राजपथ - जनपथ
धूप में नेवलों की कसरत
धान की पकी बालियों के बीच इन दिनों नेवले की फुर्ती और चहलकदमी किसानों का ध्यान खींच रही है। सांपों के जन्मजात दुश्मन कहे जाने वाले नेवले को देखकर कई लोग सहम जाते हैं, लेकिन कुछ लोग इसी वजह से उसे पालते भी हैं, क्योंकि यह विषैले सर्पों को भी कई टुकड़ों में काट डालता है।
धूप सेंकते इस नेवला जोड़ी की तस्वीर पर्यावरण प्रेमी पत्रकार प्राण चड्ढा ने बड़ी मेहनत से कैद की है। वे बताते हैं कि नेवला बेहद शर्मीला और चंचल जीव है, जरा सी आहट होते ही छिपने में माहिर। तस्वीर बिलासपुर नगर निगम सीमा के अंतर्गत ग्राम मंगला के खेतों में खींची गई है, जहां सुनहरी धूप में ये नेवले मानो अपनी सुबह की कसरत कर रहे हों।
रमन की फुर्सत में कान्हा की सैर
दिवाली के मौके पर परिजनों के साथ वक्त बिताने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने मध्यप्रदेश के कान्हा नेशनल पार्क का रूख किया। ठाठापुर में दिवाली पूजा के बाद परिवार के सदस्यों को लेकर डॉ. सिंह ने कान्हा के मुक्की गेट से बाघ देखने के लिए घंटों जंगल सफारी की। सुनते हैं कि डॉ. सिंह के परिवार के सभी नजदीकी रिश्तेदार भी सफारी करने उनके साथ थे। दो अलग-अलग टोलियों में परिवार के सदस्य सफारी करते हुए रोमांचित नजर आए। हालांकि डॉ. सिंह को बाघ का दर्शन नहीं हुआ, लेकिन उनके परिवार के दूसरे सदस्यों को बाघ देखना नसीब हुआ। दिवाली के अगले दिन सडक़ रास्ते से डॉ. सिंह मुक्की गेट पहुंचे। वहां उन्होंने परिवार के साथ रात्रि विश्राम भी किया। सफारी करने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के यात्रा की तैयारी के मद्देनजर डॉ. सिंह को हेलीकाप्टर से रायपुर लौटना पड़ा।
एसपी बनाने के राज
दो दिन पहले आईपीएस अफसरों के तबादले की एक छोटी सूची जारी हुई। इसमें चार जिले सक्ती, राजनांदगांव, एमसीबी, और कोंडागांव के एसपी बदले गए। तबादले के पीछे कुछ वजह भी है। राजनांदगांव में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ा था। यहां पुलिस भर्ती में गड़बड़ी का मामला भी सुर्खियों में रहा। कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस में डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने राजनांदगांव में पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी भी जताई थी।
वैसे भी राजनांदगांव एसपी मोहित गर्ग को दो साल हो रहे थे, लिहाजा उनकी जगह अंकिता शर्मा की पोस्टिंग की गई है। आईपीएस की वर्ष-2018 बैच की अफसर अंकिता शर्मा पहले पड़ोस के जिले खैरागढ़ एसपी रह चुकी हैं। तेज तर्रार अंकिता मूलत: दुर्ग की रहवासी हैं। वो राजनांदगांव के मिजाज से पहले से वाकिफ हैं। उनसे काफी उम्मीदें हैं। खास बात यह है कि राजनांदगांव के इतिहास में पहली बार किसी महिला अफसर को एसपी बनाया गया है।
इससे परे धमतरी-महासमुंद सहित कई जिलों के एसपी रह चुके प्रफुल्ल ठाकुर को सक्ती एसपी बनाया गया है। प्रफुल्ल ठाकुर, भूपेश बघेल के सीएम रहते सुरक्षा अधिकारी भी थे। सरकार बदलने के बाद उनकी बटालियन में पोस्टिंग हो गई। प्रफुल्ल ठाकुर की पारिवारिक पृष्ठभूमि कांग्रेस की रही है। उनके भाई वीरेश ठाकुर कांकेर लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी रहे, और दो हजार से कम वोटों से चुनाव जीतने से रह गए। हालांकि प्रफुल्ल बेदाग रहे हैं, और मिलनसार भी हैं। वो डॉ. रमन सिंह के सीएम रहते सुरक्षा में भी तैनात थे। कुछ हफ्ते पहले उन्हें एसपी बनाए जाने की खबर सोशल मीडिया में वायरल भी हो गई थी इसके चलते वो परेशान भी रहे। यह खबर अब जाकर सच हुई है।
