राजनांदगांव
अमृत योजना में भ्रष्टाचार का आरोप, जांच से भाग रहा शासन-प्रशासन
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 16 जनवरी। शहर में करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद आज भी आम जनता पानी की समस्या से जूझ रही है। अमृत योजना के तहत किए गए कार्यों पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व नगर पालिका चेयरमैन अशोक फडऩवीस ने योजना में भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते शासन-प्रशासन की चुप्पी को संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया है।
श्री फडऩवीस ने अमृत योजना को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 230 करोड़ रुपए खर्च किए जाने के बाद भी शहर को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा। जिससे यह साफ है कि योजना जमीन पर नहीं, सिर्फ कागजों में पूरी की गई है। श्री फडऩवीस के अनुसार अमृत योजना की पाईप लाइन निर्धारित गहराई और तय गड्ढों में नहीं बिछाई गई, बावजूद इसके बिना किसी तकनीकी जांच के करोड़ों रुपए का भुगतान कर दिया गया।
उन्होंने दावा किया कि कई किलोमीटर पाईप लाइन डाली ही नहीं गई, फिर भी उसका पूरा भुगतान कर दिया गया, जो सीधे-सीधे भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि पुरानी मुख्य पाईप लाइन से अमृत योजना की पाईप लाइन को जोडक़र दिखावटी सफाई की गई, ताकि असलियत सामने न आए। जनप्रतिनिधियों को तकनीकी अधिकारियों द्वारा गुमराह किया गया और चार इंच की पाईप से शहर की प्यास बुझाने और लंबे समय तक जलापूर्ति का संकल्प पास करा लिया गया। जबकि तकनीकी रूप से यह संभव ही नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस योजना से शहर को कितना लाभ होगा और ठेकेदारों व अधिकारियों को कितना फायदा पहुंचेगा इसका पूरा हिसाब पहले ही तय कर लिया गया था। यह टॉप टू बॉटम मिलीभगत का मामला है जिसमें ठेकेदार, तकनीकी अधिकारी और जिम्मेदार अफसर शामिल हैं। इसी वजह से आज तक न तो जांच हो रही है और न ही कोई कार्रवाई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह खेल सिर्फ राजनांदगांव तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में इसी तरह जनता के हितों की अनदेखी कर भ्रष्टाचार किया गया है। हाई-प्रोफाइल क्षेत्र होने के बावजूद जहां पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष का सीधा प्रभाव है, वहां भी जनता पानी की समस्या से जूझ रही है, लेकिन स्थानीय विधायक डॉ. रमन सिंह की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।


