रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 19 मई। रविशंकर विश्वविद्यालय (पीआरएसयू) के मानवविज्ञान अध्ययनशाला में अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।
प्रथम सत्र में छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद, बीआईडीआरसी के अध्यक्ष राहुल कुमार सिंह ने संग्रहालय और हमारा वैश्विक परिप्रेक्ष्य विषय पर कहा कि संग्रहालय केवल वस्तुओं को संजोने के स्थान नहीं होते, बल्कि वे विभिन्न देशों और संस्कृतियों के बीच संवाद स्थापित करते हैं। जब कोई व्यक्ति किसी अन्य देश की सांस्कृतिक विरासत को देखता है, तो उसके भीतर उस संस्कृति के प्रति सम्मान और आत्मीयता की भावना विकसित होती है। यही भावना मानवता को एकसूत्र में पिरोने का काम करती है।
द्वितीय सत्र में प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. रमेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि छत्तीसगढ़ और मध्य भारत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध क्षेत्र हैं, लेकिन संरक्षण के अभाव में अनेक महत्वपूर्ण धरोहरें नष्ट होने के कगार पर हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व आईएएस डॉ. सुशील त्रिवेदी ने कहा कि संग्रहालय शब्द की तुलना में म्यूजियम शब्द अधिक व्यापक अर्थ रखता है। संग्रहालय हमें यह याद दिलाते हैं कि मानव इतिहास, संस्कृति, पीड़ा और संघर्ष मूलत साझा हैं। कार्यशाला के संयोजक एवं मानवविज्ञान अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष प्रो. जितेंद्र कुमार प्रेमी ने स्वागत उद्बोधन दिया । उन्होंने कहा कि संग्रहालय अतीत को संरक्षित करने के साथ-साथ भविष्य के लिए शांति, सहअस्तित्व और सतत विकास का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं। कार्यक्रम के अंत में अतिथि व्याख्याता डॉ. तुलसी रानी ठाकरे ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी और संस्कृति एवं इतिहास में रुचि रखने वाले लोग उपस्थित रहे।


