रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 23 सितंबर। छत्तीसगढ़ शासन कोष एवं लेखा विभाग मंत्रालय द्वारा अब एक नया निर्देश जारी कर प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों का ई-केवाईसी करने का निर्देश दिया गया है। जिससे शासकीय सेवकों का संपूर्ण बायोडाटा ऑनलाइन कम्प्यूटर में न केवल दर्ज होगा, बल्कि उसका आधार कार्ड से लिंक किया जावेंगा?। इससे प्रदेश के विभागीय अधिकारी कर्मचारी एवं कोषालय अधिकारी कर्मचारी परेशान है। कर्मचारी नेता एवं आम आदमी पार्टी कर्मचारी विंग के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार झा ने बताया है कि इसके लिए अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित किया गया है, जबकि सर्वर डाउन होने के कारण तथा माह का अंतिम समय के कारण वेतन देयक तैयार करने व सितंबर माह मासिक लेखा बन्दी की समस्या के कारण ई केवायसी संपन्न नहीं हो पा रहा है। श्रीधाम ने कहा हे कि सरकार हर कार्य को एक प्रयोगशाला बनाकर संपादित करना चाहती है वर्ष 21-22 में सभी कर्मचारियों का संपूर्ण सेवा दस्तावेज, बायोडाटा, नामिनी आदि जानकारी कार्मिक संपदा के द्वारा कंप्युटर में अपलोड किया गया है। उस समय कार्मिक संपदा में अपलोड न होने पर वेतन तक रोके गए थे, जिसमें संपूर्ण जानकारी पूर्व से ही है। ऐसी स्थिति में आधार कार्ड से लिंग करने के उद्देश्य से बैंक अकाउंट, वेतन, शासकीय सेवकों का दस्तावेज, किसानों के दस्तावेज सब आधार कार्ड से लिंक करने की योजना के तहत कराया जा रहा है। इससे कर्मचारियों की सभी निजी जानकारी प्रकट भी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को मूल दस्तावेज या पहचान नहीं माना है। उसके बाद भी आधार कार्ड से लिंक की जा रही है। श्री झा ने वित्त मंत्री ओ पी चौधरी से मांग की है कि इस प्रक्रिया कार्यवाही को भलीभांति शासकीय सेवक रहने के कारण उससे भिज्ञ हैं। इसलिए इस कार्यवाही को तत्काल रोक लगाए।
पेंशनरों को डीआर का लाभ समय पर नहीं
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 23 सितंबर। भारत सरकार द्वारा 1 जनवरी और 1 जुलाई को साल में दो बार मूल्य सूचकांक को आधार मानकर कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई के मार से राहत देने डीए - डीआर के आदेश जारी किया जाता है। लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य में इसका लाभ सिर्फ अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों और बिजली विभाग में ही कर्मचारियों और पेंशनरों को समय पर दिया जाता है, मानो बाजार की महंगाई से केवल आईएएस अधिकारी यानि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों और राज्य सेवा के बिजली कर्मचारी व पेंशनर के परिवार पर असर पड़ता है। इसलिए केंद्र सरकार द्वारा साल दो बार घोषित किया जाने वाला महंगाई भत्ता और महंगाई राहत के आदेश यथावत उन्हीं पर लागू किया जाता है बाकी अन्य शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को अघोषित तौर पर अपात्र मान लिए गए हैं और सन् 2017 से डीए-डीआर के एरियर राशि लगातार हजम कर रहे हैं।
जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश द्वारा मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 के कारण पेंशनरों को दोनों राज्य के बीच आर्थिक भुगतान में 74:26 अनुपात के बंटवारे से करोड़ों की नुकसान की बात को वित्त विभाग के अधिकारियों ने 2025 में स्वीकार किया है और अब इस घाटा की पूर्ति हेतु मध्यप्रदेश सरकार से पत्राचार कर रहे हैं। जारी विज्ञप्ति में इस बात पर भी आश्चर्य जताया है कि विधानसभा में महंगाई भत्ता के लिए बजट में प्रावधान किया जाता है, तो विधान सभा से पारित बजट में वित्त विभाग द्वारा कटौती करने का अधिकार कैसे हो सकता है।
जारी विज्ञप्ति में आगे कहा है कि एरियर कटौती शुरुवात में कर्मचारी संगठनों द्वारा जमकर विरोध नहीं किया जाना और उल्टे सरकार का अभिनंदन किया जाना , आज भी उसी तरह की परम्परा कायम है इसी वजह से ब्यूरोक्रेट की सलाह पर निर्णय लेनेवाली सरकार निश्चिन्त है और आज तो ब्यूरोक्रेट वित्त मंत्री होना सोने में सुहागा बन गया है। राज्य शासन के कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ वित्त विभाग द्वारा जान बूझ कर उनको मिलने वाले मंहगाई भत्ते और मंहगाई राहत की एरियर राशि को कई वर्षों से हड़पने का खेल किया जा रहा है।


