राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : मंत्री शुमार हो गईं बड़े नेताओं में...
01-Nov-2025 6:17 PM
राजपथ-जनपथ : मंत्री शुमार हो गईं बड़े नेताओं में...

मंत्री शुमार हो गईं बड़े नेताओं में...

छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अपने एक बयान से भाजपा के उन बड़े नेताओं में शामिल हो गई हैं, जिन्होंने अपने नेता में ईश्वर का रूप देखा है। मध्यप्रदेश के मंत्री कमल पटेल ने कोविड महामारी से निपटने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका की तारीफ करते हुए उन्हें भगवान बताया था। उत्तरप्रदेश के पंचायती राज मंत्री उपेंद्र तिवारी ने कहा था- मोदी कोई साधारण व्यक्ति नहीं, वे परमात्मा के अवतार हैं। महाराष्ट्र के भाजपा प्रवक्ता अवधूत वाघ ने एक ट्वीट (एक्स पर ) किया था कि मोदी कोई साधारण व्यक्ति नहीं, वे परमात्मा के अवतार हैं। इन सबसे आगे बढक़र पुरी में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान संबित पात्रा के जुबान से निकल गया था कि भगवान जगन्नाथ मोदीजी के भक्त हैं। विवाद होने पर उन्होंने माफी मांगी लेकिन यह बात मोदी को भगवान जैसा या उनके ऊपर रखने जैसा ही था।

सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप में राजवाड़े कह रही हैं कि 25वें स्थापना दिवस पर मोदी का छत्तीसगढ़ आना ही बड़ी बात है। वे हमारे लिए ईश्वर के समान हैं..।

यह जरूर है कि मोदी के छत्तीसगढ़ प्रवास ने 25वें स्थापना दिवस को ऐतिहासिक और खास बना दिया है, न केवल सरकार और भाजपा बल्कि छत्तीसगढ़ के आम लोग भी उनके आगमन के महत्व को समझ रहे हैं, पर मोदी को ईश्वर जैसा बताकर मंत्री राजवाड़े सबसे आगे निकल गईं। वैसे, कई बार अपने नेता की छवि को दिव्य बनाकर कोशिश की जाती है राजनीतिक लाभ उठाया जाए, वफादारी बढ़ाएं, अपने विरुद्ध हो रही आलोचनाओं को दबाएं और जनता को भावुकता में बांधकर समर्थन बनाए रखें। जब राजवाड़े के इस बयान पर आप गौर करते हैं तो उनके और उनके विभाग के कामकाज पर हाल ही में आई आलोचनात्मक खबरों पर भी सरसरी नजर दौड़ा सकते हैं।

वैसे तरह का बयान कोई नई बात नहीं। ऐसा देश के आजाद होने के बाद से ही चल रहा है। देश में जब इमरजेंसी लगी तो स्व. इंदिरा गांधी को उनके करीबियों ने एहसास करा दिया था कि-इंदिरा इज इंडिया, इंडिया इज इंदिरा।  संविधान सभा में 25 नवंबर 1949 के अपने आखिरी भाषण में डॉ. भीमराव अंबेडकर ने चेतावनी दी थी कि धर्म में भक्ति आत्मा के उद्धार का रास्ता हो सकता है लेकिन राजनीति में भक्ति पतन का रास्ता है, जो अंतत: तानाशाही की ओर ले जाता है। उन्होंने जॉन स्टुअर्ट मिल का हवाला देते हुए कहा था कि कभी भी अपनी आजादी को किसी महान व्यक्ति के चरणों में न रख दें, वरना वह संस्थाओं को नष्ट कर देगा। महात्मा गांधी भी 'भगवान' बनने को लेकर सावधान रहते थे। उन्होंने कहा था कि सच्चा सेवक वही जो जनता का दास बने, न कि पूज्य। मगर, भक्ति की परंपरा वाले देश में न केवल नेता बल्कि दूसरे क्षेत्रों, जैसे-अध्यात्म, सिनेमा, खेल के सिलेब्रिटी भी भगवान के बराबर पूजे जाते हैं। इसलिए राजवाड़े की बात से भाजपा के भीतर शायद ही किसी को शिकायत हो।

रजत जयंती शुरू, आमंत्रण पत्र...

राज्य स्थापना दिवस के रजत जयंती समारोह का शनिवार को आगाज हुआ। सरकारी स्तर कार्यक्रम को सफल बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रही, लेकिन पहले दिन का कार्यक्रम का आमंत्रण पत्र ही नहीं बंट पाया।

सांसद-विधायकों के प्रतिनिधि रायपुर कलेक्टोरेट, और संस्कृति विभाग से संपर्क कर शुक्रवार को आमंत्रण पत्र को लेकर पूछताछ करने नजर आए।

  यह कहा गया कि पहले दिन का कार्यक्रम सामान्य प्रशासन विभाग के जिम्मे है और आमंत्रण की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है। बाकी दो से पांच नवंबर तक का  कार्यक्रम संस्कृति विभाग करा रही है। लिहाजा, उनकी तरफ से आमंत्रण पत्र बंटना शुरू हो गया है।

सांसद-विधायकों और अन्य विशिष्ट लोगों के लिए तो पास जारी हुए, लेकिन इससे नीचे लोग आमंत्रण पत्र के लिए भटकते देखे गए।

पीएम के कार्यक्रमों के लिए अलग अलग आमंत्रण पत्र बंटा था। नए विधानसभा भवन के उद्घाटन समारोह में लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला भी शामिल हुए, लेकिन आमंत्रण पत्र में उनका नाम ही नहीं था। विधानसभा सचिवालय ने स्पीकर डॉ रमन सिंह के नाम से आमंत्रण पत्र पत्र जारी किया था इसमें सिर्फ पीएम नरेंद्र मोदी का ही नाम है। न सिर्फ लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला बल्कि राज्यपाल रामेन डेका,सीएम विष्णु देव साय का नाम भी आमंत्रण पत्र में नहीं है। खास बात ये है कि लोकसभा स्पीकर को तो महीने भर पहले कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था।

विधायकों की दिक्कत

चुनाव जीतने के दो साल के भीतर कई विधायकों के तेवर बदल गए हैं। अपने विधायकों ने नाखुश लोगों ने अपनी भड़ास भी निकालना शुरू कर दिया है।

 सत्तारूढ़ दल के दो भाजपा विधायकों के खिलाफ असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। इनमें एक रायपुर जिले के युवा विधायक जब भी फेसबुक पर कुछ पोस्ट करते हैं, उन्हें कमेंट में उलाहना देने वालों बाढ़ आ जाती है। इससे वो काफी परेशान हैं। इसी तरह एक महिला विधायक के खिलाफ पार्टी के कई लोग लामबंद होकर अभियान चला रहे  हैं।

महिला विधायक ने अपने सहयोगियों को नजर अंदाज करना शुरू किया, तो उनके लोग ही परदे के पीछे अभियान चला रहे हैं। उनके खिलाफ जाति मामला भी हाईकोर्ट चला गया है, और इस पर कोर्ट ने जिला प्रशासन को जांच के आदेश दे दिए हैं। और जब अपने ही विरोधी हो जाते हैं, तो पार पाना आसान नहीं रहता है।


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