रायपुर

तिल्दा में लाइमस्टोन खनन के खिलाफ आपत्ति, जनसुनवाई रद्द करने की मांग
01-Dec-2025 4:49 PM
तिल्दा में लाइमस्टोन खनन के खिलाफ आपत्ति, जनसुनवाई रद्द करने की मांग

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 1 दिसंबर। तिल्दा ब्लॉक के पचरी और कठिया गांवों में प्रस्तावित मंगलम सीमेंट लिमिटेड की 3.20 मिलियन टन प्रतिवर्ष लाइमस्टोन खनन परियोजना को लेकर ग्रामीणों और जन संगठनों ने आपत्तियां दर्ज कराई गई है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल को भेजे गए एक पत्र में जनसुनवाई को निरस्त करने और परियोजना की पर्यावरण स्वीकृति पर रोक लगाने की मांग की गई है।

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के आलोक शुक्ला और पेंड्रावन जलाशय बचाओ किसान संघर्ष समिति के घनश्याम वर्मा ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए कहा कि यह परियोजना पूरे क्षेत्र की जमीन, जंगल, पानी और आजीविका पर भारी खतरा बनकर उभर रही है।

पत्र के अनुसार खनन परियोजना के लिए 323.332 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित होगी, जिसमें लगभग 250 हेक्टेयर निजी कृषि भूमि और 72 हेक्टेयर चरागाह व सामुदायिक भूमि शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर खनन से खेती चौपट होगी, जलस्रोत खत्म होंगे और पर्यावरण पर स्थाई नुकसान होगा। परियोजना स्थल से खोलीडबरी और मोहरेंगा संरक्षित वन क्षेत्र मात्र 1.8 और 4.3 किलोमीटर की दूरी पर हैं। मोहरेंगा जंगल को राज्य सरकार ने पक्षी विहार नेचर सफारी घोषित किया है, जहां चीतल, बारहसिंघा, सियार और कई दुर्लभ पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। खनन से इन संवेदनशील वन क्षेत्रों की जैव विविधता पर गंभीर असर पडऩे का अंदेशा है।

प्रस्तावित खदान क्षेत्र विशाल कुम्हारी जलाशय के कैचमेंट एरिया में आता है। यह जलाशय 20 गांवों की 2632 हेक्टेयर जमीन को सिंचाई उपलब्ध कराता है और हजारों लोगों की पानी की जरूरत पूरी करता है।

ग्रामीणों का कहना है कि खनन शुरू होने से जलाशय का प्राकृतिक तंत्र बिगड़ेगा और पूरे इलाके में भारी जल संकट खड़ा हो जाएगा।

आपत्ति में कहा गया है कि परियोजना में स्थानीय लोगों को रोजगार बेहद कम मिलेगा, वह भी अधिकतर तकनीकी पदों पर। जबकि खनन शुरू होते ही पीढिय़ों से खेती पर आधारित स्थाई आजीविका खत्म हो जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि थोड़े दिनों का अस्थाई रोजगार, लंबे समय का विनाश साबित होगा।

पत्र में कहा गया है कि परियोजना के 10 किलोमीटर दायरे में 54 गांव आते हैं। यह क्षेत्र कृषि, जंगल और पानी आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर है। ग्रामीणों के अनुसार ऐसे घनी आबादी वाले कृषि क्षेत्र में खदान की अनुमति किसी भी हालत में नहीं दी जानी चाहिए। लोगों ने कहा कि यह ओपन कास्ट खदान होगी, जिसमें ड्रिलिंग, ब्लास्टिंग और क्रशिंग से धूल और ध्वनि प्रदूषण बहुत बढ़ेगा। इससे अस्थमा जैसी स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ेंगी। इसके अलावा परियोजना क्षेत्र से 1 किलोमीटर और 2 किलोमीटर की दूरी पर सरकारी स्कूल भी हैं। ब्लास्टिंग और भारी वाहनों की आवाजाही से बच्चों की सुरक्षा व पढ़ाई दोनों पर खतरा बताया गया है। पर्यावरण संरक्षण मंडल से मांग की गई है कि इन सभी कारणों को देखते हुए जनसुनवाई रद्द की जाए और परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति न दी जाए।


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