राजनांदगांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 7 फरवरी। छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी प्रांतीय प्रमुख महामंत्री सतीश ब्यौहरे, जिला संरक्षक मुकुल साव, जिला अध्यक्ष आर झाड़े, पीएल साहू, जितेन्द्र बघेल, सीएल चंद्रवंशी, वीरेन्द्र कुमार रंगारी, बृजभान सिन्हा, पुष्पेन्द्र साहू, शिरिष कुमार पांडे, हेमंत पांडे, उत्तम डड़सेना, अब्दुल कलीम खान, सुधांशु सिंह, सोहन निषाद, संजीव मिश्रा, संगीता ब्यौहरे, नीलू झाड़े, सीमा तरार, स्वाति वर्मा, अनिल साहू एवं शीतल कुमार टंडन ने छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री से किया है।
फेडरेशन ने मुख्य रूप से अनुभवी शिक्षकों की कमी को पूरा करने, शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने और यूजीसी के नियमों के अनुरूप समानता लाने यह मांग किया है। फेडरेशन का कहना है कि यदि यह निर्णय लिया जाता है तो इससे अनुभवी शिक्षकों के ज्ञान का लाभ एलिमेंटरी एजुकेशन, माध्यमिक शिक्षा सहित हाई व हायर सेकंडरी शिक्षा व्यवस्था को लंबे समय तक मिलेगा। उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने से अनुभवी विषय शिक्षकों की कमी को पूरा करने सहायक होगा।
राज्य के स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों के रिक्त पदों की कमी को अनुभवी शिक्षकों की सेवानिवृत्ति अवधि बढ़ाकर दूर किया जा सकता है। साथ ही वरिष्ठ शिक्षकों के दशकों के अनुभव और रचनात्मकता का लाभ विद्यार्थियों को लंबे समय तक मिलेगा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार और यूजीसी द्वारा कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष निर्धारित किया गया है, जिसे स्कूल शिक्षा विभाग में भी लागू करने की आवश्यकता है। इससे बुनियादी शिक्षा मजबूत होगा।
उन्होंने बताया अनेक शिक्षक ऐसे हैं, जिनका सेवाकाल 33 वर्ष पूरा नहीं हो रहा है कि 1 जुलाई 2018 से संविलियन तिथि से समस्त सेवा लाभ के लिए गणना करने के आदेश से कई शिक्षक सेवानिवृत्ति के समय न्यूनतम पेंशन की पात्रता से भी वंचित हो रहे हैं, लेकिन सेवानिवृत्ति आयु बढऩे से वे इस लाभ के पात्र हो सकते हैं। एनपीएस एवं ओपीएस के चक्रव्यूह में अनेक शिक्षक उलझे हुए हैं।


