रायपुर
पुष्टिकर समाज का अद्वितीय आयोजन
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 5 मई। हिरण्यकश्यप को कोई मार नहीं सकता था, क्योंकि उसने कठिन तपस्या द्वारा ब्रह्मा को प्रसन्न करके यह वरदान प्राप्त कर लिया कि आपके बनाए किसी प्राणी, मनुष्य, पशु, देवता, दैत्य, नागादि किसी से मेरी मृत्यु न हो ऐसा वरदान पाकर हिरण्यकश्यप पृथ्वि पर अत्याचार करने लगा। धर्माचरण करने वालों को और विष्णु की पूजा करने वालों को सताने लगा। अपने पुत्र प्रहलाद को जो कि विष्णु भगवान का अनन्य भक्त था, उस पर भी अत्याचार करने लगा। अपने भक्तों पर होते अत्याचार को समाप्त करने और पृथ्वि को हिरण्यकश्यप के प्रकोप से मुक्त करने हरी विष्णु ने खंभा फाडक़र श्री नृसिंह का अवतार लिया। श्री नृसिंह जी और हिरण्यकश्यप में भयंकर युद्ध हुआ और फिर भगवान श्री नृसिंह ने अपने नाखुनों से हिरण्यकश्यप का पेट फाडक़र पृथ्वि को उसके अत्याचारों से मुक्त किया और अपने भक्तों की रक्षा की।
श्री नृसिंह का अवतार बैशाख मास की चतुर्दशी को हुआ था। श्री रायपुर पुष्टिकर समाज के ट्रस्टी राजेश व्यास ने बताया कि गुरूवार को हिरण्यकश्यप अपने जुलूस के साथ सदर बाजार स्थित गोपाल मंदिर से आम जन मानस पर प्रतिकात्मक रूप से कोड़े बरसाते हुएए अत्याचार करते हुए श्री बुढ़ेश्वर मंदिर पहुंचा । जहां पर श्री नृसिंह जी के खम्भा फाडक़र प्रकट होने को दृश्य मंचन किया गया’ त्रिकाल संध्या में यानी संध्या 6.34 मिनट पर हिरण्यकश्यप का प्रतिकात्मक रूप से वध किया गया।। इस वर्ष श्री नृसिंह जी की भुमिका रमेश पुरोहित एवं हिरण्यकश्यप की भुमिका राजकुमार व्यास द्वारा एवम भक्त प्रह्लाद की भूमिका आद्यन्त राज व्यास द्वारा निभाई गई।
इस संपूर्ण कार्यक्रम में समाज के गणमान्य नागरिकए एवं आम जन भी उपस्थित थे।


