रायपुर
दो तरह की रसीदें उपयोग कर रहा ठेकेदार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 7 अक्टूबर। एम्स रायपुर में वाहन पार्किंग व्यवस्था पर वैध अवैध होने को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। न तो पार्किंग कर्मी इसकी स्थिति स्पष्ट कर रहे न? एम्स प्रबंधन का कोई अधिकारी कुछ कह रहा है। मरीजों के परिजन इस अवैध वसूली के चलते हर रोज 5 से लेकर 30 रूपए तक भुगतान करने मजबूर किए जा रहे हैं। पार्किंग कर्मियों द्वारा दी जा रही रसीद में किसी एस?एस मल्टी सर्विसेस का नाम लिखा है लेकिन उसका न पंजीयन नंबर है न जीएसटी नंबर। इसके बग़ैर फोटो कापी पर निकाले ग?ई कच्ची रसीद पर रोजाना अवैध वसूली जारी है। यहां तक कि साइकिल वालों से भी पैसा लिया जा रहा। ये कच्चा पैसा आखऱि जा कहाँ रहा है, इसका लिखा पढ़ी नहीं है।
एक आंकलन के अनुसार एम्स में हर रोज 5 हज़ार से ज़्यादा छोटे बड़े वाहन आते हैं। यदि टेंडर के जरिए ठेका दिया गया है तो इनमें से कितने से वैध शुल्क लिया जा रहा और कितने से कच्ची रसीद पर इसे देखने वाला कोई नहीं है। यह पार्किंग ओपीडी के पास गेट -4 के सामने बनाई गई है। जहां साइकल बाइक से लेकर कार आटो खड़े किए जाते हैं। सायकल के लिए 5 रूपए, बाइक 10 आटो- कार के लिए 30 और भारी वाहन के लिए 50 रूपए किराए की सूची लगाई गई है। इसके अनुसार ही पार्किंग कर्मी किसी को कच्ची रसीद तो किसी को प्रिंटेड रसीद देते हैं। समझा जा सकता है कि कच्ची रसीद का पैसे कहां उपयोग होता होगा। पांच हजार वाहनों का दैनिक किराया 8-10 हजार रुपए होता है। ऐसे में यह पार्किंग के नाम पर बड़ा स्कैम हो सकता है। एक सुविधा अवश्य परिजनों के हित में रखी गई है कि किराया 12 घंटे का लिया जाता है। सबसे अहम यह है कि रसीदों में जीएसटी नंबर, ठेका फर्म का नाम नहीं होने से वाहन चोरी होने की स्थिति में जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है। रसीद में ही प्रिंट कर दिया गया है कि पार्क एट ओनर्स रिस्क (वाहन मालिक अपनी जिम्मेदारी पर पार्क करें)। पैसे देकर भी चोरी होने पर वाहन मालिक ही जिम्मेदार होगा और ठेकेदार हाथ झाड़ लेगा।ऐसे में यह कहने में कोई आश्चर्य नहीं की प्रबंधन में किसी बड़े पदाधिकारी का संरक्षण नहीं है।
यहां बता दें कि एम्स की ऐसी ही अन्य व्यवस्थाओं को लेकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल भी नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा तक को पत्र लिख चुके थे। उसके बाद भी सुधार नहीं हुआ है।


