रायपुर
एक साल बाद के लिए सराफा की नई स्कीम
-टिकेश कुमार यादव
रायपुर, 20 मई। अंतररा ष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरती कीमत को लेकर देशवासियों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील के बाद सराफा व्यापारियों ने अगले एक साल के लिए तैयारी कर ली है। कई व्यापारियों में ग्राहकों के लिए स्कीम चलाई है। ताकि इस महंगाई में सोना-चांदी और जेवर खरीदने के लिए ग्राहकों पर ज्यादा बोझ न हो।
इस स्कीम से ग्राहकों को जमा की गई रकम में एक माह का अतिरिक्त लाभ मिल रहा है। वहीं प्रदेशभर के सराफा बाजार मंहगाई का असर देखने को मिल रहा है। कारोबारियों का कहना है कि बाजार पूरी तरह ठप नहीं हुआ है, लेकिन खरीदारी के तरीके और मात्रा में बदलाव जरूर आया है।
राजधानी रायपुर के सराफा कारोबारियों ने इस मुद्दे पर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ व्यापारियों ने इसे लोगों की आर्थिक जागरूकता से जोड़ा, तो कुछ ने माना कि सोना आज भी लोगों के लिए सबसे भरोसेमंद निवेश बना हुआ है।
सिल्वर होलसेल अध्यक्ष अभय कोठारी ने बताया कि सोना-चांदी के बाजार में बड़ी गिरावट जैसी स्थिति नहीं है। लोग अभी भी अपनी जरूरत और क्षमता के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं। उनके मुताबिक वर्तमान समय में लोग सोना और चांदी को केवल आभूषण नहीं, बल्कि सुरक्षित एसेट और भविष्य के निवेश के रूप में देख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से सोना और चांदी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसके कारण लोगों को यह भरोसा है कि आज खरीदा गया सोना भविष्य में बेहतर दाम देगा। यही वजह है कि निवेश के उद्देश्य से खरीदारी पूरी तरह बंद नहीं हुई है। सुमित ज्वेलर्स के संचालक अशोक कांकरिया ने बताया कि फिलहाल शादी-ब्याह और त्योहारों का सीजन नहीं होने से बाजार पहले से ही सामान्य था। ऐसे में प्रधानमंत्री की अपील के बाद पिछले एक सप्ताह के दौरान सोना-चांदी की खरीदारी में कुछ कमी देखने को मिली है।
सराफा कारोबारियों का यह भी कहना है कि बाजार का दायरा पहले जैसा ही है, लेकिन ग्राहकों की पसंद और खरीदारी के पैटर्न में बदलाव आया है। पहले जहां ग्राहक एक तोला या उससे अधिक वजन के गहने खरीदते थे, वहीं अब हल्के और कम वजन वाले आभूषणों की मांग बढ़ी है। महंगाई और बढ़ती कीमतों के कारण लोग बजट के अनुसार छोटे डिजाइन और हल्के गहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
संस्कृति अलंकार ज्वेलर्स के संचालक ने प्रधानमंत्री की अपील को देशहित में बताया। उन्होंने कहा कि लोगों में जागरूकता बढ़ी है और कई ग्राहक फिलहाल बड़ी खरीदारी से बच रहे हैं। इसके बावजूद जरूरतमंद और निवेश करने वाले ग्राहक अब भी महंगी ज्वेलरी खरीद रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ग्राहकी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। फर्क सिर्फ इतना आया है कि ग्राहकों की पसंद और खरीदारी का तरीका बदल गया है। पहले लोग भारी गहनों को प्राथमिकता देते थे, जबकि अब कम वजन और आकर्षक डिजाइन वाले आभूषण ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं।
बदलता ट्रेंड, कम वजन के गहनों की मांग बढ़ी
सराफा कारोबारियों के अनुसार बदलते आर्थिक हालात और महंगाई के कारण ज्वेलरी उद्योग भी तेजी से नए ट्रेंड के अनुसार खुद को ढाल रहा है। बाजार में हल्के वजन वाले गहनों, मॉडर्न डिजाइन और दैनिक उपयोग में आने वाली ज्वेलरी की मांग बढ़ रही है।
जमा योजना स्कीम से मध्यमवर्गी परिवारों को राहत
ग्राहकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम करने के लिए कई दुकानों में मासिक जमा योजनाएं शुरू की गई हैं। इस स्किम से मध्यमवर्गी परिवार के लोगों में शादी के लिए गहने खरीदा आसान हो गया है। उन्हें एक मुस्त राशि देना नहीं पड़ता। इन योजनाओं से ग्राहक हर महीने एक निश्चित राशि जमा करते हैं और तय अवधि पूरी होने पर उन्हें एक माह की अतिरिक्त राशि का लाभ दिया जाता है। बाद में जमा रकम को जेवर खरीदने में समायोजित किया जाता है।
सराफा कारोबारियों का कहना है कि आने वाले महीनों में सोना-चांदी की कीमतों में और वृद्धि होती है तो बाजार में खरीदारी में फर्क पड़ेगा। हालांकि त्योहार और शादी का सीजन शुरू होने के बाद बाजार में फिर से रौनक लौटने की उम्मीद जताई जा रही है।