फेरबदल के बीच महासमुंद एसपी आशुतोष सिंह केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जा रहे हैं। उनकी सीबीआई में पोस्टिंग हो गई है। उन्हें अभी रिलीव नहीं किया गया है। आशुतोष की जगह जल्द ही नए एसपी की पदस्थापना की जाएगी।
अधूरे होटल पर खुलेगा ताज
नवा रायपुर, और पुराने रायपुर के बीच जमीन का कारोबार फल फूल रहा है। देश की नामी कंपनियों ने यहां जमीन खरीदी हैं। इनमें गोदरेज, और लोढ़ा समूह भी शामिल हैं। इस इलाके में होटल-रेस्टोरेंट, और महंगे पब की बाढ़ आ गई है। यहां वीआईपी रोड में ताज होटल समूह भी पांच सितारा होटल खोलने जा रहा है।
हालांकि कुछ साल पहले कांग्रेस के एक नेता ने ताज समूह का फ्रेंचाइजी लिया था, और गेटवे ताज के नाम से होटल शुरू किया। कुछ समय बाद उन्होंने फ्रेंचाइजी वापस कर दिया, और फिर इंदौर के सायाजी ग्रुप को होटल बेच दिया। अब ताज होटल समूह, फुंडहर के पास होटल स्थापित करने जा रहा है। इसके लिए ताज समूह ने कांग्रेस के एक पूर्व मंत्री के बेटे की जमीन, और उस पर बना ढाँचा खरीदा है, जो कि खुद वहां होटल खोलने जा रहे थे, मगर निर्माण कार्य आधा अधूरा रह गया, और फिर कर्ज अदा नहीं करने पर बैंक ने आधे-अधूरे निर्माण के साथ जमीन की नीलामी कर दी। ताज समूह यहां होटल शुरू करेगा।
फिसली जुबान से सच निकला क्या?
बस्तर के नारायणपुर जिले में दूषित मांस खाने से पांच ग्रामीणों की मौत की घटना के बाद सांसद महेश कश्यप का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वे इसमें कहते सुनाई दे रहे हैं कि अबूझमाड़ में फैल रही बीमारियों के लिए पूरे सत्ताधारी और माओवादी जिम्मेदार हैं। कश्यप के इस बयान को लेकर बवाल मच गया। कुछ लोगों ने कहा कि माओवादियों का नाम लेना तो ठीक हो सकता है, पर वे पूरे सत्ताधारियों को क्यों जिम्मेदार ठहरा रहे हैं? प्रदेश में सरकार तो उनकी ही पार्टी की है। बात सच भी हो सकती है कि सत्ताधारी जिम्मेदार हों, मगर सांसद का इतना बेबाक हो जाना लोगों के गले नहीं उतरा। मगर कुछ घंटों के बाद ही कश्यप की सफाई भी सामने आ गई। यह साफ हो गया कि वे अपनी सरकार के लिए मुश्किल खड़ी नहीं करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दरअसल वे पूर्व सत्ताधारी (कांग्रेस सरकार) कहना चाहते थे लेकिन मुंह से पूरे सत्ताधारी शब्द निकल गया। फूड प्वाइजनिंग से मौतें अब सामने आई हैं, मगर गांव में सामूहिक भोज करीब 10 दिन पहले हुआ था। ग्रामीण अपने स्तर पर बैगा-गुनिया और झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज करा रहे थे। स्वास्थ्य विभाग को जब खबर लगी तब तक दो माह की मासूम बेबी सहित पांच लोग जान गवां चुके थे।। अभी अस्पताल में करीब दो दर्जन पीडि़तों का इलाज चल रहा है। आकलन आप करिये कि सांसद का सफाई में दिया गया बयान क्या सच छिपाने में मदद कर रहा है?


