रायपुर

सतनामी समाज,कफन प्रथा और मृत्यु भोज पर पूर्ण प्रतिबंध
03-May-2026 6:21 PM
सतनामी समाज,कफन प्रथा और मृत्यु भोज पर पूर्ण प्रतिबंध

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 3 मई। प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के एकदिवसीय सम्मेलन में  सामाजिक सुधार को लेकर ऐतिहासिक निर्णय लिए गए।   इसमें कफन प्रथा और मृत्यु भोज पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने सहित 15 महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। साथ ही गुरु घासीदास जयंती हर वर्ष 18 दिसंबर को ही मनाने का निर्णय भी लिया गया।

विमतरा सभा हाल में आयोजित इस सम्मेलन की शुरुआत बाबा गुरु घासीदास के छायाचित्र पर पूजा-अर्चना के साथ हुई।

प्रदेश अध्यक्ष एल.एल. कोसले ने समाज में एकीकरण, समन्वय और सामाजिक रीति-रिवाजों में समयानुकूल सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए 15 बिंदुओं का प्रस्ताव रखा। इन प्रस्तावों में जन्म, विवाह और मृत्यु संस्कारों में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने, सामाजिक कार्यक्रमों में सादगी लाने और एकजुटता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि मृत्यु के अवसर पर कफन केवल परिवारजन ही देंगे, जबकि अन्य लोगों द्वारा कफन देने की परंपरा पर रोक रहेगी। इसी तरह मृत्यु भोज पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा, हालांकि सामर्थ्य अनुसार सादा भोजन कराया जा सकेगा। इसके अलावा सामाजिक कार्यक्रमों में नशापान और तामसिक भोजन पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया।

गुरु घासीदास जयंती 18 दिसंबर को ही मनाने, सामाजिक कार्यक्रमों में पारंपरिक भजन-कीर्तन को बढ़ावा देने तथा फिजूल खर्ची पर रोक लगाने पर भी सहमति बनी।

विवाह और सगाई में सीमित संख्या में लोगों की उपस्थिति, आदर्श विवाह को प्रोत्साहन और सामाजिक विवादों का समाधान समाज स्तर पर करने जैसे निर्णय भी लिए गए।


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