राजनांदगांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 2 मई। हज यात्रा पर जाने वाले जायरीनों के लिए इस बार सफर की शुरुआत ही मुश्किलों भरी हो रही है। हज कमेटी द्वारा पूरा पैकेज शुल्क पहले ही जमा कराए जाने के बाद अब अचानक एयरफेयर डिफरेंस (हवाई किराए में अंतर) के नाम पर प्रति हाजी 10 हजार रुपये अतिरिक्त मांगे जा रहे हैं। अचानक आए इस आदेश से हाजियों में भारी नाराजगी है। मामला अब राजनीतिक रूप भी लेने लगा है, जिसमें सरकार और हज कमेटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
हज कमेटी ने इस अतिरिक्त वसूली के पीछे मध्य पूर्व की वर्तमान परिस्थितियों और हवाई परिचालन की लागत बढऩे का हवाला दिया है। लेकिन हाजियों का कहना है कि जब एक बार अनुबंध और शुल्क की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो यात्रा के ऐन वक्त पर बजट बिगाडऩा अनुचित है। कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राजस्थान-ओडिशा प्रदेश प्रभारी अब्दुल कलाम खान ने इस फैसले को जायरीनों के साथ अन्याय करार दिया है। उन्होंने कहा कि हज पर जाने वाले अधिकांश लोग मध्यम या सीमित आय वर्ग के होते हैं। वे वर्षों तक अपनी मेहनत की कमाई जोडक़र इस सफर पर निकलते हैं। ऐसे में 10 हजार रुपये का अतिरिक्त भार उनके लिए परेशानी खड़ी कर रहा है।
उन्होंने 3 बड़े सवाल उठाये है, जिसमें उन्होंने कहा कि जब शुल्क पहले ही तय हो चुका थाए तो अब बदलाव क्यों? क्या हज कमेटी के पास भविष्य के जोखिमों के लिए कोई बैकअप प्लान नहीं था? क्या सरकार आम हाजियों को राहत देने के बजाय उन पर बोझ डालना चाहती है? श्री खान ने मांग की है कि अतिरिक्त शुल्क के निर्णय को तत्काल वापस लिया जाए। यात्रियों को इस विशेष शुल्क से राहत या छूट दी जाए। भविष्य के लिए ऐसी नीति बने कि यात्रियों को अंतिम समय में आर्थिक झटका न लगे। कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय कॉअर्डिनेटर राजस्थान-ओडिशा प्रदेश प्रभारी अब्दुल कलाम खान ने कहा कि हज एक पवित्र इबादत है, इसे आर्थिक बोझ में तब्दील नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को इस संवेदनशील मामले में हस्तक्षेप कर हाजियों को राहत देनी चाहिए।


