासों का अकेला मालिक हो।

 

इस पत्र में संघ ने कहा कि पुराने रायपुर और अटल नगर स्थित शासकीय आवासों का आबंटन पुलिस  कर्मचारियों कोकिया जा रहा है, जबकि अन्य विभागों के कर्मचारी लंबी वेटिंग लिस्ट में प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह स्थिति आवास आबंटन प्रक्रिया में असमानता ही नहीं नीति विरुद्ध कार्यवाही का द्योतक भी है। इतना ही नहीं दोनों ही शहरों में पर्याप्त संख्या में पुलिस के लिए आवास निर्मित, और आरक्षित हैं। ये आवास तो  किसी अन्य सेवा के कर्मचारियों को आबंटन नहीं किए जाते।  ऐसी स्थिति में पुलिस कर्मचारियों को अन्य आवास आबंटित करना न केवल अनुचित है, बल्कि अन्य विभागों के कर्मचारियों के अधिकारियों का भी हनन है। इससे दोहरी आवास सुविधा की स्थिति उत्पन्न हो रही है, जो शासन के नीति के विरुद्ध है। पूर्व में प्रमुख सचिव, गृह विभाग द्वारा स्पष्ट निर्देश है, कि पुलिस विभाग के कर्मचारियों को संपदा संचालनालय द्वारा शासकीय आवास आबंटित नहीं किया जाना है। इन निर्देशों के अनुसार आवासों का आबंटन केवल उन्हीं विभागों के कर्मचारियों को किया जाना है, जिनके लिए पृथक आवास व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। किंतु इन आदेशों का पालन न कर पुलिस कर्मचारियों को लगातार शासकीय आवास आबंटित किया जा रहा है।

नए कर्मियों की नई मुसीबत

 प्रदेश में सहकारिता कर्मचारी हड़ताल से वापस लौट आए हैं। कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से प्रदेश में धान खरीद व्यवस्था लडखड़़ा गई थी।  सरकार ने हड़ताल तुड़वाने के लिए कार्रवाई की, और कई जगहों पर कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया। कई जिलों में पुराने कर्मचारियों को हटाकर नई नियुक्तियां की गई। ये अलग बात है कि नए कर्मचारी काम को समझ पाते, इससे पहले हड़ताल खत्म हो गई। पुराने कर्मचारी हड़ताल खत्म होने के काम पर वापस आ गए हैं। नए कर्मचारियों की सेवाएं खत्म हो गई। उन्हें कोई नियुक्ति पत्र नहीं मिला था। अब वो परेशान हैं। और वो नियुक्ति पत्र के लिए जिलों में प्राधिकृत अधिकारियों को ज्ञापन दे रहे हैं। मगर अब सुनवाई नहीं हो रही है।

प्रकृति, पक्षी प्रेमियों के लिए बड़ी उम्मीद

ये तस्वीर आम बोलचाल में हंस की है। प्रजाति है- बार हैंडेड गीज, मध्य एशिया में पहाड़ी झीलों के पास प्रजनन करते हैं तथा भारत सहित दक्षिण एशिया में शीतकाल बिताते हैं। तस्वीर जाने-माने पर्यावरण प्रेमी-पत्रकार प्राण चड्ढा ने कोपरा जलाशय से ली है।

बिलासपुर से कुछ किलोमीटर दूर स्थित कोपरा जलाशय को हाल ही में रामसर साइट बनाने की राज्य सरकार ओर से पहल हुई है। प्रस्ताव दिल्ली पहुंच चुका है और अब अंतिम मंजूरी का इंतजार है। यदि सब ठीक रहा तो आने वाले वर्षों में यह ज छत्तीसगढ़ की पहली कतार में शामिल अंतरराष्ट्रीय आर्द्रभूमि बनकर सामने आएगी। प्रकृति प्रेमियों को तो अच्छा ठिकाना मिलेगा ही आसपास के लोगों की आजीविका का साधन भी पनपेगा।

कोपरा जलाशय की खासियत इसकी विविध भू-रचना है। फैला जलाशय, दलदली किनारे, घास वाली पट्टियां और आसपास की हरियाली। सब मिलकर एक ऐसा माहौल बना लेते हैं कि दर्जनों किस्म के प्रवासी पक्षी सालभर देखे जा सकते हैं।

यहां 100 से ज्यादा पक्षी प्रजातियां दर्ज की जा चुकी हैं। रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड, बार-हैंडेड गीज, रूडी शेल्डक, ब्लैक-हेडेड आइबिस, रोज़ी स्टार्लिंग और इजिप्शियन वल्चर जैसे दुर्लभ और संवेदनशील पक्षी भी इनमें शामिल हैं।

इन सर्दियों के मौसम में हर बार की तरह इन प्रवासी मेहमानों की संख्या और बढ़ गई है। दूरबीन से इन्हें आसानी से देखा जा सकता है। कई प्रकृति प्रेमी नाव में बैठकर भी फोटोग्राफी कर रहे हैं।


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