रायपुर

नीट यूजी तीन मई और सीयूईटी-यूजी मई के दूसरे सप्ताह
06-Dec-2025 7:46 PM
नीट यूजी तीन मई और सीयूईटी-यूजी मई के दूसरे सप्ताह

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 6 दिसंबर। इस वर्ष  नीट यूजी तीन मई 26 और  सीयूईटी-यूजी मई के दूसरे सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। नीट के लिए फरवरी के पहले हफ्ते से पंजीयन शुरू हो सकता है। और  एक महीने तक आवेदन किए जा सकते हैं। सीयूईटी-यूजी का रजिस्ट्रेशन मार्च के पहले सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद है। सीयूईटी परीक्षा मई के दूसरे सप्ताह से सीबीटी मोड में आयोजित होगी और मई के अंत तक पूरी हो सकती है। सीयूइटी पीजी के लिए भी आवेदन प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है।परीक्षा अप्रैल में आयोजित की जाएगी। एनटीए ने जेईई मेन के पहले सत्र की परीक्षा तिथि जारी कर दी है। जेईई मेन पहले सत्र की परीक्षा 21 से 30 जनवरी तक आयोजित की जायेगी। वहीं, जेईई मेन अप्रैल सत्र के लिए फरवरी से आवेदन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस वर्ष नीट यूजी और सीयूईटी यूजी परीक्षा पैटर्न में बदलाव नहीं किया जाएगा। इस बार भी उम्मीदवारों को  अपनी पसंद के परीक्षा शहर चुनने का विकल्प मिलेगा। यह विकल्प आवेदन में ही दिया जाएगा।

एनटीए की तैयारियों से जुड़े लोगों का कहना है कि कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता कम करने और डमी स्कूलों की समस्या से निजात पाने के लिए केंद्र सरकार आगामी वर्षों में 11वीं कक्षा में ही जेईई मेन, नीट और सीयूईटी यूजी जैसी प्रवेश परीक्षाएं कराना, कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई 2-3 घंटे तक सीमित करना और बोर्ड परीक्षा के अंकों को प्रवेश परीक्षा के नतीजों के साथ जोडऩे पर भी मंथन कर रही है।

गौरतलब है कि जून माह में शिक्षा मंत्रालय ने कोचिंग सेंटरों पर बढ़ती निर्भरता और डमी स्कूलों की समस्या के मद्देनजर 11 सदस्यों की एक समिति गठित की थी। 15 नवंबर को हुई समिति की बैठक में इन्हीं सुझावों पर चर्चा की गई।

राष्ट्रीय दैनिक हिंदुस्तान,टीओआई  की रिपोर्ट के मुताबिक पैनल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एईपी 2020) के हिसाब से साल में दो बार अप्रैल और नवंबर में एंट्रेंस एग्जाम कराने पर भी चर्चा की। कमिटी यह भी देख रही है कि क्या एंट्रेंस एग्जाम के लिए एक ऐसा हाइब्रिड असेसमेंट मॉडल लाया जा सकता है जिसमें बोर्ड परीक्षा के मार्क्स और एप्टीट्यूड बेस्ड टेस्ट दोनों को वेटेज दिया जाए। यानी इंजीनियरिंग मेडिकल दाखिलों में प्रवेश परीक्षा प्राप्तांकों के साथ-साथ बोर्ड परीक्षा का प्रदर्शन भी देखा जाए। अधिकारियों ने कहा कि इससे क्लासरूम लर्निंग मजबूत हो सकती है। इंटरनल असेसमेंट बेहतर हो सकते हैं और कोचिंग पर बहुत ज्यादा निर्भरता कम हो सकती है।


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