मनेन्द्रगढ़-चिरिमिरी-भरतपुर
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
मनेंद्रगढ़, 8 अगस्त। कल मनेंद्रगढ़ वनमंडल के डीएफओ मनीष कश्यप के खिलाफ दिनभर सियासत और विरोध प्रदर्शन का माहौल बना रहा। गुरुवार सुबह 10 बजे से नगर पालिका अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सभी 22 पार्षद डीएफओ कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए। इस मामले में कांग्रेस-भाजपा एकजुट दिखे, कार्रवाई के भरोसे पर खत्म धरना हुआ।
आरोप था कि भालू की आवाजाही की शिकायत लेकर गए जनप्रतिनिधियों से डीएफओ ने अभद्र व्यवहार किया, केवल दो लोगों को चैंबर में बुलाया और बाकी को बाहर निकलवा दिया। इतना ही नहीं, कर्मचारियों को निर्देश दिया कि उन्हें धक्का देकर बाहर कर दिया जाए।
इस घटना से आहत जनप्रतिनिधि वहीं फर्श पर बैठ गए और दिनभर नारेबाजी होती रही।
धरना प्रदर्शन में भाजपा और कांग्रेस दोनों के पार्षद एक मंच पर दिखे। दोपहर में भरतपुर-सोनहत विधायक रेणुका सिंह और भाजपा जिलाध्यक्ष चंपा देवी पावले भी डीएफओ से मिलने पहुंचीं। इस बीच जब पत्रकार चैंबर में जाने लगे तो डीएफओ ने गेट बंद करवा दिया, जिससे मीडिया में भी नाराजगी फैल गई।
शाम को विधायक रेणुका सिंह बाहर आकर बोलीं, ये जहां-जहां रहते हैं, वहां विवाद होता है। ऐसे अधिकारी से सरकार की छवि धूमिल होती है। वन मंत्री को अवगत करा दिया है, देखिए कुछ रास्ता निकलेगा।
भ्रष्टाचार के आरोप-डीएफओ मनीष कश्यप पर इससे पहले भी भ्रष्टाचार और अनियमितता के गंभीर आरोप लग चुके हैं। महुआ बचाओ अभियान में समितियों से वसूली के आरोप, लाभांश की राशि में गड़बड़ी, अडानी परियोजना में पौधारोपण कार्यों में मनमाने ठेके, वन भूमि की सीमा निर्माण में एक ही ठेकेदार को तरजीह, और जेम पोर्टल के जरिए खरीद में अनियमितता की शिकायतें पहले ही मुख्यमंत्री तक पहुंच चुकी हैं। इन मामलों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बनी हुई थी, जो मंगलवार को उबाल के रूप में सामने आई।
अब निगाहें सरकार पर-डीएफओ के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी अब वन मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के हाथ में है। जनप्रतिनिधियों के मुताबिक, आंदोलन केवल इस आश्वासन पर समाप्त किया गया है कि अधिकारी पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।


