राजपथ - जनपथ
बाबा की महिमा
पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव भले ही मात्र 94 वोट से चुनाव जीतने से रह गए, लेकिन कांग्रेस हाईकमान की नजर में अहमियत कम नहीं हुई है। यह सब बिहार विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी चयन के दौरान देखने को मिला। पार्टी ने टिकट को झगड़ा निपटाने के लिए तीन सदस्यीय हाईपावर कमेटी बनाई।
कमेटी में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल के अलावा पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव भी थे। कमेटी ने सारे विवादों का निपटारा किया, और फिर प्रत्याशियों के नामों की अनुशंसा की, जिसे अधिकृत तौर पर घोषित किया गया। बिहार से पहले हरियाणा में टिकट से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए कमेटी बनाई थी, जिसमें भी सिंहदेव को रखा गया था।
हालांकि सिंहदेव राष्ट्रीय, या प्रदेश में कोई अहम पद पर नहीं हैं। उन्हें पहले राष्ट्रीय महासचिव बनाने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने प्रदेश में ही काम करने की इच्छा जताई थी। इसके बाद से उन्हें दीपक बैज की जगह अध्यक्ष बनाने की चर्चा रही है। मगर इस पर कोई फैसला नहीं हो पाया है। ऐसे में देर सबेर उन्हें प्रदेश में कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल जाए, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
आईआरएस और वीआरएस
हमने कुछ माह पहले इसी कालम में बताया था कि बीते एक दशक में 2014-24 तक देश भर के 800 से अधिक आयकर अफसरों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली है। इसके चलते आयकर सर्वे, छापे और अपील के मामलों में कार्रवाई पर बड़ा असर पड़ रहा है। हालांकि इसी दौरान विभाग ने उपलब्ध स्टाफ से फेसलेस, सर्वे और अपील की सुनवाई के लिए वर्चुअल सॉफ्टवेयर का उपयोग शुरू किया। इसका प्रतिसाद कैसा है यह अभी सामने नहीं आया है। लेकिन ऐसा लगता है कि भारत की सिविल सेवा पर अत्यधिक दबाव है। इससे परे अनुभवी व वरिष्ठ आईआरएस अधिकारियों के वीआरएस से स्थिति और भी गंभीर हो गई है। वे तो नौकरी ही छोडऩे में भी नहीं झिझक रहे।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के वर्षवार आंकड़ों का विश्लेषण करने पर, 20 आईआरएस (आयकर) ग्रुप ए अधिकारियों ने 2014 में वीआर लिया।, 2015 में 19, 2016 में 14, 2017 में 15, 2018 में 35, 2019 में 31, 2020 में 23, 2021 में 53, 2022 में 58, 2023 में 58 और 2024 में 57। इसके अलावा, 24 आईआरएस (सीमा शुल्क और अप्रत्यक्ष कर) ग्रुप ए अधिकारियों ने 2014 में वीआर लिया, 2015 में 30, 2016 में 40, 2017 में 30, 2018 में 45, 2019 में 32, 2020 में 30, 2021 में 30, 2022 में 49, 2023 में 56 और 2024 में 73। इनकी संख्या कुल 853 होती है। यदि वीआरएस इसी गति से जारी रहा तो शासन के राजस्व की मशीनरी को कौन चालू रखेगा?
बेटी की खुशी के लिए

जशपुर जिले के किसान बजरंग राम भगत ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादा मजबूत हो तो कोई सपना अधूरा नहीं रहता। सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी चम्पा भगत को होंडा एक्टिवा स्कूटी तोहफे में देने का सपना पूरा किया। वह सिक्कों से भरा बोरा लेकर शोरूम पहुंच गया। ये सिक्के उसने छह महीनों तक जमा किए। 10 और 20 रुपये के सिक्के जमा करने वाले इस किसान की मेहनत देखकर शोरूम के सभी कर्मचारी भी भावुक हो उठे। शो रूम के संचालक ने अपने कई कर्मचारियों को सिक्के गिनने में लगा दिए, फिर स्कूटी की डिलिवरी की।
किसान ने कहा, यह मेरी हैसियत नहीं थी- मगर बेटी की खुशी के लिए खरीदना जरूरी था।
सुधार गृह ही नहीं सुविधा गृह भी...

रायपुर सेंट्रल जेल एक बार फिर सुर्खियों में है। यहां कैद हिस्ट्रीशीटर राजा बैजड़ का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह जेल के अंदर जिम झोंकते हुए दिखाई दे रहा है। उसका वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही है। मामला सामने आने के बाद दो जेल कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इससे पहले इसी जेल से हिस्ट्रीशीटर अमन साव का भी ऐसा ही वीडियो बाहर आया था।
जेल के भीतर रसूखदार बंदियों की अपनी टीम और पदक्रम होता है। जो जितना बड़ा हिस्ट्रीशीटर, उसका उतना ही रुतबा। फिटनेस का यह वीडियो यह साफ बताता है कि जेल के अंदर मोबाइल फोन की पहुंच कितनी आसान है, और यह सुविधा मुफ्त में नहीं मिलती। इसके पीछे मोटी रकम की अदायगी होती है।
अभी इसी महीने अंबिकापुर जेल से हत्या के एक मामले में सजायाफ्ता कैदी भागकर बिलासपुर पहुंच गया था। वहाँ उसने फिनाइल पीकर आत्महत्या की कोशिश की। उसकी पत्नी ने बिलासपुर कलेक्टर को ज्ञापन देकर बताया कि जेल में उसके पति से पैसे भेजने का दबाव बनाया जाता था और न देने पर मारपीट की जाती थी। उसने ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के सबूत भी पेश किए। अंबिकापुर पुलिस उसे पकडक़र वापस जेल ले गई।
सारंगढ़ उप जेल में भी वसूली को लेकर कैदियों से लगातार और बुरी तरह मारपीट के मामले सामने आए। फरवरी में परिजनों ने जेल अधिकारियों पर जबरन वसूली और अत्याचार के आरोप लगाए थे। अप्रैल में खबरें छपने के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया, और जांच के बाद जुलाई में एक सहायक जेल अधीक्षक और दो प्रहरियों को निलंबित किया गया। इन्होंने भी ऑनलाइन पैसे लिए थे।
अब जब रायपुर सेंट्रल जेल का यह फिटनेस वीडियो सामने आया है। जेल प्रबंधन इसे सुधार गृह की गतिविधि कहकर बचाव कर सकता है, लेकिन असली सवाल यही है कि मोबाइल फोन उस संवेदनशील बैरक तक पहुँचा कैसे? छत्तीसगढ़ की जेलों का हाल अब किसी से छिपा नहीं। कैश हो तो मोबाइल फोन से लेकर नशे का सामान तक सब उपलब्ध है। कैदी चाहें तो जेल से ही अपने नेटवर्क को निर्देश दे सकते हैं। फर्क बस इतना है कि जो भुगतान कर सकता है, उसके लिए जेल-जेल नहीं, सुविधा घर बन जाता है।


