रायपुर
महिला को किया डिजिटल अरेस्ट
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 20 सितंबर। खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) का अधिकारी बताकर ठगों ने एक महिला साइंटिस्ट को जाल में फंसा लिया और 42 लाख रुपए की ठगी कर ली। महिला वैज्ञानिक का दावा है कि ठगों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखकर लगातार मानसिक दबाव बनाया और ह्यूमन ट्रैफिकिंग में शामिल होने का डर दिखाकर उनसे रकम निकलवा ली।
जानकारी के अनुसार, पीडि़त महिला की उम्र 72 वर्ष है और वह चंडीगढ़ स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रो बीएल टेक्नोलॉजी से बतौर साइंटिस्ट रिटायर हुई हैं। वर्तमान में वह रायपुर में रह रहीं हैं। ठगों ने महिला को यह कहकर डराया कि उनका मोबाइल नंबर और बैंक खाता ह्यूमन ट्रैफिकिंग और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गंभीर आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर तुरंत जांच में सहयोग नहीं किया तो उन्हें जेल जाना पड़ सकता है।
ठगों ने महिला से कहा कि अब वह डिजिटल अरेस्ट में हैं। इसका मतलब यह था कि जब तक जांच पूरी नहीं होगी, उन्हें मोबाइल और इंटरनेट पर निगरानी में रहना होगा। लगातार वीडियो कॉल और फोन पर दबाव बनाकर उन्हें मानसिक रूप से बंधक बना लिया गया। भयभीत महिला वैज्ञानिक ने ठगों की बातों पर विश्वास कर लिया और अपने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया खाते से अलग-अलग किश्तों में कुल 42 लाख रुपए क्रञ्जत्रस् के माध्यम से ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। ठगी का एहसास होने पर महिला ने तुरंत मामले की शिकायत पुलिस से की। उनकी शिकायत पर कोतवाली थाने में अज्ञात ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं में अपराध दर्ज किया गया है


