रायपुर

कैनरा बैंक खाते से करोड़ों की हेराफेरी का आरोप, बैंक अधिकारी पर केस
10-Feb-2026 8:02 PM
कैनरा बैंक खाते से करोड़ों की हेराफेरी का आरोप, बैंक अधिकारी पर केस

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 10 फरवरी। सिविल लाइन क्षेत्र में महिला ने बैंक कर्मी पर खाते में करोड़ों की हेराफेरी का आरोप लगाया है। आकांक्षा सिन्हा की शिकायत पर पुलिस ने कैनरा बैंक के अधिकारी मुकुंद सिंह के खिलाफ धारा 420 के तहत अपराध  दर्ज कर किया है।

 आरोप है कि उनके कैनरा बैंक खाते में फर्जी हस्ताक्षरों, अनधिकृत ऑपरेशन परिवर्तन और बैंकिंग सिस्टम के दुरुपयोग कर 2016 से 2022 के बीच लाखों रुपये की अवैध निकासी और ट्रांजैक्शन की गई।

आकांक्षा सिन्हा ने बताया कि उनका बैंक खाता वर्ष जून 2016 में खोला गया, जबकि उस समय वे संबंधित शहर में रहती तक नहीं थीं। उन्होंने कभी बैंक शाखा जाकर खाता नहीं खुलवाया । खाता खोलने का फॉर्म आरोपी मुकुंद सिंह उनके घर लाया और वहीं हस्ताक्षर करवाए गए।

 वर्ष 2017 में खाते की ऑपरेटिंग इंस्ट्रक्शन बिना किसी लिखित सहमति या हस्ताक्षर के ‘सिंगल ऑपरेशन’ में बदल दी गई, जिसकी पुष्टि बैंक स्वयं किसी वैध दस्तावेज से नहीं कर सका। यह परिवर्तन बैंक नियमों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है।मुकुंद सिंह ने खुद को उनके खाते का नामिनी बना लिया, जबकि इसके लिए भी बैंक के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं है।

आकांक्षा सिन्हा का कहना है कि उनका खाता वर्ष 2020 के बाद आधिकारिक रूप से राजीव नगर शाखा, रायपुर में ट्रांसफर हुआ, लेकिन इससे पहले भी विभिन्न शाखाओं से खाते का संचालन होता रहा, जहाँ आरोपी की पदस्थापना रही। यह सब बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं बताया गया है।

 आकांक्षा सिन्हा ने बताया कि उन्हें दिसंबर 2024 तक इस पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी ही नहीं थी। सीपीजीआरएएमएस के जवाब में पहली बार यह सामने आया कि खाते की ऑपरेटिंग स्टेटस बदली गई थी। इसके बाद उन्होंने आरटीआई, आरबीआई बैंकिंग लोकपाल और विजिलेंस सहित कई मंचों पर शिकायत की।

शिकायत पर पुलिस ने मामले में सीबीएस लॉग्स, सीसीटीवी फुटेज, बैंक कर्मचारियों के लॉगिन रिकॉर्ड, ट्रांजैक्शन ट्रेल और कथित फर्जी दस्तावेज अहम साक्ष्य की जांच की बात कही है।  प्रकरण में धारा 420 का अपराध दर्ज किया गया है।

एनईएफटी, आरटीजीएस, एटीएम और कैश विदड्रॉल

शिकायत के अनुसार, 2016 से 2022 के बीच खाते से एनईएफटी/आरटीजीएस ट्रांसफर, नकद और एटीएम ट्रांजैक्शन हुए, जबकि पीडि़ता का कहना है कि उन्होंने न तो कभी कोई चेक, एटीएम, एटीएम कार्ड, पासबुक या प्लेटिनम कार्ड लिया और न ही किसी ट्रांजैक्शन स्लिप पर हस्ताक्षर किए।

 


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