रायपुर

मोबाइल-लैपटॉप की रोशनी से बढ़ रहा आँखों पर दबाव, अभिभावक, शिक्षक अपनी जिम्मेदारी निभाएं-मनीष
08-Dec-2025 9:48 PM
मोबाइल-लैपटॉप की रोशनी से बढ़ रहा आँखों पर दबाव, अभिभावक, शिक्षक अपनी जिम्मेदारी निभाएं-मनीष

रायपुर, 8 दिसंबर। राजधानी में पिछले दिनों नेत्ररोग पर डाक्टरों का वर्कशॉप आयोजित किया गया। इसमें बच्चों की आंखें और मोबाइल का असर विषय पर विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी। इससे पहले नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में  बताया कि तेजी -बढ़ते डिजिटल इस्तेमाल और स्क्रीन टाइम के कारण किशोरों में आंखों से जुड़ी समस्याएं खतरनाक स्तर तक बढ़ रही हैं। ऐसे में समय रहते रोकथाम आवश्यक है।टीनएजर के डिजिटल आई स्ट्रेन से बचाव पर

डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट की बढ़ती स्क्रीनिंग आंखों को लगातार थकान देती है। 20-20-20 नियम अपनाएं।

जानबूझकर पलकें झपकाएं, क्योंकि स्क्रीन टाइम में पलकें 60त्न तक कम झपकती हैं। सही पोस्चर पर ध्यान दें ताकि आंखों और गर्दन पर तनाव न आए।

उन्होंने बताया कि प्राकृतिक धूप में समय बिताना निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) को रोक प्रभावी उपाय है।

धूप में जाते समय 100% UV A/B प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस पहनना अनिवार्य बताया।

डा श्रीवास्तव ने बताया कि पालक, केल, अंडे

ओमेगा-3: अखरोट, चिया सीड्स, अलसी, फैटी फिश

विटामिन ष्ट/श्व: संतरा, स्ट्रॉबेरी, बादाम

हाइड्रेशन: पर्याप्त पानी पीना आवश्यक

डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि किशोरों में लापरवाही के कारण आंखों के संक्रमण बढ़ रहे हैं। लैस हमेशा साफ हाथों से पहनें।

आंखों में लाली, दर्द, पानी आना जैसे लक्षण को कभी नजरअंदाज न करें।

उन्होंने कहा कि ग्लूकोमा जैसी कई बीमारियां बिना लक्षण के शुरू होती हैं, इसलिए हर वर्ष पूर्ण नेत्र जांच कराना अनिवार्य है।

क्रिकेट, फुटबॉल जैसे खेलों में तेज़ गति वाली गेंदें आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

टीनएजर्स को स्पोर्ट्स प्रोटेक्टिव आईवियर पहनने की सलाह दी गई।

माता पिता  से  डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि

14 वर्ष से पहले बच्चों को पर्सनल मोबाइल न दिया जाए।

टीवी एक घंटे से ज्यादा न देखने दें।

सोशल मीडिया का उपयोग 16 वर्ष के बाद ही करें।

शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश

छात्रों को डिजिटल माध्यम से प्रोजेक्ट / होमवर्क न दें, ताकि कम उम्र में मोबाइल की लत विकसित न हो।

 


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