राजपथ - जनपथ
(तस्वीर व विवरण-प्राण चड्ढा)
एक ही फ्रेम में दो मदारी भालू
अचानकमार टाइगर रिजर्व में मेकूं मठ के पास सडक़ पर कल शाम (11 जून को) दो भालू एक साथ नजर आए। आमतौर पर जंगल में इनका यूं एक साथ दिखना बहुत ही दुर्लभ होता है।
पहले ये दोनों भालू जंगल के भीतर मस्ती में एक-दूसरे के साथ खेलते दिखे। फिर कुछ देर बाद ये सडक़ पर आ गए। दोनों अपनी ही दुनिया में मस्त थे। कभी पंजों और दांतों से एक-दूसरे से खेलते, तो कभी दो पैरों पर खड़े हो जाते।छत्तीसगढ़ में महुआ के मौसम में भालू अक्सर जंगल से बाहर भी आ जाते हैं क्योंकि उन्हें महुआ बहुत पसंद है। अगर खतरा महसूस हो तो ये दो पैरों पर खड़े होकर हमला भी कर सकते हैं।
ये भालू ‘स्लॉथ बियर’ प्रजाति के हैं, जिसे आम भाषा में मदारी भालू भी कहा जाता है। भालुओं की दुनिया में कुल आठ प्रजातियां होती हैं और ये उन्हीं में से एक हैं। इनकी आंखों की रोशनी थोड़ी कम होती है, लेकिन शहद के बड़े शौकीन होते हैं और पेड़ों पर भी आसानी से चढ़ जाते हैं। भालू के पंजों में लंबे नाखून होते हैं, जिनसे ये दीमक की बांबी तक तोड़ डालते हैं और दीमकों को चूस जाते हैं। आमतौर पर ये शाकाहारी होते हैं, लेकिन जरूरत पडऩे पर मांसाहार भी कर लेते हैं। पहले शिकार और अब जंगल घटने की वजह से इनकी संख्या में काफी कमी आई है।
लाखों शिक्षक, कुछ सौ गलतियां

प्रदेश में स्कूलों में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ऐसे सैकड़ों स्कूल जहां शिक्षक नहीं थे वहां अतिशेष शिक्षकों की पोस्टिंग हुई। कुल मिलाकर सरकार को अपने प्रयासों में काफी हद तक सफलता मिली है। मगर युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में अनियमितता भी खूब हुई है। अब तक चार बीईओ निलंबित हो चुके हैं।
बताते हैं कि सरगुजा संभाग में तो सांसद, और भाजपा के तीन विधायक व जिला अध्यक्ष ने युक्तियुक्तकरण में अनियमितता की सीएम, और प्रदेश संगठन से की है। शिकायत में एक यह भी था कि अंबिकापुर के उदयपुर माध्यमिक शाला सलका में रामचरण सिदार नाम का कोई शिक्षक पदस्थ नहीं है। मगर युक्तियुक्तकरण में उनका नाम सोनगेसरा बगीचा जशपुर जिले में किया गया है।
इसी तरह रामदास प्रधान नाम के अंबिकापुर के घासी वार्ड के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला की युक्तियुक्तकरण के बाद पदस्थापना जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड में की गई है। खास बात यह है कि उस स्कूल में रामदास प्रधान नाम के कोई शिक्षक ही नहीं है। यही नहीं, अंबिकापुर के ओडिग़ी विकासखंड के एकल शिक्षकीय कई विद्यालय, युक्तियुक्तकरण के बाद भी एक ही शिक्षक वाले रह गए हैं। खैर, कुछ तो लिपिकीय त्रुटि की वजह से गलतियां सामने आ रही है, तो कई जगह शिक्षा अफसरों ने मिलीभगत कर गड़बडिय़ां की हैं। संभाग के ताकतवर भाजपा नेताओं की शिकायत पर जांच चल रही है। देखना है आगे क्या होता है।लाखों शिक्षक हैं, कुछ सौ ग़लतियाँ तो होनी ही थीं।
बिजली-सफाई कुछ गड़बड़
छत्तीसगढ़ बिजली सरप्लस स्टेट माना जाता है। मगर थोड़ी बारिश-आंधी तूफान में राजधानी रायपुर के पॉश इलाकों में भी बिजली गुल हो जाती है। बिजली व्यवस्था की खराब हालत पर कांग्रेस ने सरकार पर उंगलियां उठाई, तो डिप्टी सीएम अरुण साव सामने आ गए। उन्होंने सफाई दी कि बिजली की व्यवस्था कांग्रेस के समय से चरमराई हुई है। जिसे ठीक करने का काम भाजपा की सरकार कर रही है। विशेषकर बिजली, सफाई व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर भाजपा के अंदरखाने में काफी चर्चा हो रही है। सेजबहार इलाके का हाल यह है कि थोड़ी तेज हवा में ही बिजली गुल हो जाती है। बिजली अफसरों का कहना है कि समय पर मेंटेनेंस नहीं होने के कारण बार-बार बिजली गुल की समस्या आ रही है। सफाई का हाल यह है कि निगम में सत्ता परिवर्तन के बाद ठेकेदार बदले गए हैं, और फिर नए पार्षदों के साथ ठेकेदारों का तोलमोल चल रहा है। इसका सीधा असर सफाई व्यवस्था पर पड़ रहा है। निगम से जुड़े लोग जल्द ही सब-कुछ ठीक होने का दावा कर रहे हैं। देखना है आगे क्या होता है।


