महासमुन्द
चंद्राकर ने रांची समिट में रखी बातें
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद,14जून। बीते 12 जून 2026 को झारखण्ड के रांची में पूरवर्तीय राज्यों झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडि़शा, छत्तीसगढ़ राज्यों का कृषि लागत एवं मूल्य निर्धारण आयोग कृषि एवं कृषक कल्याण परिषद भारत सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के रबी फसलों गेहूं, चना, मसूर,सरसों, कुसुम के मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारण हेतु विभिन्न राज्यों से चयनित प्रगतिशील किसानों से सुझाव लेने होटल चाणक्य रांची में मीटिंग समिट का आयोजन किया गया था। जिसमें छत्तीसगढ़ से बतौर प्रतिनिधि पहुंचे किसान योगेश्वर चन्द्राकर ने अपनी बातों को बिंदुवार रखते हुए चेयर मेंन प्रोफेसर के.गणेश कुमार, सेक्रेटरी अबूबकर एवं विभिन्न राज्यों के कृषि सचिवों के छत्तीसगढ़ के किसानों की समस्याओं को रखा।
योगेश्वर चंद्राकर ने कहा कि सरकार द्वारा यह सुनिश्चित किया जाये कि यदि सरकार किसी कृषि उत्पाद का न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी करती है तो वर्ष भर किसी भी स्थिति में चाहे वह धान हो, सब्जी हो, दलहन, तिलहन या फल हो। सारे उत्पाद न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे न बिके। सरकार औद्योगिक उत्पादों की तरह कृषि उत्पादों के मूल्यों का ध्यान रखे। कहा कि अक्सर देखने में आता है किसानों का उत्पाद जब बाजार में आता है तो उत्पाद की कीमतें गिराकर बिचौलिए फायदा उठाते है और कालाबाजारी करते है।
कहा कि कृषि उत्पादों का समर्थन मूल्य कृषि उर्वरकों,दवाओं के मूल्य संसोधन के उपरांत लागू किया जाये। क्योंकि जैसे ही समर्थन मूल्य 100-200 की वृद्धि होती है कृषि रसायनों, उर्वरकों के मूल्यों में भी वृद्धि हो जाती है परिणाम स्वरूप समर्थन मूल्य में वृद्धि का कोइ लाभ किसानों को नहीं मिल पाता। किसी उत्पादों को सुरक्षित रखने ब्लॉक स्तर पर कोल्ड स्टोरज की स्थापना की जाये, जंहा पर छोटे एवं लघु सीमांत किसान भी अपने उत्पादों खासकर सब्ज,फल, चना, वनोपज को लम्बे समय तक सुरक्षित रख सके।
पशुधन कृषि का अभिन्न अंग है जो न केवल हमें रसायन मुक्त खेत साथ ही अतिरिक्त लाभ भी प्रबंध करते हंै। इसके लिए गौ धन को बढ़ावा देने, ग्राम स्तर पर चारागाह और गौशाला के साथ गौ उत्पादों को खरीदने की व्यवस्था सुनिश्चित हो। किसानों को कृषि सहायक के रूप में गाय, बैल, मुर्गी, बकरी, मछली, बटेर मुफ्त प्रदाय एवं पालन एवं जैविक खाद निर्माण प्रशिक्षण दिया जाये। रोजगार गारंटी के तहत कृषि कार्यों को जोड़ा जाये और दलहन, तिलहन एवं अन्य रबी फसलों के उत्पादन को क्षेत्रवार मृदा परीक्षण एवं मौसम के अनुरूप सामूहिक स्तर पर बोने एवं बीज, प्रशिक्षण, बाजार एवं फसल क्षति की स्थिति में बिना सरकारी रुकावट के व्यक्तिगत क्षति पूर्ति देने का प्रबंध किया जाये। ताकि छोटे किसानों को कम मात्रा में भी अपने उत्पादों को बेचने में असुविधा न हो।
योगेश्वर चंद्राकर ने ब्लॉक स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट जैसे दाल मिल, मसाला उद्योग, टमाटर सॉस, अचार, पापड़, दुग्ध उत्पाद को बढ़ेावा देने कुटीर उद्योगों की स्थापना की बात कही। कहा कि सहकारिता को बढ़ावा दिया जाये। वैश्विक बाजार के मांग के अनुरूप गुणवत्ता युक्त उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जाये जिससे वैश्विक खाद्य बाजार में भारती कृषि उत्पादों की बिक्री से किसानों को उचित मूल्य मिल सके साथ ही विदेशी मुद्रा कोष में भी वृद्धि हो। उन्होंने रबी वर्ष 2026-27 हेतु गेहूं वर्तमान समर्थन मूल्य 2585 को बढ़ा कर 3000, चना 5875 को बढ़ाकर 7050, मसूर 7000 से बढ़ाकर 7300, सरसों 6200 को बढ़ाकर 7000 एवं कुसुम 6550 को बढ़ाकर 7100 करने का सुक्षाव रखा।


