राजनांदगांव

जिला अस्पताल में उल्टी-दस्त और बुखार के पीडि़त बच्चों की तादाद बढ़ी
02-May-2026 3:43 PM
जिला अस्पताल में उल्टी-दस्त और  बुखार के पीडि़त बच्चों की तादाद बढ़ी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

राजनांदगांव, 2 मई।  भीषण गर्मी के बीच शादी-ब्याह में परिजनों के साथ घूमते और स्वीमिंग सीखते कम उम्र के बच्चें बीमार हो रहे है। तेज धूप और गर्म हवाओं के जद में आने से मासूमों की तबीयत बिगडऩे की शिकायतों में इजाफा हुआ है। गर्म स्थानों पर सैर-सपाटे करने से बच्चों की सेहत खराब हो रही है।

चिकित्सकों की ओर से लोगों को हल्के और छोटे बच्चों को घर में रखने की परिजनों को सलाह दी जा रही है। लेकिन वैवाहिक कार्यक्रमों में शामिल होने की होड़ में परिजन बच्चों की सेहत की परवाह नहीं कर रहे है।  मिली जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में रोजाना उल्टी-दस्त, बुखार के साथ अति ज्वर से पीडि़त बच्चें उपचार के लिए पहुंच रहे है। मौसम की मार से पीडि़त बच्चों का उपचार कराने के लिए परिजनों की सुबह अस्पताल में भीड़ उमड़ रही है।  बताया जाता है कि शादी और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में  खानपान में लापरवाही के साथ गर्मी से बचने के उपाय को नजरअंदाज किया जा रहा है। तपती दोपहरी में बच्चों को बस और ट्रेनों में ले जाने से भी तबीयत बिगड़ रही है। जिला अस्पताल में रोजाना 10 से ज्याद बच्चें लू और धूप के प्रभाव से बीमार होकर अस्पताल में उपचार के लिए पहुंच रहे है। सरकारी अस्पताल में अलावा निजी अस्पतालों में भी गर्मी से बीमार बच्चों की भीड़ नजर आ रही है। ज्यादातर बच्चें शादियोंं में खाने की वजह से उल्टी-दस्त का शिकार हो रहे है। इसके साथ ही धूप से भी बच्चें अति ज्वर का शिकार हो रहे है।

बताया जाता है कि बाहरी तापमान के अधिक होने से बच्चों की शारीरिक स्थिति बिगड़ रही है। गर्मी से बचने के साथ-साथ घरों में बच्चों को रहने चिकित्सक जोर दे रहे है। मौसमी बीमारी की मार झेल रहे बच्चों की स्थिति पर परिजन मानसिक तनाव से गुजर रहे है। 

गर्म वातावरण में जाने से बचने और ताजा भोजन दें- डॉ.  खंंूटे

जिला चिकित्सालय की वरिष्ठ शिशु रोग चिकित्सक माधुरी खूंटे ने भीषण गर्मी में बच्चों पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते कहा कि वैवाहिक कार्यक्रमों में कम उम्र के बच्चों को ले जाने से बचना चाहिए। इसके अलावा गर्मी में सैर-सपाटे को भी नजरअंदाज करना चाहिए। डॉ. खूंटे के मुताबिक रसीले फल और ताजा भोजन करना भी जरूरी है। धूप से बचने के साथ-साथ बच्चों को घरों में रखने पर भी परिजनों को ध्यान देना जरूरी है। 


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