महासमुन्द

मेडिकल कॉलेज बनाने की दूसरी डेडलाइन भी फेल, ठेकेदार ने और समय मांगा
12-Jun-2026 4:28 PM
मेडिकल कॉलेज बनाने की दूसरी डेडलाइन भी फेल, ठेकेदार ने और समय मांगा

322 करोड़ से बन रहा 100 सीटों वाला मेडिकल कॉलेज ढाई साल बाद भी अधूरा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद,12जून।
महासमुंद में सरकारी मेडिकल कॉलेज के नए भवन का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। 322 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा 100 सीटों वाला मेडिकल कॉलेज ढाई साल बाद भी अधूरा पड़ा है। निर्माण कार्य की सुस्त रफ्तार का खामियाजा करीब 500 मेडिकल छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। मेडिकल छात्र आज भी जिला अस्पताल के अस्थायी और उधार की व्यवस्था वाले भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

इसमें सबसे बड़ी बात यह सामने आई है कि परियोजना लगातार दूसरी बार तय समय सीमा में पूरी नहीं हो सकी। पहले भवन को अक्टूबर 2025 तक तैयार किया जाना था, लेकिन काम अधूरा रहने पर समय सीमा बढ़ाकर मई 2026 कर दी गई। मई गुजरकर जून में बदल गई लेकिन निर्माण पूरा नहीं हुआ। अब जिम्मेदार अधिकारी सितंबर 2026 तक काम पूरा होने का दावा कर रहे हैं। जबकि मौके पर हालात कुछ और कह रहा है।
वर्तमान स्थिति यह है कि भवन का ढांचा खड़ा हो चुका है, लेकिन फिनिशिंग, बिजली,पानी कनेक्शन, विद्युत सब स्टेशन, इलेक्ट्रिक पैनल और मेडिकल उपकरणों की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण कार्य अब भी आधे अधूरे हैं। परियोजना का केवल 83 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। वर्ष 2022 से संचालित मेडिकल कॉलेज में चार बैच पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक आधुनिक लैब, हॉस्टल और स्थायी शैक्षणिक सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं। पीजी कक्षाएं शुरू करने की योजना भी भवन निर्माण की सुस्ती में चल रही है।

मेडिकल कॉलेज की डीन रेणुका गहने के अनुसार ठेकेदार ने अब सितंबर 2026 तक समय बढ़ाने के लिए आवेदन दिया है।
 सीजीएमएससी के आशीष साहू ने मीडिया को बताया कि काम समय पर पूरा नहीं हो पाया है। ठेकेदार और निर्माण एजेंसी की धीमी कार्यप्रणाली की वजह से प्रोजेक्ट में 6 महीने की देर हो चुकी है। इंटीरियर डिजाइनिंग,बिजली वायरिंग और विद्युत सब-स्टेशन लगाने का काम अभी बाकी है। ऐसे में सितंबर 2026 से पहले काम पूरा होना मुश्किल दिख रहा है। इस भवन की शुरुआती लागत 322 करोड़ है। फेज-1 में काम की शुरुआत दिसंबर 2023 पहली डेडलाइन अक्टूबर 2025 थी। दूसरी डेडलाइन मई 2026 भी अधूरी रही। वर्तमान प्रगति लगभग 83 प्रतिशत है। यहां एमबीबीएस सीटें 100, भविष्य में 150 प्रस्तावित, कुल छात्रों की संख्या 4 बैच में कुल 500 है। इस भवन की निर्माण एजेंसी छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन एक्जीक्यूटिव ब्रिज एंड रूफ  कंपनी इंडिया लिमिटेड है जिसमें ठेकेदार कल्याण टोल इंफ्रास्ट्रक्चर लि. महासमुंद काम कर रहे हैं। यह मेडिकल कॉलेज 90 एकड़ क्षेत्र में बन रहा है लेकिन धीमा गति ने इसकी उपयोगिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर काम की उपयोगिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर काम की यही रफ्तार रही, तो साल 2026 के नए बैच के स्टूडेंट्स को भी इसी अस्थायी और बिल्डिंग में पढ़ाई करनी होगी।


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