राजनांदगांव

दान की जमीन में बनी धर्मशाला से 20 साल से कमाए करोड़ों
11-Oct-2025 3:34 PM
दान की जमीन में बनी धर्मशाला से 20 साल से कमाए करोड़ों

 निजी तौर पर धर्मशाला में कब्जा कर स्कूल का संचालन

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

राजनांदगांव, 11 अक्टूबर। शहर के मध्य स्थित पुराना जिला अस्पताल को बंद हुए सालों हो गए।

अस्पताल के संचालन के लिए शहर के एक परिवार ने  मरीजों के लिए धर्मशाला बनाने के लिए एक जमीन दान में दी थी। जमीन में धर्मशाला बनने से रोगियों को  फायदा तो नहीं हुआ, लेकिन निजी तौर पर कतिपय लोगों ने इसके जरिये करोड़ों रुपए वसूल डाले। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। पुराना जिला अस्पताल (वर्तमान में सीएमएचओ कार्यालय) के सामने स्थित जेठीबाई धर्मशाला में पिछले दो दशक से एक स्कूल का संचालन किया जा रहा है। किराये के रूप में करोड़ों रुपए अब तक की वसूला गया है। अब सीएमएचओ ने मामले की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया है।

मिली जानकारी के मुताबिक जेठीबाई धर्मशाला का निर्माण जिला अस्पताल के रोगियों के लिए कराया गया था। उपचारार्थ भर्ती मरीजों के परिजनों को सुलभ एवं सस्ते दाम पर धर्मशाला में ठहरने की व्यवस्था थी। पुराना अस्पताल के संचालन तक धर्मशाला ठीकठाक स्थिति में रहा। जैसे ही नए जिला अस्पताल अस्तित्व में आया, उसके बाद से धर्मशाला को व्यापारिक उद्देश्य से किराये में दिया गया। जेठीबाई धर्मशाला के मूल काम को पूरी तरह से व्यवसायिक कर दिया गया है। हर महीने धर्मशाला स्थित दुकानों से हजारों रुपए किराये के तौर पर लिए जा रहे हैं। अब तक किराये की रकम करोड़ों रुपए तक पहुंच गई।  जिला प्रशासन के सामने भी यह बात अब सामने आई है। धर्मशाला में 5 दुकानें किराये पर चल रही है। वहीं एक स्कूल का भी संचालन हो रहा है। ऐसे में दान की जमीन में तैयार धर्मशाला को तथाकथित लोगों ने कमाई का माध्यम बना लिया है।  इस संबंध में सीएमएचओ डॉ. नेतराम नवरतन ने ‘छत्तीसगढ़’ से कहा कि  संबंधित लोगों को इस संबंध में नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर किराया वसूला जा रहा है तो यह गलत है। धर्मशाला का व्यवसायिककरण नहंी किया जा सकता ।

बताया जा रहा है कि धर्मशाला में लंबे समय से स्कूल संचालन कर नियमों को भी ताक में रखा गया है। स्कूल संचालन को लेकर प्रशासन ने भी ठोस कार्रवाई नहीं की है। बताया जा रहा है कि राजनीतिक प्रभाव जमाकर कतिपय लोग निजी हित को पूरा कर रहे हैं।


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