राजनांदगांव

कमर्शियल सिलेंडर की बढ़ी कीमतों से लकड़ी भट्टी बना सहारा
06-May-2026 4:16 PM
कमर्शियल सिलेंडर की बढ़ी कीमतों से लकड़ी भट्टी बना सहारा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

राजनांदगांव, 6 मई। कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि ने होटल कारोबारियों को कारोबार चलाने के लिए फिक्रमंद बना दिया है।  होटल व्यवसाय जगत में लगभग एक हजार रुपए का दाम बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नाराजगी पनप रही है। बड़े होटल प्रतिष्ठानों से लेकर ठेले-खोमचे में होटल चला रहे संचालकों को अब कारोबार पर आर्थिक संकट बढऩे की चिंता सता रही है। ऐसे में रोजमर्रा से जुड़ी खानपान की वस्तुओं में भी कारोबारियों ने भी कीमत बढ़ा दी है। कीमतें बढ़ते ही ग्राहकों की मौजूदगी भी होटलों में छंट रही है। गैस सिलेंडर के दामों में वृद्धि होने से होटल व्यवसायियों की मुश्किलें बढ़ गई है।

वहीं व्यावसायिक सिलेंडर जहां पहले 1800 रुपए में मिलती थी और उसकी कीमत अब बढक़र लगभग 3200 रुपए हो गई। सिलेंडर के लिए नंबर लगाने पर लगभग 15 से 20 दिनों में मिलने से होटल संचालकों को लकड़ी भ_ी जलाने से धुएं की मार भी झेलनी पड़ रही है। इधर कुछ छोटे होटल व्यवसायी गैस सिलेंडर के दाम बढऩे से अपनी स्थिति को लेकर व्यवसाय बंद करने की नौबत को भी जाहिर किया। इधर गैस सिलेंडर की कमी के चलते घरेलू उपभोक्ताओं को भी परेशान होना पड़ रहा है। घरेलू गैस सिलेंडर उपभोक्ताओं को भी नंबर लगाने के 15 से 20 बाद सिलेंडर मिलने से हलाकान होना पड़ रहा है।

 होटल चलाने टूट रही कमर

होटल व्यवसायी अमन अग्रवाल ने कहा कि गैस के दाम बढऩे से दिक्कतें बढ़ गई है। होटल व्यवसाय  सुचारू रूप से संचालित करने के लिए चुल्हा बनाकर सामग्रियों को तैयार किया जा रहा है। भ_ी बनाकर लकड़ी जलाने से दुकान में धुंआ फैल रहा है। उन्होंने कहा कि पहले गैस आसानी से मिल जाता था, लेकिन अब तो महंगा हो गया और। पहले गैस की कीमत 2 हजार रुपए थी अब लगभग 3 हजार रुपए में मिल रहा है। मार्च में यह कीमत 114 रुपए बढ़ी, फिर 150 रुपए वृद्धि हुई। गैस सिलेंडर के दाम में बढ़ोत्तरी होने से उसकी आर्थिक कमर टूट गई है।

ग्राहकी पर पड़ रहा बुरा असर

दिलीप शंकर यादव का कहना है कि वह लगभग 30 से 35 साल से होटल का व्यवसाय कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बार गैस के दाम बढऩे से जहां उनकी आर्थिक स्थिति और ग्राहकी पर बुरा असर पड़ा है। वहीं लकड़ी चूल्हा जलाने से उसकी दुकान की हालत भी खराब हो रही है। उन्होंन कहा कि चूल्हा लकड़ी जलाने से ग्राहकी भी टूट रही है। उन्होंने सरकार से मांग करते कहा कि गैस सिलेंडर के दाम कम कर सिलेंडर का उचित बंदोबस्त कराने ठोस कदम उठाए।

लकड़ी की कीमत व परेशानी बढ़ी

खालसा होटल के संचालक हरजिंदर सिंह खालसा ने कहा कि गैस सिलेंडर के दाम जरूर बढ़ गए हैं, लेकिन गैस सिलेंडर मिल ही नहीं रहा है। लकड़ी जलाने के लिए मजबूर हो गए हैं, जो पहले तीन रुपए में लकड़ी का गुटखा मिल रहा था, अब 6 से 7 रुपए में मिल रहा है। पहले बंद किचन चलाते थे अब उसको बाहर चलाना पड़ रहा है। इससे धुंआ इतना ज्यादा होता है कि ग्राहक और लेबर भी इससे परेशान हो जाते हैं। हम लोग मुश्किल से व्यवसाय चला रहे हैं। ऐसा न हो कि कुछ दिन बाद काम-धंधा बंद करना पड़ जाए।

मजबूरी में चला रहे  पुश्तैनी धंधा

होटल व्यवसायी संजय यादव ने बताया कि उसके दादा के समय से चल रहा यह व्यवसाय तीसरी पीढ़ी सम्हाल रही है। उन्होंने कहा कि पहले कामर्शियल गैस टंंकी पहले 1900 रुपए में भराते थे, लेकिन सिलेंडर के दाम बढऩे से इसकी कीमत लगभग 3 हजार रुपए से अधिक हो गई है। दाम बढऩे से परेशानी बढ़ गई है। लकड़ी का चूल्हा बनाकर व्यवसाय करने मजबूर हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि नाश्ते के दाम बढ़ा नहीं सकते। जिससे ग्राहकी पर बुरा असर पड़ेगा। कई-कई दिन तो नाश्ता बचने से नुकसान भी उठाना पड़ता है। व्यवसाय चलाने और सिलेंडर नहीं मिलने की वजह  से लकड़ी चूल्हा बनाकर नाश्ता तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सिलेंडर के लिए नंबर लगाने के बावजूद समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। 15-20 दिन तक सिलेंडर नहीं मिलने से परेशानी बढ़ गई है।

चूल्हा जलाने से ग्राहकी पर असर

तिलोक यादव का कहना है कि सिलेंडर के दाम बढऩे और समय पर नहीं मिलने से ग्राहकी पर बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि नंबर लगाने के बाद 15 से 20 दिनों में टंकी मिलने से दुकान संचालित करने में कठिनाईयां होती है, इसलिए लकड़ी चूल्हा जलाने मजबूर हो रहे हैं। इससे दुकान में धुंआ होने से ग्राहकों की शिकायतें भी आ रही है। पहले गैस सिलेंडर से नाश्ता तैयार होने से साफ-सफाई रहती थी, लेकिन  लकड़ी चूल्हा जलाने से धुएं का असर दुकान और ग्राहकी पर पड़ रहा है।


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