रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 21 फरवरी। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने कहा है कि 23 फरवरी से प्रारंभ हो रहे विधानसभा बजट सत्र में राज्य सरकार पेंशनरों की वर्षों से लंबित मांगों पर न्यायोचित एवं ठोस निर्णय ले। उन्होंने कहा कि पेंशनर वर्ग ने राज्य के निर्माण और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, अत: अब उनके अधिकारों की अनदेखी उचित नहीं है।
प्रांताध्यक्ष श्री नामदेव ने मांग की है कि पेंशनरों को केंद्र के समान 3त्न महंगाई राहत (डीआर) देय तिथि जुलाई 2025 से एरियर सहित स्वीकृत की जाए। साथ ही, स्ह्वश्चह्म्द्गद्वद्ग ष्टशह्वह्म्ह्ल शद्घ ढ्ढठ्ठस्रद्बड्ड द्वारा बंगाल प्रकरण में दिए गए निर्णय को संज्ञान में लेते हुए 81 माह के लंबित महंगाई राहत एरियर का भुगतान शीघ्र किया जाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49 (6) के तहत राज्य को हुए लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान की भरपाई के संबंध में स्पष्ट कार्ययोजना प्रस्तुत की जाए तथा इस मामले में हुई लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रांताध्यक्ष ने पेंशनरों की अन्य प्रमुख मांगों को भी बजट में शामिल करने की अपेक्षा जताई, जिनमें—
सभी जिलों में पृथक पेंशन कार्यालय की स्थापना।
परिवहन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 30 सितंबर 2021 के अनुसार वरिष्ठ नागरिकों को छत्तीसगढ़ राज्य के भीतर बस यात्रा किराया में छूट संबंधी आदेश का प्रभावी क्रियान्वयन।
मंत्रालय सहित सभी शासकीय एवं सार्वजनिक संस्थानों में पेंशनरों के लिए विशेष सुविधा काउंटर की व्यवस्था।
पेंशनर कल्याण निधि के बजट में पर्याप्त वृद्धि। वरिष्ठ नागरिक कल्याण आयोग की स्थापना। प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सेट) की पुनर्स्थापना कर त्वरित न्याय सुनिश्चित करना।
श्री नामदेव ने जानकारी दी कि इन मांगों के संबंध में वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी को विस्तृत ज्ञापन ई-मेल के माध्यम से प्रेषित किया गया है। साथ ही, मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से भी पेंशनरों की मांगों पर त्वरित निर्णय लेने का आग्रह किया गया है।
उन्होंने कहा कि बजट सत्र पेंशनरों को राहत देने का महत्वपूर्ण अवसर है। यदि सरकार इस बार भी पेंशनरों की मांगों की अनदेखी करती है तो संगठन राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तय करने के लिए बाध्य होगा।


