राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : उत्सव में धक्का-मुक्की, चाकूबाजी
23-Jun-2025 6:44 PM
राजपथ-जनपथ : उत्सव में धक्का-मुक्की, चाकूबाजी

उत्सव में धक्का-मुक्की, चाकूबाजी

सरकार ने तीन महीने का राशन एक साथ देने की घोषणा को बड़ा नाम दिया- चावल उत्सव। दावा किया गया कि इससे गरीबों को राहत मिलेगी और बारिश के दिनों में उन्हें बार-बार भटकना नहीं पड़ेगा।

लेकिन इस योजना की शुरुआत से ही अव्यवस्थाएं सामने आने लगीं। सबसे पहले तो राशन दुकान संचालकों ने ही इसका विरोध किया, क्योंकि उनके पास एक साथ तीन महीने का स्टॉक रखने की जगह ही नहीं थी।

अब जगह-जगह से ऐसी खबरें आ रही हैं कि इस उत्सव में लोगों को केवल तकलीफ मिल रही है। गरियाबंद जिले में राशन दुकान पर भारी भीड़ जुट गई। घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी लोगों को न तो ओटीपी मिला, न मशीनें चलीं। पूरे दिन में मुश्किल से 20-25 लोगों को ही राशन मिल सका। बाकी लोग धूप में खड़े-खड़े चक्कर खाकर गिरते-पड़ते खाली हाथ लौट गए।

सारंगढ़ में तो राशन न मिलने की झुंझलाहट में एक युवक ने दुकानदार पर चाकू से हमला कर दिया। बात इतनी बढ़ी कि दोनों को अस्पताल ले जाना पड़ा।

ऐसा लग रहा है कि ये पूरी योजना बिना किसी तैयारी के जल्दबाजी में शुरू कर दी गई। न मोबाइल में ओटीपी आ रहा, न पीओएस मशीनें ठीक से चल रही हैं। और ऊपर से 105 किलो चावल उठाकर घर ले जाना भी लोगों के लिए बड़ी समस्या हो गई है। खासकर उन इलाकों में जहां लोग मीलों चलकर राशन दुकान तक पहुंचते हैं।

अगर किसी योजना को उत्सव की तरह घोषित किया जाता है, तो उसमें सहूलियत और खुशी दिखनी चाहिए। मगर यहां तो जो लोग चावल लेने जा रहे हैं, उन्हें दुकानों में सिर्फ अफरातफरी और परेशानी देखने को मिल रही है।

लोगों को डर है कि अगर किसी वजह से राशन नहीं मिला तो तीन महीने तक हाथ मलते रह जाएंगे। नतीजतन, गरीब लोग लंबी लाइनों में लगकर तकलीफ झेल रहे हैं।

मछली फँसी, मगरमच्छ...

सीजीएमएससी घोटाला मामले की ईओडब्ल्यू-एसीबी पड़ताल कर रही है। सीजीएमएससी के अफसरों समेत कुल 7 लोग जेल में हैं। गिरफ्तार लोगों में संचानालय के एक चिकित्सा अफसर भी हैं। अफसर की साख ढीले-ढाले, और पान पराग के शौकीन के रूप में रही है। नियम प्रक्रियाओं को लेकर ज्यादा समझ नहीं रही है, वो निचले अफसरों पर ही निर्भर रहते थे।

सुनते हैं कि विभाग के बड़े अफसर चिकित्सा अफसर को डांट फटकार कर अपने मन मुताबिक नोटशीट बनवाते थे, और फिर उनका दस्तखत ले लिया करते थे। और जब घोटाला हुआ, तो चिकित्सा अफसर फंस गए। ऐसा नहीं है कि जांच एजेंसी को बड़े अफसर की भूमिका की जानकारी नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री बड़े अफसर के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा कर चुके हैं। मगर अब तक बड़े अफसर का बाल बांका नहीं हुआ है।

कुछ इसी तरह का मामला रमन सरकार के पहले कार्यकाल में हुआ था। उस समय भी एक चिकित्सा अफसर से इसी तरह दबाव डालकर  विभाग प्रमुख नोटशीट बनवाते थे, और फिर घोटाले को अंजाम दे दिया करते थे। चिकित्सा अफसर तो फंस गए, लेकिन तमाम चालाकियों के बाद भी विभाग प्रमुख नहीं बच पाए। केन्द्रीय जांच एजेंसियों ने उन्हें धर लिया, और बर्खास्त भी हो गए। देखना है कि सीजीएमएससी घोटाले में बड़े अफसर का क्या कुछ होता है।

शहीद परिवार का सम्मान

केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को नवा रायपुर में शहीद आकाश गिरेपुंजे की पत्नी स्नेहा, और बच्चों से मुलाकात की। चर्चा के दौरान शाह  भावुक भी हो गए। गृहमंत्री विजय शर्मा ने उन्हें बताया कि संवेदनशील इलाकों में कैम्प खुलवाने में पखवाड़े भर का समय लगता है, लेकिन यह काम आकाश हफ्तेभर में कर देते थे।

डिप्टी सीएम ने बताया कि आकाश जहां भी पदस्थ रहे, काफी लोकप्रिय  थे। शाह ने शहीद आकाश गिरेपुंजे के दोनों बच्चों को गोद में लिया, और बिस्कुट खिलाया। उन्होंने आकाश की पत्नी स्नेहा से भी बातचीत की।  शाह ने उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया, और कहा कि हफ्ते भर के भीतर उन्हें (स्नेहा) नियुक्ति पत्र मिल जाएगी। स्नेहा को डिप्टी कलेक्टर बनाया जा सकता है।

अमित शाह ने आकाश के पिता गोविंद राव से भी चर्चा की। उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि आज नवा रायपुर में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में शहीद हुए वरिष्ठ पुलिस अफसर आकाश राव गिरेपुंजे जी के परिजनों से मुलाकात की। मोदी सरकार 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त भारत बनाकर अमर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

पार्किंग शुल्क है या ट्रैफिक चालान?

अगर आपको लगता है कि रायपुर एयरपोर्ट या रायपुर-बिलासपुर के रेलवे स्टेशनों में पार्किंग शुल्क के नाम पर जेब ज्यादा ढीली हो जाती है, तो एक बार बनारस की यह पार्किंग स्लिप देख लीजिए।

सोशल मीडिया में वायरल एक पोस्ट के मुताबिक, बनारस रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 के बाहर बने पार्किंग एरिया में साइकिल और बाइक पार्क करना आपकी हैसियत को ऊंचा उठा देगा।

यहां साइकिल पार्क करने का शुल्क है- 20 मिनट के लिए 20 रुपये। मोटरसाइकिल के लिए 30 रुपये। एक घंटे के बाद हर घंटे के लिए साइकिल पर 50 रुपये और बाइक पर शायद इससे भी ज्यादा चार्ज वसूला जा रहा है।

कल्पना कीजिए, अगर आपकी साइकिल 24 घंटे तक वहां खड़ी रह गई, तो पार्किंग का बिल बन सकता है पूरे 1200 रुपये। और मोटरसाइकिल के लिए 2400 रुपये। कार टैक्सी वालों के क्या शुल्क है, यह नहीं बताया गया है लेकिन अंदाजा लगाएं तो इससे कहीं तीन गुना अधिक होगा।

कई लोगों ने सवाल पूछा है कि  ये पार्किंग शुल्क है या ट्रैफिक चालान? क्योंकि यह रकम तो उस फाइन से भी ज्यादा है, जो ट्रैफिक पुलिस सडक़ पर गलत पार्किंग के लिए काटती है।


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