रायपुर
28 हजार शामिल हुए, एक भी नकल प्रकरण नहीं
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 3 मई। राष्ट्रीय साधन सह-प्रावीण्य छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएसई) 2025-26 की परीक्षा हुई। प्रथम पाली में बौद्धिक योग्यता परीक्षण एवं द्वितीय पाली में शैक्षिक योग्यता परीक्षण प्रश्नपत्र हुए। नोडल अधिकारी डॉ.प्रदीप कुमार साहू ने बताया कि इस वर्ष छत्तीसढ़ राज्य को 2246 कोटा आबंटित है । कुल 132 परीक्षा केन्द्रों में कुल 31810 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। परीक्षा में 28570 उपस्थित एवं 3240 अनुपस्थित रहे। परीक्षा में शासकीय, शासकीय अनुदान प्राप्त, स्थानीय निकाय के स्कूल में कक्षा 8वीं के वे विद्यार्थी जो पिछली कक्षा 7वीं में न्यूनतम 55 प्रतिशत ;एससी-एसटी हेतु 5 प्रतिशत छूट अंक के साथ उत्तीर्ण हुए हों, साथ ही विद्यार्थी के माता-पिता अथवा पालक की सभी सोत्रों से वार्षिक आय 3.50 लाख रूपये से अधिक ना हो ऐसे परीक्षार्थियों का परीक्षा के माध्यम से चयनित होने पर भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय द्वारा कक्षा 9वीं से 12वीं तक प्रतिमाह 01 हजार रूपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।
डू कर्मा फाउंडेशन, सौ से अधिक पेशेवर युवा सरकारी स्कूलों के बच्चों को कर रहे तैयार
रायपुर, 3 मई। डू कर्मा वेलफेयर फाउंडेशन के माध्यम से शुरू हुई इस पहल में शहर के 100 से अधिक युवा और पेशेवर स्वेच्छा से जुडक़र सरकारी स्कूलों के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। यह केवल पढ़ाई तक सीमित प्रयास नहीं , बल्कि एक ऐसी सोच है जिसमें युवा खुद आगे आकर समाज में बदलाव की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। गुढिय़ारी , मोवा , कटोरा तालाब और भाठागांव जैसे क्षेत्रों के 20 सरकारी स्कूलों में चल रही इन कक्षाओं में कक्षा 8 वीं के सैकड़ों बच्चे नियमित रूप से शामिल हो रहे हैं। यहां उन्हें रीजनिंग, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों की तैयारी कराई जाती है। साथ ही उन्हें आगे बढऩे के लिए आत्मविश्वास सभी दिया जाता है। पिछले कुछ महीनों में इन बच्चों के लिए ‘राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति ’ परीक्षा से जुड़ी विशेष कक्षाएं भी आयोजित की गईं। जो शनिवार को हुई।
इन कक्षाओं के पीछे की खास बात यह है कि यहां पढ़ाने वाले शिक्षक किसी संस्था के कर्मचारी नहीं , बल्कि वही युवा हैं जो दिन में अपने-अपने पेशे में व्यस्त रहते हैं और फिर समय निकालकर बच्चों के बीच पहुंचते हैं। उनके लिए यह सिर्फ पढ़ाना नहीं , बल्कि किसी बच्चे के भविष्य को दिशा देने का एक माध्यम है। संस्था के संस्थापक, सॉफ्टवेयर इंजीनियर शुभम चौधरी कहते हैं, हमने देखा कि थोड़े से मार्गदर्शन से बच्चों में कितना बड़ा बदलाव आ सकता है। यही सोच हमें प्रेरित करती है। इन कक्षाओं का प्रबंधन संभा ल रहीं आकांक्षा शुक्ला बताती हैं, जब आप बच्चों के साथ समय बिताते हैं, तो महसूस होता है कि वे सीखने के लिए कितने उत्सुक हैं। बस उन्हें किसी के साथ खड़े होने की जरूरत होती है। अगर और लोग आगे आएं, तो हम इस प्रयास को और बड़े स्तर पर ले जा सकते हैं और ज्यादा बच्चों तक पहुंच सकते हैं।
यह पहल केवल कुछ महीनों की गतिविधि नहीं , बल्कि रा शयपुर में एक ऐसी सोच को जन्म दे रही है जिसमें युवा खुद आगे बढक़र समाज के लिए काम कर रहे हैं। संस्था अपने ‘लेट्स डो नेट’ अभियान के माध्यम से लोगों को जोड़ रही है। ताकि और अधिक लोग इस बदलाव का हिस्सा बन सकें। आज ये कक्षाएं सिर्फ पढ़ाई का स्थान नहीं , बल्कि उन बच्चों के लिए एक नई शुरुआत है।


