राजपथ - जनपथ
मुख्य सचिव का इतिहास और भविष्य
प्रदेश में नए सीएस की नियुक्ति को लेकर अटकलों का दौर जारी है। मौजूदा सीएस अमिताभ जैन 30 तारीख को रिटायर हो रहे हैं। पहले यह चर्चा थी कि पूर्व डीजीपी अशोक जुनेजा की तर्ज पर उन्हें एक्सटेंशन दिया जा सकता है। मगर अब यह साफ हो गया है कि अमिताभ जैन के एक्सटेंशन को लेकर केन्द्र सरकार को कोई प्रस्ताव अब तक नहीं भेजा गया है। चर्चा यह भी है कि खुद अमिताभ जैन भी एक्सटेंशन नहीं चाहते हैं। वैसे भी उन्हें सीएस के पद पर काम करते 4 साल से अधिक हो चुके हैं। सबसे ज्यादा समय तक सीएस रहने का रिकॉर्ड उनके नाम पर हो गया है।
सुनते हैं कि नया सीएस के लिए जिन दो नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा चल रही है उनमें 92 बैच के अफसर सहकारिता विभाग के एसीएस सुब्रत साहू, और 94 बैच के एसीएस मनोज पिंगुआ हैं। वैसे तो सीनियरटी में 91 बैच की अफसर माध्यमिक शिक्षा मंडल की चेयरमैन रेणु पिल्ले सबसे ऊपर है। मगर ईमानदार, और नियम पसंद रेणु पिल्ले किसी भी सरकार की पसंद नहीं रही हैं। इसी तरह 94 बैच की अफसर ऋचा शर्मा को भी सीएस दौड़ से बाहर माना जा रहा है। उनकी भी साख कुछ हद तक रेणु पिल्ले जैसी ही है। ऐसे में सुब्रत साहू, और मनोज पिंगुआ के बीच में ही फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि कुछ लोग केन्द्र सरकार की दखल से भी इंकार नहीं कर रहे हैं। रमन सरकार में भी सीएस की नियुक्ति को लेकर एक-दो बार हाईकमान से मार्गदर्शन लिया गया था। ऐसी चर्चा है कि अगले हफ्ते-दस दिन के भीतर सीएम दिल्ली जा सकते हैं, और सीएस की नियुक्ति पर केंद्र, और पार्टी के शीर्षस्थ नेताओं से मार्गदर्शन ले सकते हैं।
रमन सरकार में एसके मिश्रा, एके विजयवर्गीय, शिवराज सिंह, पी जॉय उम्मेन, सुनील कुमार, और फिर विवेक ढांड सीएस रहे। भूपेश सरकार के पांच साल में अजय सिंह, सुनील कुजूर, आरपी मंडल, और फिर अमिताभ जैन सीएस हुए। अमिताभ के उत्तराधिकारी कौन होंगे इसका खुलासा 29-30 तारीख को ही हो पाएगा।
बिजली गुल, सियासत की बत्ती जलने लगी..
छत्तीसगढ़ के ज्यादातर शहरों में बिजली संकट से लोग परेशान है, क्या कांग्रेसी और क्या भाजपाई। लेकिन दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता एक साथ मिलकर किसी मुद्दे पर बोलें, यह तो किसी को भी अटपटा लगेगा। ऐसा ही कुछ हुआ कटघोरा (कोरबा) में, जहां बिजली की समस्या को लेकर कांग्रेस ने बिजली विभाग को एक शिकायती पत्र दिया, मगर पत्र ने एक सस्पेंस पैदा कर दिया।
पत्र में वार्ड 15 के भाजपा पार्षद अजय गर्ग का नाम और सील भी दिखाई दे रहा था। भाजपा के कार्यकर्ता यह देख दंग रह गए। सोशल मीडिया पर जैसे ही यह पत्र वायरल हुआ, चर्चा होने लगी, क्या भाजपा पार्षद को अपनी बात मनवाने के लिए कांग्रेस का सहारा लेना पड़ गया?
जब पार्टी के नेताओं ने पार्षद गर्ग से बात की, तो उन्होंने साफ किया- मैंने कांग्रेस के लैटरपैड पर कोई दस्तखत नहीं किए। तब, मामला और गरमा गया। भाजपा के पदाधिकारी पार्षद को लेकर सीधे थाने पहुंच गए और कांग्रेस नेताओं पर फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई और कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई। पुलिस कह रही है कि जांच होगी, फिर कार्रवाई होगी। उधर सवाल ये भी उठ रहा है कि कांग्रेस को भाजपा पार्षद के नाम और सील को अपने पत्र में लगाने की ज़रूरत ही क्यों पड़ी? क्या उन्हें लगा कि सत्ताधारी पार्टी के पार्षद का दस्तखत देखकर बिजली विभाग के अफसर डर जाएंगे या शिकायत को ज़्यादा गंभीरता से लेंगे? हकीकत ये है कि बिजली विभाग के अफसर इन दिनों किसी की नहीं सुन रहे। न नेता की, न अफसर की, यहां तक कि अपने एमडी की भी नहीं। कई जगहों पर एमडी साहब ने खुद बैठक लेकर मातहतों को फटकार लगाई, तबादले तक कर दिए, लेकिन बिजली की हालत जस की तस बनी रही।
कटघोरा में अब बिजली संकट का असली मुद्दा पीछे छूट गया है। अब चर्चा इस बात की हो रही है कि किसने किसके नाम से फर्जी हस्ताक्षर किए, सील कैसे लगी ? कुल मिलाकर, बिजली गुल है और सियासत की बत्ती जल रही है!
सब्जी बाजार की पहली बारिश

मौसम विभाग ने दावा किया था कि इस बार छत्तीसगढ़ में मानसून वक्त से पहले आ जाएगा, लेकिन हमेशा की तरह इस बार भी अनुमान सही नहीं निकला। जून आधा बीत चुका है और कई शहर अब भी पहली अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
ऐसे मौसम में सबसे ज्यादा दिक्कत उन लोगों को होती है जो खुले आसमान के नीचे काम करते हैं। खासकर सब्जी बेचने वाले किसान और फुटपाथ के दुकानदार। गांव से सब्जी लेकर शहर आने वालों के पास न तो पक्का चबूतरा होता है और न कोई शेड। इसलिए बारिश के दिनों में वे पहले से ही पॉलिथीन, छतरियां और बैठने के इंतजाम साथ लेकर निकलते हैं।
कल बिलासपुर में आखिरकार ठीक-ठाक बारिश हुई, और जैसे ही बूंदें गिरीं, बृहस्पति बाजार के सब्जी विक्रेता तुरंत हरकत में आ गए। रंग बिरंगी किंग साइज छतरियां खुल गईं, सब्जियों को पॉलिथीन से ढंक लिया गया और लोग भी सब्जी खरीदने के बहाने बारिश का मजा लेने निकल गए।


