रायपुर

गणेश विनायक अस्पताल में मेटा विजन लैब
21-Feb-2026 8:23 PM
गणेश विनायक अस्पताल में मेटा विजन लैब

रायपुर, 21 फरवरी। बदलती तकनीक के साथ मेडिकल साइंस भी नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ रहा है।  इसी दिशा में रायपुर स्थित श्री गणेश विनायक आई हॉस्पिटल ने नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में मेटा विजऩ एआई लैब (एडवांस्ड ऑक्यूलर इमेजिंग एंड डायग्नोस्टिक यूनिट)’ स्थापित किया है। इस लैब से आँखों की संरचना को परत-दर-परत देखने और समझने में सक्षम है, जिससे कई गंभीर नेत्र रोगों की समय रहते पहचान संभव हो रही है। जापान, जर्मनी और अमेरिका में विकसित अत्याधुनिक तकनीकों से लैस यह यूनिट सेंट्रल इंडिया में विश्वस्तरीय नेत्र सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मेटा विजऩ एआई लैब की विशेषता केवल आधुनिक उपकरण नहीं, बल्कि एआई तकनीक और अनुभवी डॉक्टरों की विशेषज्ञ समझ का समन्वय है। इस यूनिट से जुड़ी मेडिकल टीम देश के प्रतिष्ठित नेत्र संस्थानों से प्रशिक्षित है, जिनमें शामिल हैं— डॉ. चारुदत्त कलमकार (एम्स, नई दिल्ली), डॉ. अनिल के. गुप्ता (शंकर नेत्रालय, चेन्नई), डॉ. अमृता मुखर्जी (एल. वी. प्रसाद आई इंस्टीट्यूट, हैदराबाद), डॉ. जयेश पाटिल (शंकर नेत्रालय, चेन्नई), डॉ. शुभांक खरे (अरविंद नेत्रालय), डॉ. रोहित राव (एल. वी. प्रसाद आई इंस्टीट्यूट, हैदराबाद)।

डॉ. चारुदत्त कलमकार ने बताया कि, एआई आधारित पेंटाकैम और अन्य उन्नत तकनीकों की मदद से अब ग्लूकोमा को शुरुआती अवस्था में ही सटीक रूप से पहचाना जा सकता है, जिससे समय रहते इलाज संभव है।

एआई आधारित ओसीटी एंजियोप्लेक्स तकनीक से रेटिना की रक्त वाहिकाओं में होने वाली लीकेज का अनुमान बिना डाई और बिना इंजेक्शन के लगाया जा सकता है। रेटिना विशेषज्ञ डॉ. जयेश पाटिल और डॉ. शुभांक खरे ग्रीन लेजऱ सहित आधुनिक उपचारों से मरीजों की दृष्टि सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

विशेषज्ञों ने बताया कि कॉर्निया और केराटोकोनस की प्रारंभिक पहचान: एआई आधारित पेंटाकैम तकनीक से कॉर्निया की टोपोग्राफी और टोमोग्राफी कर केराटोकोनस को शुरुआती चरण में पकड़ा जा सकता है। इस क्षेत्र में डॉ. अमृता मुखर्जी कॉर्निया रोगों और डेसैक सर्जरी जैसे उन्नत उपचार उपलब्ध करा रही हैं।

अब कैटरेक्ट सर्जरी केवल मोतियाबिंद हटाने तक सीमित नहीं रही। मल्टीफोकल और टॉरिक लेंस के उपयोग से मरीजों को दूर, नज़दीक और इंटरमीडिएट—तीनों दूरी पर स्पष्ट दृष्टि मिल रही है। अस्पताल में डॉ. अनिल के. गुप्ता और डॉ. चारुदत्त कलमकार द्वारा इन उन्नत लेंसों से सर्जरी की जा रही है, जिसे मरीज आम भाषा में कमांडो विजऩ का अनुभव बताते हैं।

ऑक्युलोप्लास्टी सर्जन डॉ. रोहित राव एआई आधारित ्रस्-ह्रष्टञ्ज तकनीक से आँसू नली, पलक और संबंधित जटिल समस्याओं का सटीक निदान और उपचार कर रहे हैं, जिससे सर्जरी अधिक सुरक्षित और प्रभावी बन रही है।


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