रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 12 फरवरी। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन की प्रांतीय बैठक रायपुर में आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश के कर्मचारियों की ज्वलंत समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रदेश में व्याप्त संविदा प्रथा को समाप्त करने सर्वसम्मति से उग्र आंदोलन करने का निर्णय लिया गया। साथ ही आधार बेस्ड अटेंडेंस प्रणाली में आ रही व्यवहारिक कठिनाइयों से शासन को अवगत कराते हुए इस व्यवस्था को समाप्त करने हेतु अंतिम पुनर्विचार के लिए ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया।
बैठक में शासन द्वारा महंगाई भत्ता देय तिथि से स्वीकृत नहीं किए जाने पर आक्रोश व्यक्त किया गया। इस दौरान पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा डीए एरियर्स का भुगतान देय तिथि से किए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की समीक्षा भी की गई। इसके संदर्भ में प्रदेश शासन से पत्राचार करने का निर्णय लिया गया।
सरकार यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप निर्णय नहीं लेने पर न्यायालय की शरण लेने का विकल्प खुला रखने का सुझाव दिया गया। बैठक में सेवानिवृत्त अधिकारी एवं कर्मचारियों को संविदा नियुक्ति दिए जाने की वर्तमान व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
फेडरेशन का कहना है कि इससे कार्यरत नियमितों की पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इससे कर्मचारियों में निराशा और असंतोष का वातावरण बन रहा है। इसके अतिरिक्त, संघ ने यह भी आशंका व्यक्त की है कि संविदा नियुक्तियों की प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव से पक्षपात और भ्रष्टाचार की संभावनाएँ बढ़ सकती हैं।
यदि नियुक्ति प्रक्रिया स्पष्ट, प्रतिस्पर्धात्मक और नियमबद्ध न हो, तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि सरकार द्वारा आधार बेस्ड अटेंडेंस व्यवस्था को समाप्त नहीं किया जाता है, तो सभी प्रांत अध्यक्षगण रायपुर में बैठक आयोजित कर आगामी आंदोलन को लेकर अंतिम निर्णय लेंगे।बैठक में सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में रिक्त पदों की भर्ती हेतु विशेष अभियान चलने हेतु पत्राचार करने का निर्णय लिया गया। कर्मचारी नेताओं ने दावा किया है कि लगभग सभी विभागों में केवल 60 प्रतिशत कर्मचारियों के बल पर ही विभाग चल रहे हैं।


