रायपुर
आरोप-धान की खरीदी में कटौती के लिए सरकार का षडय़ंत्र
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 16 सितंबर। छत्तीसगढ़ के किसानों को धान विक्रय के लिए नए पंजीयन हेतु एग्री पोर्टल बनाया गया है। इसके पूर्व गत वर्ष तक किसानों के पंजीयन हुए थे। उन्हीं पंजीकृत किसानों के धान क्रय किए गए थे। आप पार्टी के नेता कर्मचारी विंग प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार झा ने बताया है कि अब किसानों को धान विक्रय के पूर्व पुन: समितियों में पंजीयन करने का निर्देश कृषि विभाग द्वारा दिया गया है। इसके तहत एक व्यक्ति के छत्तीसगढ़ में यदि एक से अधिक ग्रामों में कृषि भूमि है तो उसका भी पंजीयन एक साथ होगा।
इस प्रक्रिया में लगातार पानी गिरने, मौसम की खराबी, सर्वर डाउन होने, एक से अधिक ग्राम में भूमि होने पर जल्द ओटीपी ना आने से किसान परेशान है। कुल मिलाकर महतारी वंदन में छंटनी के बाद अब किसानों की छंटनी की यह लंबी प्रक्रिया है। वैसे भी इस वर्ष धान का उत्पादन इसलिए कम होगा क्योंकि समय पर यूरिया खाद प्राप्त नहीं हुआ है। अब कीड़ों का भी प्रकोप होने लगा है। श्री झा ने बताया है कि सरकार ना रहे बांस ना बजे बांसुरी, ना अधिक धान का उत्पादन हो, ना अधिक धान क्रय करने की जरूरत पड़े की नीति पर चल रही है।
एमएसपी पर धान नहीं खरीदने का षडयंत्र
भाजपा सरकार इस वर्ष किसानों से समर्थन मूल्य में कम धान खरीदने का षडयंत्र कर रही है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि पहले डी.ए.पी. फिर यूरिया की कमी किया गया। किसान आज भी यूरिया के लिये परेशान है। यूरिया नहीं मिलने के कारण उनका उत्पादन कम होगा। अब सरकार ने फरमान जारी किया है कि बिना एग्री स्टेक में पंजीयन कराये कोई भी किसान धान नहीं बेच पायेगा। सरकार यह सब अडंगेबाजी इसलिये कर रही ताकि उसे 3100 रू. के भाव में किसानों का धान खरीदना पड़े। सरकार के पास धान खरीदने के लिये बजट का आभाव है। इसीलिये सरकार किसानों के उत्पादन से लेकर पंजीयन तक में बाधा पैदा कर रही है।
शुक्ला ने कहा कि बिना समुचित तैयारी के भारतीय जनता पार्टी की किसान विरोधी सरकार अपने तुगलकी निर्णय को किसानों पर जबरिया थोप रही है। एग्री स्टेट पोर्टल में केवल 2023 तक के ही रिकॉर्ड अपडेट किए गए हैं उसके बाद की खरीदी गई भूमि ,नामांतरण और बंटवारे की प्रविष्टियां सरकार के पोर्टल में ही दर्ज नहीं है जिसको लेकर किसान बार-बार तहसील, कलेक्टर , एसडीम, पटवारी और आरआई के चक्कर काटने मजबूर हैं।


