रायपुर
खाद संकट, नई कृषि नीतियों और किसानों पर बढ़ता आर्थिक बोझ, चिंतनीय है -आप
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 15 मई। प्रदेश में आगामी खरीफ सीजन में खेती किसानी से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप नेताओं ने कहा कि यह गंभीर विषय है की प्रदेशभर में उभर रहे खाद संकट, नई पंजीयन व्यवस्था, नैनो खाद की अनिवार्यता तथा किसानों पर बढ़ता आर्थिक दबाव चिंतनीय है ।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष (कर्मचारी विंग)विजय झा, प्रदेश प्रवक्ता जयदीप खनूजा, प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ़ और शिव शर्मा ने कहा कि खरीफ सीजन की तैयारी में जुटे किसानों के लिए खाद वितरण व्यवस्था में किए गए बदलावों ने परेशानियां बढ़ा दी हैं।
किसानों को अब खाद लेने के लिए पंजीयन, टोकन और राजस्व कार्यालयों की प्रक्रियाओं में उलझाया जा रहा है। कई सहकारी समितियों में डीएपी, यूरिया और अन्य आवश्यक उर्वरकों की कमी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा किसानों को कम से कम खाद मिले इसके लिए षड्यंत्र किया जा रहा है। एक तरफ 60:40 की अनुपात को बदलकर 70:30 का अनुपात करना यानि कि उर्वरक 30 प्रतिशत और नगद राशि 70 प्रतिशत समितियों से किसानों को मिलेगी जबकि पूर्व में 60प्रतिशत नगद राशि और 40 प्रतिशत उर्वरक मिलती थी इस प्रकार समितियों से 10प्रतिशत कम खाद प्राप्त होगी और बाकी के लिए निजी खाद व्यापारियों से अधिक दाम पर खऱीदने को मजबूर होना पड़ेगा। इन्हीं मुद्दों पर पार्टी ने केन्द्र और राज्य सरकार दोनों से जवाब मांगा है।
प्रमुख मांगे-
किसानों को समय पर डीएपी, यूरिया एवं अन्य उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो।
खाद वितरण में लागू नई पंजीयन एवं टोकन व्यवस्था समाप्त की जाये।
प्रति एकड़ खाद की मात्रा में की गई कटौती वापिस लिया जाये।
नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी की अनिवार्यता पर पुनर्विचार हो।
जैविक खेती लागू करने से पहले किसानों के लिए विशेष आर्थिक सहायता पैकेज दिया जाये। किसानों पर बढ़ते कर्ज और उत्पादन घटने की आशंका पर सरकार की जवाबदेही तय हो। सहकारी समितियों में खाद वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और सरल बनाया जाये।


