राजनांदगांव
सिख समाज ने परंपरागत रूप से मनाई जयंती
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 28 नवंबर। गुरूनानक जयंती पर शबद कीर्तन की गूंज रही। परंपरागत रूप से समाज ने जयंती मनाते शांतिदूतक व सिख समाज के प्रथम गुरू गुरूनानक जी के सिद्धांतों को आत्मसात कर व्यवहारिक जीवन में उतारने का संकल्प लिया।
जयंती को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया गया। स्थानीय गुरूद्वारे में रागी जत्थे ने धार्मिक गीतों की प्रस्तुति दी। गुरूग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेककर समाज ने अपनी खुशहाली की कामना की। जयंती के अवसर पर लंगर का भी आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में प्रसादी के रूप में समाज व गैर समाज के लोग लंगर में शामिल हुए। इससे पहले सिख समाज के प्रथम गुरूनानकजी के प्रकश पर्व पर सिख समाज द्वारा शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें पंज-प्यारो की अगुवाई में गुरू ग्रंथ साहिब की शोभायात्रा निकाली गई।
गुरूद्वारा परिसर से निकली शोभायात्रा में कलाकारों ने बैंड-बाजे से अपनी प्रतिभा का जौहर दिखाया। वहीं समाज की बहनों व बच्चों ने भी आत्मरक्षा के गुर का प्रदर्शन किया। कलाकारों ने अखाड़ा खेलते भौंरा सहित कई करतब दिखाते शोभायात्रा को आकर्षक बनाया। शोभायात्रा का शहर के विभिन्न मार्गों में भव्य स्वागत किया गया। शोभायात्रा मानव मंदिर चौक, सिनेमा लाईन, गंज लाईन, पुराना बस स्टैंड, जीई रोड़, भगत सिंह चौक से होते हुए शाम को गुरूद्वारा साहेब पहुंचकर संपन्न हुई। गुरूद्वारा में जत्थे का शबद कीर्तन हुआ। इसके बाद अरदास, सुखासन व गुरू का लंगर का आयोजन हुआ। इससे पूर्व शोभायात्रा का शहर के अलग-अलग स्थानों में सामाजिकजनों के अलावा गैर सामाजिक लोगों ने फूलमालाओं से स्वागत किया।
पंज-प्यारो की अगुवाई में शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा का सभी वर्ग के लोगों ने जगह-जगह स्वागत किया। समाज की महिलाओं ने सफाई करते हुए पंज प्यारों पर फूलों की बारिश की। शहर के मुख्य मार्गों से निकली शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिला, पुरूष एवं युवा वर्ग के सामाजिक लोग मौजूद थे।


