रायपुर

छत्तीसगढ़ में मादक पदार्थों को रोकने डाक, कूरियर एजेंसियों पर रहेगी नजर
05-May-2026 6:33 PM
  छत्तीसगढ़ में मादक पदार्थों को रोकने डाक, कूरियर एजेंसियों पर रहेगी नजर

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 5 मई। छत्तीसगढ़ में मादक पदार्थों को रोकने के लिए गठित राज्य स्तरीय समन्वय समिति की बैठक में शिक्षण संस्थानों को ड्रग फ्री जोन बनाने का दायरा 5 गुना बढ़ाकर किया 500 मीटर कर दिया गया है। यानी अब स्कूल कालेज से 500 मीटर तक किराना दुकान, होटल के पास पान ठेला संचालकों और तंबाकू नहीं  बेच सकेंगे।

राज्य स्तरीय समन्वय समिति  की बैठक में मुख्य सचिव विकासशील ने राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी और नशाखोरी के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए अधिकारियों को सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अफीम की अवैध खेती और ड्रग्स के कारोबार में संलिप्त व्यक्तियों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। सोमवार को मंत्रालय  में आयोजित  समिति  की दूसरी तिमाही की बैठक में उन्होंने विभिन्न एजेंसियों द्वारा की गई कार्यवाही की विस्तृत समीक्षा की।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए पुलिस, डाक विभाग और निजी कूरियर सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने परिवहन और कूरियर सेवाओं पर कड़ी निगरानी रखने तथा तस्करी में उपयोग किए जाने वाले वाहनों को राजसात कर उनकी नीलामी करने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा। साथ ही, अवैध रूप से संचालित केमिकल ड्रग प्रयोगशालाओं की पहचान कर उनके विरुद्ध तत्काल छापेमारी और निरीक्षण के निर्देश दिए गए।

बैठक में युवाओं को नशे से सभी शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को ड्रग मुक्त क्षेत्र घोषित कर वहां सघन चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने जब्त किए गए मादक पदार्थों के विनिष्टीकरण  की प्रक्रिया को भी तेज करने को कहा।

शील ने कहा कि नए नियम का कड़ाई से पालन कराया जाए तो कई इलाके ही ड्रग फ्री जोन बन जाएंगे।

इस बैठक में नशाखोरी से प्रभावित व्यक्तियों के उपचार हेतु मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया कि प्रदेश के प्रत्येक जिला अस्पताल में न्यूनतम 10 बिस्तरों वाला नशा मुक्ति केंद्र अनिवार्य रूप से स्थापित किया जाए। आवश्यकतानुसार जिलों में नए नशा मुक्ति केंद्रों का संचालन शुरू किया जाए। नशामुक्त भारत अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। पुनर्वास और सहायता हेतु जारी टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर (1333) का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित हो।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में डीजीपी अरुण देव गौतम, एसीएस गृह मनोज कुमार पिंगुआ, गृह सचिव नेहा चम्पावत सहित समाज कल्याण, आबकारी, स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारी, सभी संभागायुक्त, कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक सम्मिलित हुए।


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